आखिर ‘गुरु’ को आना ही था, लुधियाना में कांग्रेस विधायकों से घर जाकर मिले नवजोत सिद्धू

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद सिद्धू की नजरें अगली बड़ी कुर्सी पर रहेंगी। यही कारण है कि उन्होंने लुधियाना के विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। अध्यक्ष बनने के दूसरे दिन ही वह अचानक लुधियाना पहुंचे और प्रत्येक विधायक के घर जाकर उनसे मुलाकात की।

Pankaj DwivediTue, 27 Jul 2021 11:31 AM (IST)
लुधियाना में विधायक राकेश पांडे के निवास पर नवजोत सिद्धू। साथ हैं मंत्री भारत भूषण आशु व अन्य। फाइल फोटो

भूपेंदर सिंह भाटिया, लुधियाना। आखिर उन्हें आना ही था, जरा देर से ही सही। ये बात पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पर पूरी तरह फिट बैठते हैं। दरअसल, पंजाब की आर्थिक राजधानी के तौर पर जाने जाते लुधियाना के शहरी इलाके की सात में से पांच विधानसभा सीटें कांग्रेस के नाम हैं। इसके बावजूद बीते दिनों अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चली उठापटक के दौरान सिद्धू इस शहर के विधायकों से कटे रहे। वे कभी उनसे मिलने नहीं पहुंचे। विधायकों ने भी सिद्धू के पक्ष या विरोध में कुछ नहीं कहा। सभी यही कहते नजर आए कि हाईकमान जो फैसला लेगी, वो मंजूर होगा। अब अध्यक्ष बनने के बाद सिद्धू की नजरें अगली बड़ी कुर्सी पर रहेंगी। यही कारण है कि उन्होंने लुधियाना के विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। अध्यक्ष बनने के दूसरे दिन ही वह अचानक लुधियाना पहुंचे और प्रत्येक विधायक के घर जाकर उनसे शिष्टाचार मुलाकात की।

सिद्धू के दर्शन को तरसे

हमेशा से ही परंपरा रही है कि प्रदेश का नवनियुक्त प्रधान जब अपने पहले दौरे पर लुधियाना आता है तो वह सीधा जिला कांग्रेस कार्यालय में पहुंचता है। इस दौरान नए प्रधान के स्वागत में बड़े स्तर पर तैयारियां की जाती हैं और उन्हें साथ लेकर शहर में रैली निकाली जाती है। साथी है प्रधान के ओर से कार्यकर्ताओं के लिए भारी-भरकम भाषण भी दिया जाता है। हालांकि इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ता सिद्धू के दीदार को तरस कर रह गए हैं। प्रदेश प्रधान बनने के अगले ही दिन लुधियाना तो पहुंचे, लेकिन जिला कांग्रेस कार्यालय की ओर मुख तक नहीं किया। जिला कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि हमारे प्रधान कब आए और कब चले गए, इसकी उन्हें सूचना तक नहीं मिली। पहली बार वह डीएमसी अस्पताल में घायल को मिलने पहुंचे, वह ठीक था, लेकिन अगले दिन वह सिर्फ विधायकों से मिले और चल दिए।

वैक्सीन चाहिए पर नियम नहीं

कोरोना संक्रमण के बाद जब वैक्सीन ईजाद हुई तो प्रशासन ने लोगों पर बहुत जोर अजमाया कि वैक्सीनेशन करवा लें, लेकिन लोग वैक्सीन लगवाने को तैयार नहीं थे। उस वक्त वैक्सीनेशन सेंटर खाली रहे। स्टाफ लोगों का इंतजार करता रहता था। अब जब वैक्सीनेशन आ नहीं रही तो लोग सेंटरों पर टूट पड़ रहे हैं। लुधियाना में अभी भी आधी आबादी की ही वैक्सीनेशन हो पाई है। लोग वैकसीन तो चाहते हैं, लेकिन कोविड नियमों का पालन नहीं करना चाहते। बाजारों में लोग खुले आम बिना मास्क और कोविड नियमों के घूम रहे हैं। खाने-पीने की रेहड़ियों पर भी लोगों की भीड़ उमड़ रही है। यानी उन्हें कोविड सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं करना है। एक कोविड सेंटर में तैनात स्टाफ का कहना था, ‘वैक्सीन के लिए आने वाले कई वैक्सीनेशन के दौरान मास्क पहनते हैं, लेकिन उसके बाद फिर बाहर निकल मास्क खोल देते हैं।’

गहनें घर पर ही रखकर आएं

लुधियाना में आजकल एक क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। वह है स्नैचिंग। शहर के थानों की बात करें तो रोजाना स्नैचिंग की तीन-चार शिकायतें पहुंच रही है। ज्यादातर मामलों में स्नैचर पकड़े नहीं जाते और यदि कोई पकड़ा भी जाता है तो वह नशेड़ी निकलता है, जिन्हें पुलिसवाले भी अक्सर छोड़ दिया करते हैं। इन झपटमारों का साफ्ट टारगेट महिलाएं होती हैं। जानकार कहते हैं कि एक समय लुधियाना शहर में यदि किसी महिला की स्नैचिंग होती थी तो बहुत बड़ी घटना मानी जाती थी, लेकिन अब तो ये आम ही हो गया है। एक तो नशा और दूसरा कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी के कारण कई लोग झपटमारी करने लगे हैं। बड़ी बात है कि हाईवे या बाजारों में ही नहीं ये वारदातें काई पाश कालोनियों में भी होने लगी हैं। अब तो कई महिलाएं आपस में ये भी चर्चा करने लगी हैं कि बाजार जाना है तो गहने घर ही निकाल जाएं।

 

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