पंजाब के राजविंदर ने अमेरिकी डालर ठुकरा अपनी मिट्टी में उगाया सोना, आर्गेनिक फार्मिंग से हुए मालामाल

मोगा के गांव लोहारा में राजविंदर सिंह धालीवाल के फार्म में तैयार किया जा रहा गुड़। जागरण

ये हैं पंजाब के मोगा के राजविंदर सिंह। सात साल अमेरिका रहे खूब डालर कमाए लेकिन सुकून यहीं अपनी मिट्टी में आकर मिला। फिर घर पर ही आर्गेनिंग फार्मिंग करने की ठानी। आज वह इसी मिट्टी से मालामाल हो गए।

Kamlesh BhattMon, 10 May 2021 09:03 AM (IST)

मोगा [सत्येन ओझा]। विदेश जाने की चाहत में पंजाब के सैकड़ों युवा हर साल कबूतरबाजों के हाथों लाखों रुपये लुटा देते हैं। इसके लिए अवैध तरीके अपनाने से भी नहीं हिचकते। पकड़े जाने पर बहुत बार जेल की हवा भी खानी पड़ती है, तो कई बार जान तक से हाथ धोना पड़ता है। इस अंधी दौड़ के बीच ऐसे उदाहरण भी हैं, जिन्होंने डालर और चकाचौंध भरी जिंदगी को ठुकरा कर अपनी मिट्टी में सोना उगाया और कामयाबी की इबारत लिखी।

मोगा शहर के राजविंदर सिंह धालीवाल भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं। राजविंदर पहले अमेरिेका में एक बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रक चलाते थे, लेकिन वे हमेशा से ही खुद का काम करना चाहते थे, इसलिए छह साल पहले नौकरी छोड़ कर अपने गांव लोहारा लौट आए। अपनी 22 एकड़ जमीन में से सात एकड़ में फार्म बनाकर आर्गेनिक तरीके से खेती शुरू की।

मोगा के गांव लोहारा में बने आर्गेनिक लोहारा फार्म में काम करते हुए राजविंदर सिंह धालीवाल। जागरण

वे चार साल से फल, सब्जियां और अनाज उगा रहे हैं। मार्केटिंग भी खुद ही करते हैं। राजविंदर गन्ना भी उगाते हैं और उससे गुड़ व शक्कर भी बनाते हैं। इसके लिए फार्म में ही प्लांट भी लगाया है। इसके अलावा आड़ू, किन्नू, नींंबू, गुलाब, बेर व अंगूर की पैदावार भी करते हैं। राजविंदर बताते हैं कि वे हर दिन खेत में 10 से 12 घंटे काम करते हैं। धान की खेती नहीं करते, क्योंकि इससे भूमिगत जल स्तर नीचे जा रहा है।

मोगा के गांव लोहारा में राजविंदर सिंह धालीवाल के फार्म में गुड़ बनाने वाला प्लांट। जागरण

नहीं भाया पिज्जा कारोबार

शहर के जमींदार परिवार से संबंध रखने वाले राजविंदर सिंह धालीवाल ने ग्रेजुएशन के बाद टैक्सेशन एडवोकेट वरिंदर अरोड़ा के ऑफिस में नौकरी की। काम पसंद नहीं आया तो साल 2000 में क्राउन पिज्जा के नाम से अपना ब्रांड शुरू किया। शहर में तीन ब्रांच खोलीं। बाद में पंजाब के कई शहरों में फ्रेंचाइजी शुरू की। व्यवसाय खूब चल पड़ा, लेकिन जिंदगी मशीन बन गई। उन्हें कारोबारी व्यस्तता अच्छी नहीं लगी।

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पीक पर पहुंचे कारोबार को छोड़कर परिवार की सलाह पर वह अमेरिका चले गए। वहां एक ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रक चलाने का काम शुरू किया। राजविंदर बताते हैं कि वहां पैसा तो खूब कमाया, लेकिन उन्होंने वहां पंजाबियत और संस्कारों को मरते देखा। इससे मन विचलित हो गया। छह साल अमेरिका में रहे और फिर घर लौटने का फैसला किया। यहां 22 एकड़ पैतृक जमीन ठेके पर थी। उन्होंने सात एकड़ में फार्म तैयार कर जैविक खेती शुरू की।

मंडी में नहीं मिले दाम तो फार्म से शुरू की सीधी बिक्री

राजविंदर बताते हैं कि आम मंडियों में उन्हें आर्गेनिक उत्पादों के सही दाम नहीं मिल पाते थे, इसलिए खुद मार्केटिंग का फैसला किया। फार्म की ब्रांडिंग की। अब लोग सीधे फार्म में पहुंच कर सामान खरीदते हैं। यहां उन्हें दाम भी ठीक मिलता है। वे अपना खर्च आदि निकाल कर साल में एक लाख रुपये तक आसानी से कमा लेते हैं। कुछ साल पहले उन्होंने गुलाबों की खेती शुरू की और अब गुलकंद बनाते हैं। यह काफी लोकप्रिय हो रहा है। फार्म में ही उन्होंने एक कच्चा घर बनाया है, जिसमें उन्होंने पंजाबी विरासत को बखूबी पेश किया है।

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