कर्मो का मिलेगा फल, आज नहीं तो कल

संस, लुधियाना : अखिल भारतीय सोहम महामंडल की ओर से किदवई नगर स्थित, श्री शिव शक्ति मंदिर भवन में कराए जा रहे संत सम्मेलन में मंगलवार की सभा में स्वामी सत्यानंद महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि प्रभु तो आनंद स्वरुप हैं। उनका नाम हमेशा आनंद ही प्रदान करता है। दुख हमारे कर्मो के कारण मिलते हैं। कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। चाहे इस जन्म में या किसी दूसरे जन्म में। उन्होंने कहा कि जैसा आपका कर्म होगा, वैसा ही फल भोगना पडे़गा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे महाभारत में भीष्म पितामह को अपने कर्मो का फल भोगना पड़ा था उसी तरह से शिव पुराण में दक्ष प्रजापति को भी अपने कर्मो का फल भोगना पड़ा था। इसलिए जितना जीवन बचा है। उसमें अच्छे कर्म कर ले, ताकि बुरे कर्मों के भयंकर परिणामों से बचा जा सके। स्वामी ने इस व्याख्यान को भजनों द्वारा प्रमाणित करके भी बतलाया।

यहां विजय गर्ग, नरेश बुद्धिराजा, गुलशन अग्रवाल, समीर चोपड़ा, डॉ. भोला, राजेद्र गर्ग, ज्ञान सूद आदि ने संतों का अनुमोदन किया। प्रकृति बड़ी विशाल: स्वामी शिव चेतन

स्वामी शिव चेतन ने कहा कि प्रकृति बड़ी विशाल है। मनुष्य के पैदा होने से पहले ही प्रभु हर बात की व्यवस्था कर देते हैं। शुकदेव नंद ने आध्यात्म के कई प्रसंग सुनाएं। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि इस आधुनिक संसार का सूत्र है कि स्वयं करो या फिर सहन करो। स्वामी प्रीतम दास, स्वामी नारायण नंद, स्वामी भगवतानंद व ब्रह्मचारी गौरव स्वरुप ने भी रामायण, जीत के माध्यम से रोचक प्रसंग सुनाएं।

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