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पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर एनवायरमेंट इंजीनियर संदीप बहल का दावा लंदन और टोरंटो की तरह साफ लुधियाना की आबोहवा

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर एनवायरमेंट इंजीनियर संदीप बहल।

लुधियाना शहर सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार होने का एक ही मुख्य कारण है वो है यहां की इंडस्ट्री। लेकिन शहर की आबोहवा भी लंदन और टोरंटो की तरह साफ हो सकती है। यह दावा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर एनवायरमेंट इंजीनियर संदीप बहल ने किया है।

Ankesh KumarWed, 14 Apr 2021 09:43 AM (IST)

लुधियाना, [राजीव शर्मा]। एक समय देश के प्रदूषित शहरों में शुमार लुधियाना की आबोहवा अब बदलने लगी है। विकास के साथ प्रदूषण नियंत्रण पर भी युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। उद्योगों से निकलने वाले पानी को ट्रीट करने के लिए सीईटीपी, सीवरेज के पानी के लिए एसटीपी लगाए जा रहे हैं। बुड्ढा दरिया के कायाकल्प के लिए 650 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। कोरोना महामारी के कारण पिछले साल लाकडाउन में लुधियानवियों को प्रदूषण रहित वातावरण मिला था।

ब शहर में सभी सरकारी विभाग, आम लोग और एनजीओ मिलकर काम कर रहे हैं। यह रफ्तार इसी तरह बनी रही तो डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पूरे होने के पांच साल बाद लुधियाना की आबोहवा लंदन और टोरंटो की तरह साफ होगी। यह दावा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर एनवायरमेंट इंजीनियर संदीप बहल ने दैनिक जागरण के साथ विशेष बातचीत में किया। सहयोग से प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फंड की कोई कमी नहीं है।

लाकडाउन में 28 पहुंच गया था एक्यूआइ

पिछले साल लाकडाउन के दौरान शहर की हवा में बहुत सुधार हुआ। लोगों ने इसका अहसास भी किया और इसके फायदे भी दिखने लगे। छह अप्रैल 2020 को देश में सबसे शुद्ध हवा वाला शहर लुधियाना था। यहां का एक्यूआइ महज 28 था।  

जिला पर्यावरण कमेटी कर रही मानिटर

पर्यावरण सुधार के लिए डीसी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पर्यावरण कमेटी बनी है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत शहर को 26 करोड़ रुपये मिले हैं। सोलिड वेस्ट की ट्रीटमेंट के लिए भी 26 करोड़ की ग्रांट आई है। शहर के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए फंड की कमी नहीं है। इस काम कर रहे हैं और हर महीने मानिटङ्क्षरग की जा रही है।

अब इंडस्ट्री भी हुई सजग

संदीप बहल का कहना है कि पहले बुड्ढा दरिया में प्रदूषण के लिए इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराया जाता था। अब इंडस्ट्री में ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। कामन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जा रहे हैं। बहादुरके स्थित ट्रीटमेंट प्लांट 15 एमएलडी का शुरू हो गया है। डाइंग इंडस्ट्री का पानी ट्रीट हो रहा है। ताजपुर रोड में 50 एमएलडी व फोकल प्वाइंट में 40 एमएलडी के सीईटीपी भी अंतिम चरण में हैं। सीईटीपी का ट्रीटेड पानी ङ्क्षसचाई में इस्तेमाल किया जाएगा। बुड्ढा दरिया में मई से 200 क्यूसेक साफ पानी छोडऩा शुरू किया जा रहा है। इससे दरिया के पानी में बीओडी की मात्रा कम हो जाएगी और पानी साफ भी दिखने लगेगा।

एनजीटी की सख्ती से आई गंभीरता

पिछले कुछ साल से एनजीटी ने प्रदूषण को लेकर सख्ती की है। इसके बाद कई विभाग गंभीर हुए हैं। लोगों में भी प्रदूषण को लेकर जागरूकता आ रही है। पहले डेयरियों से हो रहे प्रदूषण का मुद्दा नहीं उठाया गया। अब डेयरियों की भी लगातार निगरानी की जा रही है। इस पर 42 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे दो ट्रीटमेंट प्लांट एवं दो बायो गैस प्लांट लगाए जा रहे हैं।

एयर क्वालिटी की हो रही मानिटरिंग

शहर के सभी उद्योगों में एयर क्वालिटी मानिटरिंग सिस्टम लगे हैं। सभी इकाइयां मानकों के तहत ही धुआं छोड़ रही हैं। इसकी लगातार जांच भी की जा रही है। कुछ अब भी दिक्कत है उसे सभी के सहयोग से दूर करेंगे।

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