Punjab Ministers Portfolios: कोटली के उद्योग मंत्री बनने से लुधियाना, खन्ना और मंडी गोबिंदगढ़ की इंडस्ट्री की उम्मीदें बढ़ीं

Punjab Ministers Portfolios खन्ना कोटली की अपनी विधाननसभा सीट है। यहां एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी है। इसके चलते कृषि आधारित एक मेगा प्रोजेक्ट या फिर इंडस्ट्रियल हब खन्ना के लिए वरदान साबित हो सकता है।

Vipin KumarTue, 28 Sep 2021 01:39 PM (IST)
खन्ना में एग्रीकल्चर आधारित इंडस्ट्री के मेगा प्रोजेक्ट की है दरकार। (फाइल फाेटाे)

खन्ना, (लुधियाना) सचिन आनंद। Punjab Ministers Portfolios: खन्ना से दूसरी बार विधानसभा में पहुंचे गुरकीरत सिंह कोटली को चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में उद्योग मंत्री की जिम्मेवारी सौंपी गई है। कोटली पहली बार मंत्री बने हैं और किसान आंदोलन और कोराना काल के बीच बंद और लाकडाऊन के दौर से गुजरी पंजाब की इंडस्ट्री को उनसे बहुत उम्मीदे हैं। विशेषकर लुधियाना, खन्ना और मंडी गोबिंदगढ़ की इंडस्ट्री को कोटली से खास आस है। सालों से एक अदद एग्रीकल्चर बेस्ड मेगा प्रोजेक्ट की दरकार खन्ना को रही है। लेकिन, इस पर किसी सरकार ने अब तक गौर नहीं किया है।

महंगी बिजली से लेकर कईं और कारणों के चलते पिछले कुछ सालों से पंजाब की इंडस्ट्री पर संकट के बादल छाए रहे हैं। इस बीच लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ की लोहा व साईकिल उद्योग के पंजाब से पलायन के साथ अन्य राज्यों में बड़ी इंडस्ट्री लगाने की बातें भी सामने आई। ऐसे में कोटली के लिए इस इंडस्ट्री को संभालना एक चुनौती रहेगी। लोहा उद्योग को काम करने के लिए अच्छा माहौल व समस्याओं के हल के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मांग हमेशा से होती रही है।

सबसे बड़ी उम्मीद खन्ना को

खन्ना कोटली की अपनी विधाननसभा सीट है। यहां एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी है। इसके चलते कृषि आधारित एक मेगा प्रोजेक्ट या फिर इंडस्ट्रियल हब खन्ना के लिए वरदान साबित हो सकता है। हालांकि, चुनाव से पहले कोटली के पास किसी बड़े प्र्रोजक्ट को पूरा करना संभव नहीं है, लेकिन इसकी शुरूआत भी खन्ना के लिए अहम होगी। खन्नी की कैटल फीड इंडस्ट्री को भी नई राहतों का इंतजार रहेगा।

पहले फाईलों में खो चुका है इंडस्ट्रियल हब

खन्ना-मालेरकोटला रोड पर गांव नसराली में करीब 100 एकड़ शामलात जमीन पर कैप्टन सरकार ने अपने पहले ही बजट में एक बड़े इंडस्ट्रियल हब का प्रावधान रखा था। लेकिन, जमीन को लेकर अदालत में चल रहे केस और कुछ अन्य कारणों के चलते यह प्रोजेक्ट सरकारी फाइलों में ही कहीं खो गया। उसी बजट में खन्ना फोकल प्वाइंट के लिए रखे गए रुपये भी नहीं पहुंचे। कुल मिलाकर खन्ना की इंडस्ट्री से सौतेला व्यवहार होता रहा है। बाद में फोकल प्वाइंट के उद्यमियों को केंद्र सरकार की एसपीवी योजना के तहत फोकल प्वाईंट का विकास कराना पड़ा था।

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