स्वास्थ्य मंत्री ने वेंटीलेटर पर पड़े सिविल अस्पताल की नहीं टटोली नब्ज

। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सोमवार को सरकारी खर्च पर सिविल अस्पताल का दौरा करने पहुंचे लेकिन सियासी रोटियां सेंककर चले गए।

JagranMon, 26 Jul 2021 10:41 PM (IST)
स्वास्थ्य मंत्री ने वेंटीलेटर पर पड़े सिविल अस्पताल की नहीं टटोली नब्ज

सत्येन ओझा.राजकुमार राजू.मोगा

स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सोमवार को सरकारी खर्च पर सिविल अस्पताल का दौरा करने पहुंचे, लेकिन सियासी रोटियां सेंककर चले गए। वेंटीलेटर पर पड़े अस्पताल की नब्ज टटोलना उन्होंने जरूरी नहीं समझा। कड़ी सुरक्षा के बीच तीन विधायकों के साथ पहुंचे मंत्री ने पुरानी इमरजेंसी के ऊपर बने जनरल वार्ड में सड़क हादसे में घायल मरीजों का हालचाल जाना और चलते बने।

जनरल वार्ड के निकट ही दूसरे वार्डों में भर्ती मरीज अस्पताल के कुप्रबंधन से जूझ रहे हैं, लेकिन मंत्री ने उनका हाल जानने का प्रयास तक नहीं किया। एक सप्ताह पहले बारिश का पानी ब्लड बैंक में घुस गया था, जिस कारण चार घंटे डीप फ्रिजर बंद करने पड़े थे। सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन ब्लाक होने के बावजूद सीटी स्केन मशीन के लिए जगह न होने की बात कहकर टेक्नीशियन को वापस कर दिया। चिकित्सकों की कमी है, 150 बेड वाले अस्पताल में इमरजेंसी में सिर्फ छह बेड हैं। वेंटीलेटर पर चल रहे सिविल अस्पताल की छवि रेफरल अस्पताल के रूप में बनती जा रही है, लेकिन मंत्री ने अस्पताल की नब्ज को न समझने का प्रयास किया न ही टटोलने का है। क्या है मामला

फिरोजपुर जिले के जीरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुलबीर सिंह जीरा मंत्री की गाड़ी चलाकर सोमवार सुबह 9.51 बजे मथुरादास सिविल अस्पताल पहुंचे। गाड़ी की पिछली सीटों पर विधायक डा.हरजोत कमल व बाघापुराना के विधायक दर्शन सिंह बराड़ बैठे हुए थे। उनकी सुरक्षा में वहां पहले ही एसपी व तीन डीएसपी की मौजूदगी के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। डीसी संदीप हंस, सिविल सर्जन ने हास्पिटल में मंत्री का स्वागत किया। मंत्री सीधे जनरल वार्ड में भर्ती सड़क हादसे में घायल मोगा निवासी साहिब कौर, गांव लल्ले निवासी रोडवेज बस कंडक्टर सुखबीर सिंह, एक अन्य रोडवेज बस के ड्राइवर चन्नन सिंह, सूरत सिंह एवं मंजीत कौर का हाल जानने पहुंचे। कुछ देर घायलों से बात की, बेहतर इलाज का भरोसा दिया, अन्य किसी भी मरीज या अस्पताल की व्यवस्थाओं पर मंत्री ने कोई बात न ही अधिकारियों से चर्चा की।

मंत्री के साथ पूर्व मंत्री डा.मालती थापर, पूर्व विधायक विजय कुमार साथी के अलावा स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डा.अंदेश कंग, एसएमओ डा.सुखप्रीत बराड़, सहायक सिविल अस्पताल डा.जसवंत सिंह, डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डा.राजेश अत्री, पीसीएमएस के अध्यक्ष डा.गगनदीप सिंह, डा.नरिदर जीत सिंह, डा.इन्द्रवीर सिंह, डा.नवदीप बराड़, चीफ फार्मेसी अफसर राजेश भारद्वाज भी मौजूद थे। तीसरी लहर की पूरी तैयारी का कर गए दावा

