पुलिस की तीसरी आंख को हो रहा मोतियाबिंद

पुलिस की 'तीसरी आंख' को हो रहा मोतियाबिंद

शहर में लगातार बढ़ रही लूट व छीनाझपटी की वारदातों पर नकेल कसने के लिए चलाई गई योजना महानगर में प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।

JagranWed, 21 Apr 2021 07:15 AM (IST)

अशवनी पाहवा, लुधियाना : शहर में लगातार बढ़ रही लूट व छीनाझपटी की वारदातों पर नकेल कसने के लिए चलाई गई योजना महानगर में प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। पुलिस ने लोगों के घरों और निजी संस्थानों पर लगाए गए कैमरों को अपने सर्वर के साथ जोड़ा था ताकि वारदात के बाद अपराधियों को पकड़ने में आसानी हो सके। हालांकि इसका कोई खास फायदा होता नहीं दिखा। विभाग के सूत्रों के मुताबिक लोग अपने कैमरों का एक्सेस पासवर्ड पुलिस से सांझा करने में हिचकिचा रहे हैं। इससे पुलिस को उनके डीवीआर में रिकार्ड हुआ वीडियो डाटा नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि पुलिस की 'तीसरी आंख' को मोतियाबिंद हो रहा है। पुलिस के आला अधिकारी चाहते है कि शहरवासी इन कैमरों का लाइव एक्सेस पासवर्ड उनके साथ साझा करे, ताकि वह शहर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली वारदात को सुलझा सकें।

करीब चार साल पहले पुलिस ने सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में अलग-अलग जगहों पर एचडी कैमरे लगवाए थे, जिनका सर्वर पुलिस लाइन में लगाया गया है। शहर में होने वाली वारदात के बाद पुलिस इन सीसीटीवी कैमरों की सहायता से आरोपितों की पहचान करती है। इन कैमरों की सहायता से पुलिस को अब तक 70-80 फीसद वारदातें सुलझाने में सफलता हासिल हुई है।

कुछ समय पहले ही सर्वर से जोडे गए थे प्राइवेट कैमरे

पुलिस ने शहर के प्रमुख मार्गों पर तो कैमरे लगवा दिए थे, लेकिन शहर के भीतरी इलाको में होने वाली वारदातें हल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। इसे देखते हुए फैसला लिया गया कि शहरवासियों के निजी संस्थानों पर लगे कैमरों को सरकारी सर्वर के साथ जोड दिया जाए। इसकी शुरुआत सबसे पहले एडीसीपी-1 के इलाके में की गई थी। यहां पुराने शहर के एरिया में लगे कैमरों को सर्वर से जोड़ा गया था। हालांकि पुलिस इन कैमरों की स्ट्रीमिंग लाइव नहीं देख पा रही। ऐसे में अब लोगों से कैमरों का एक्सेस पासवर्ड मांगा जा रहा है।

अगर लोग सहयोग करें तो शहर होगा अपराध मुक्त

एडीसीपी-1 डा. प्रज्ञा जैन ने कहा कि हम शहर को अपराध मुक्त करने के लिए हर तरह से मेहनत कर रहे हैं। इसके लिए हमने कई टीमें बनाई हैं। सेफ सिटी प्रोजेक्ट से शहर के अलग-अलग इलाको में लगे निजी कैमरों को सरकारी सर्वर से जोड़ा गया था। शहरवासियों से अपील की जा रही है कि सभी अपने-अपने संस्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के पासवर्ड पुलिस के साथ शेयर करे ताकि शहर को जल्द से जल्द अपराध मुक्त बनाया जा सके।

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