गर्मी शुरू होते ही सजा मटकों व सुराही का बाजार

मोगा गर्मी शुरू होते ही मिट्टी के मटकों व सुराही की मांग बढ़ने के कारण बाजार में इनकी दुकानें सज गई हैं। तकनीक के बदलते दौर में अब मिट्टी के डिजाइनर सुराही मटके व बोतल बाजार में लोगों को आकर्षित करते रहे हैं। इस बारे में मोगा में इसका सबसे बड़ा बाजार प्रताप रोड पर है।

JagranSat, 01 May 2021 11:21 PM (IST)
गर्मी शुरू होते ही सजा मटकों व सुराही का बाजार

तरलोक नरूला, मोगा

गर्मी शुरू होते ही मिट्टी के मटकों व सुराही की मांग बढ़ने के कारण बाजार में इनकी दुकानें सज गई हैं। तकनीक के बदलते दौर में अब मिट्टी के डिजाइनर सुराही, मटके व बोतल बाजार में लोगों को आकर्षित करते रहे हैं। इस बारे में मोगा में इसका सबसे बड़ा बाजार प्रताप रोड पर है।

ऐसे में आजकल डिजाइनर मिट्टी के बर्तनों की खूब बिक्री हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्ष इन दिनों लाकडाउन के कारण मिट्टी के बर्तनों की बिक्री नहीं हो सकी थी। इस बार उम्मीद है कि बिक्री पहले की ही तरह होगी, क्योंकि अभी आंशिक लाकडाउन है। इस बार गुजरात की सफेद मिट्टी से बने डिजाइनर घड़े व सुराही पहली बार मोगा की मार्केट में आए हैं। ये भी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रहे हैं।

इस बारे में श्री राम आर्ट गैलरी के ज्ञान चंद वर्मा ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी कारोबार है जो दादा-परदादा के समय से चला आ रहा है। उन्होंने बताया कि पानी की सुराही व घड़ा 60 रुपये से लेकर 130 रुपये तक की बिक रही है। वहीं पानी की बोतल 80 रुपये से लेकर 150 रुपये तक की है। इस बार गुजरात की सफेद मिट्टी से बनी डिजाइनदार सुराही व मटके जो पहली बार मार्केट में आए हैं, के प्रति लोगों का ज्यादा रुझान है। इसकी कीमत 100 रुपये से लेकर 250 रुपये तक साइज के मुताबिक है।

प्रताप रोड पर मिट्टी के बर्तनों के दुकानदार रवि कुमार कहते हैं कि बीते वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते काम ठप रहा। मगर, इस बार गर्मी बढ़ने से सुराही, घड़े, गिलास व बोतल की मांग बढ़ने लगी है। मिट्टी के इन बर्तनों के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाए गए हैं। गर्मी के चलते आने वाले कुछ दिनों में इसकी और अच्छी बिक्री की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आरओ के पानी में मिनरल खत्म हो जाता है जिसको देखते हुए लोगों का रुझान फिर से मिटटी के बने घड़ों व सुराही की तरफ है।

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मटके का पानी लाभदायक

फार्मेसी साइंटिस्ट डा. जीडी गुप्ता का कहना है कि मिट्टी के घड़े का पानी ठंडक तो पहुंचाता ही है। यह पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है। गैस्ट्रिक और एसिडिटी की शिकायत दूर होती है। घड़े का पानी पीने से शरीर में टेस्टोस्ट्रोन का स्तर भी बढ़ता है, जिससे मेटाबालिज्म अच्छा रहता है।

घड़े का पानी पीने से गले से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। मटके का पानी पीने से पीएच वेल्यू संतुलित रहती है। मिट्टी के क्षारीय तत्व सोडियम पोटेशियम पानी के पीएच वेल्यू को बैलेंस रखते हैं। मटके का पानी एक तरह का इलेक्ट्रोलाइट भी है, जो मिट्टी के क्षारीय तत्व सोडियम, क्लोराइड और मैग्नीशियम के साथ मिलकर शरीर में विद्युत शक्ति का संचालन बनाए रखता है।

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