अस्पताल में न कोई वेंटीलेटर है, न लेवल-थ्री का कोई बेड, ईएनटी का कोई स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी नहीं। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह फिर भी दावा कर गए कि कोरोना की तीसरी लहर आती है तो इसके लिए अस्पताल में पूरी तैयारी है। हड़ताली चिकित्सकों ने उन्हें रिमाइंडर दिया तो उन्हें एक सप्ताह में हल करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए चले गए।

दर्जा चार मुलाजिमों की अनदेखी

अस्पताल के दर्जा चार मुलाजिम मंत्री से अपनी मांगों के संबंध में मिलना चाहते थे, लेकिन मंत्री उनसे नहीं मिले, मुलाजिम वीरपाल कौर, बलजीत कौर, नसीब कौर का कहना है कि उन्हें सुबह सात बजे सफाई के लिए बुला लिया था। वे मंत्री से अपनी समस्याओं को लेकर मिलना चाहते थे, लेकिन मंत्री उनसे नहीं मिले। अस्पताल में 60 मुलाजिमों का काम सिर्फ 40 मुलाजिम कर रहे हैं। पावरकाम ठेका मुलाजिमों ने दिखाई काली झंडियां

मंत्री को अस्पताल में प्रवेश करते समय पुलिस के तमाम बंदोबस्तों के बावजूद पावरकाम ठेका मुलाजिम कमेटी ने काली झंडियां दिखाकर स्वास्थ्य मंत्री का विरोध किया। पावर काम ठेका मुलाजिम कमेटी के अध्यक्ष सुखचैन सिंह फरीदकोट, निशान सिंह, लक्खासिंह, पवन कुमार, आदि ने सिविल अस्पताल के मुख्य गेट के पास काली झंडी दिखाकर आउट सोर्स मुलाजिमों को पक्का करने की मांग की है। मरीज परेशान, नहीं जाना हाल

अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घायल हालत में भर्ती डुढीके निवासी राजिदर कौर, गुरदेव सिंह ने बताया कि वार्ड में गंदगी का बुरा हाल है। लाइट फ्लेक्चुएट करती हैं, बाथरूम का हाल तो ये है कि स्वस्थ व्यक्ति भी अगर उसमें चला जाए तो बीमार होकर बाहर निकले। मंत्री अगर उनका हाल भी पूछते तो सच्चाई उनके सामने आ जाती।

ये है जमीनी हकीकत

सिविल अस्पताल को ढाई साल पहले रोटरी क्लब मोगा स्टार ने 1.5 करोड़ की सीटी स्कैन मशीन देने का आफर किया था। मशीन की मेंटीनेंस की भी जिम्मेदारी ली थी। अस्पताल का सिर्फ जगह देनी थी, एक रेडियोलाजिस्ट देना था, लेकिन ये प्रस्ताव ठुकराया तो नहीं लेकिन सहमति भी नहीं दी। सीटी स्कैन मशीन लगने पर मरीज को सिर्फ एक हजार रुपये में ये सुविधा अस्पताल में ही मिल जाती, बाहर दो हजार रुपये में स्कैन होता है। कोरोना काल में तो मरीजों से इसके तीन हजार रुपये तक वसूले गए। अब चंडीगढ़ की एक कंपनी को सरकार ने पूरे पंजाब में सीटी स्कैन मशीन लगाने का ठेका दिया है। पिछले सप्ताह टेक्नीशियन आए थे, उन्हें ये कह दिया गया कि अस्पताल में जगह नहीं है, जबकि अस्पताल में पूरा सीटी स्कैन ब्लाक बना हुआ है। उस पर मलेरिया विभाग ने कब्जा जमा लिया है। अगर मंत्री अस्पताल को कुछ समय दे पाते तो उनके सरकारी दौरे का लाभ शहर को मिल पाता, लेकिन वे सिर्फ कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू की ताजपोशी में शामिल होने जा रहे बस हादसे में घायल मरीजों का हालचाल पूछने तक सीमित रहे। यहां से वे सीधे बरनाला के लिए रवाना हो गए।

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