लुधियाना में पंडित विजय पांडेय बोले- स्वयं के दुखों को छुपाकर दूसरों के दुख समाप्त करना ही राम कथा है

श्रीराम कथा में संबोधित करते हुए कथा व्यास पंडित विजय पांडेय।

लुधियाना में गगन नगर ग्यासपुरा में संगीतमयी श्रीराम कथा का प्रारंभ सैकड़ों श्रद्धालुओं की संगीतमय श्री हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। इस अवसर पर कथा व्यास पंडित विजय पांडेय ने कथा में संस्कार की सीख पर महत्ता दी।

Vinay kumarSat, 27 Feb 2021 01:09 PM (IST)

लुधियाना, जेएनएन। चरितं रघुनाथस्य, कैकक्षरम महापातक नाशनम’ श्रीराम कथा जीवन का मार्ग निष्कंटक कराती है। राम का नाम मोक्ष का मार्ग खोलता है। पाप कर्म, संस्कार पूर्वजन्म के भी साथ रहते हैं लेकिन कुसंस्कार और सुसंस्कार क्या अपनाना है, ये सुबुद्धि रामकथा देती है। शुक्रवार को आठवें दिन गगन नगर ग्यासपुरा में मुख्य आयोजक राजकुमार भारद्वाज की अगुआई में आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा का प्रारंभ सैकड़ों श्रद्धालुओं की संगीतमय श्री हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। कथा व्यास पंडित विजय पांडेय ने कथा में संस्कार की सीख पर महत्ता दी। सुसंगत ही आपके जीवन में सुख शांति देती है। स्वयं के दुखों को छुपाकर दूसरों के दुख समाप्त करना ही राम कथा है। राम कथा का एक पंक्ति में सारांश यही है। कथा व्यास पंडित विजय पांडेय ने कहा कि आपसे जप, तप, पूजा, दर्शन, यात्रा नहीं हो, मत करो , सिर्फ सत्य को ही अपना लो, सत्य ही सबसे बड़ा तप है। झूठ बंद कर दो।

जनम जनम रति राम पद... भरत ने ये प्रार्थना की। भजन-मेरे मन में है राम मेरे तन में है राम... पर भक्तों ने नृत्य किया। आज इसके विपरीत हो रहा है। मन मे द्वेष ईर्ष्या जलन है। घर घर में राम हो। पर घर घर में रावण, कैकयी, मंथरा है। तब फिर आपको सुख शांति खुशहाली कैसे मिलेगी। राम भरत लक्ष्मण शत्रुघ्न के आपसी प्रेम सौहार्द की सीख भाइयों को दी। अत्रि अनुसूया के प्रसंग में उन्होंने कहा कि एक नारी के सतीत्व की शक्ति देखो- अनुसूया ने जगत विधाता, जगत पालक और महाकाल ब्रह्मा विष्णु महेश को नवजात शिशु बना दिया। अपना पति ही सर्वस्व मान कर पति व्रत का पालन करने वाली नारी की शक्ति अमोघ होती है।

पुरुषों में संयम बरतने वाले भी गृहस्थ संत की तरह होते हैं। और कामान्ध शूर्पणखा जैसे रावण के वंशज है। खरदूषण वध, मारीच स्वर्ण मृग , रावण द्वारा सीता हरण, सीता के लिए पक्षी जटायु की ओर से रावण से संघर्ष, अशोक वाटिका में सीता माता को सुरक्षित पहुंचाना, राम लक्ष्मण द्वारा सीता की खोज, के बाद शबरी माता की तपस्या, चित्रकूट के घाट घाट पर भीलनी जोवे वाट...भजन पर भक्त जन भक्ति से सराबोर होकर नृत्य करने लगे।

इस दौरान मुख्य आयोजक राजकुमार भारद्वाज, सविता भारद्वाज, मनोज भारद्वाज, प्रतिमा भारद्वाज, लक्सरी राम डोगरा, प्यारा सिंह, पुष्पिंदर शर्मा, पूर्वांचली नेता एएन मिश्रा, बीजेपी नेता सुरेन्द्र शर्मा, दिनेश मिश्रा, गोकरण तिवारी, हरीश कुमार गोना, त्रियम्बक राज भारद्वाज, बृजभूषण सिंह, दया शंकर शुक्ला, गायक सन्तोष उपाध्याय अनुराग शुक्ला आदि मौजूद रहे।

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