थाने बने तलाब, सिविल अस्पताल की ओपीडी की छत से टपकता रहा पानी

। शहर में वीरवार तड़के से शुरू हुई मूसलाधार बारिश के बीच एक बार फिर पूरा शहर पानी में डूबा नजर आया।

JagranThu, 23 Sep 2021 10:15 PM (IST)
थाने बने तलाब, सिविल अस्पताल की ओपीडी की छत से टपकता रहा पानी

सत्येन ओझा.राज कुमार राजू,मोगा

शहर में वीरवार तड़के से शुरू हुई मूसलाधार बारिश के बीच एक बार फिर पूरा शहर पानी में डूबा नजर आया। हर तरफ बाढ़ जैसे हालात थे। शहर के दोनों थाने बरसात के पानी में डूबे नजर आए। थाना साउथ सिटी की बेहद जर्जर हो चुकी बिल्डिंग में मुलाजिमों को थाने के रिकार्ड के साथ अपनी जान ले लाले भी पड़े रहे। थाना सिटी वन में भी पानी जमा हो गया। उधर, मथुरादास सिविल अस्पताल की ओपीडी की छतें मेंटीनेंस के नाम पर खोद दिए जाने के कारण ओपीडी ही नहीं बल्कि वार्डों की छतों से भी पानी टपकता रहा।

जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स के बाहर दरिया बहता नजर आया, जिसमें दो फुट तक जलभराव के बीच बने गड्ढों में ट्रक फंस गया। ट्रक चालक ने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई। मौसम विभाग के अनुसार पहले तीन घंटे में सुबह आठ बजे तक 8.6 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। सुबह से जारी बारिश दोपहर साढ़े 12 बजे के बाद थमी।

प्रताप रोड-मेन बाजार तिराहे पर तो सुबह करीब 10 बजे तक डेढ़ फुट तक पानी भर जाने से यहां से गुजरते वाहनों के कारण काफी ऊंची लहरें उठ रही थीं। गीता भवन व कश्मीरी पार्क के बीच तो अब तक तो मुख्य सड़क ही पानी में डूबती थी, लेकिन वीरवार को हुई मूसलाधार बारिश में गीता भवन वाली सड़क पर भी जलभराव ही नहीं हुआ बल्कि बरसात का पानी गीता भवन में भर गया। सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति शहर के हाईवे पर फिरोजपुर रोड स्थित लिक सड़कों पर रही, जहां पर जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स के ठीक सामने बड़ा तालाब बना नजर आया। वहीं दूसरी ओर गौमती थापर हास्पिटल के बाहर करीब आधा किलोमीटर क्षेत्र में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर जाने से चौपहिया वाहनों का भी यहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं था, क्योंकि पूरी बारिश के दौरान लगातार जलभराव से सड़कें टूट चुकी हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से हमेशा खतरे का अंदेशा बना रहता है। शहर के निचले इलाके का हाल तो और भी ज्यादा खराब था। न डाक्टरों के बैठने के लिए जगह बची न मरीजों के लिए

मथुरादास सिविल अस्पताल में इन दिनों दो करोड़ रुपये की लागत से रेनोवेशन का काम चल रहा है। रेनोवेशन करने वाले योजनाकारों ने अस्पताल का फर्श तो मानसून से पहले बिछवा दिया, लेकिन ओपीडी ब्लाक की छतें मानसून सक्रिय होने के बाद खुदवा दीं। उसका परिणाम वीरवार को हुई बारिश के दौरान देखने को मिल रहा था। छतें टपक रही थीं, न चिकित्सकों को बैठने की जगह थी न मरीजों के लिए। ओपीडी के कमरों में कीचड़ हो गया था। ओपीडी ब्लाक के मुख्य द्वार पर पानी भरा हुआ था। डीएमसी आफिस के बाहर जमा निकालने को सफाई सेवकों ने आधा घंटे तक जमकर पसीना बहाया। दस साल बाद सड़क बनी, ड्रेनेज का नहीं रखा ध्यान

नगर निगम ने पहाड़ा सिंह चौक से बहोना चौक को जाने बेहद खस्ताहाल सड़क को करीब दस साल के बाद बनवा दिया था लेकिन सड़क बनाने से पहले ड्रेनेज की व्यवस्था करना भूल गए , जिस कारण वीरवार को पूरी सड़क तालाब बनी हुई थी। इससे पहले भी मानसून में लगातार इस सड़क पर जलभराव रहने से आशंका है। मानसून खत्म होने तक सड़क फिर टूट जाएगी। सड़क के दोनों ओर पहले नाला बना था, वह बंद कर दिए जाने के बाद ड्रेनेज की कोई ठोस व्यवस्था न होने से ये हालात पैदा हो गए। सड़क पर जलभराव के कारण पानी दुकानों में भी घुसने लगा है।

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