लुधियाना में दवा व किट के लिए सिविल अस्पताल में भटकते रहे संक्रमित मरीज, डीसी को फोन पर दी शिकायत तो घर पहुंची टीम

लुधियाना में कोरोना बेकाबू हो चुका है।

लुधियाना में लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद विभाग की ओर से न तो उन्हें गाइड किया जा रहा है और न ही सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही मुफ्त स्वास्थ्य किट समय पर दी रही है। जानकारी के अभाव में संक्रमित अस्पताल में भटक रहे हैं।

Vinay KumarThu, 15 Apr 2021 08:30 AM (IST)

लुधियाना, जेएनएन। लुधियाना में कोरोना बेकाबू हो चुका है। सरकार और जिला प्रशासन कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहा है। हालांकि वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमितों को लेकर कहीं-कहीं लापरवाही भी दिखाई जा रही है। लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद विभाग की ओर से न तो उन्हें गाइड किया जा रहा है और न ही पंजाब सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही मुफ्त स्वास्थ्य किट समय पर दी रही है। लिहाजा, जानकारी के अभाव में संक्रमित सरकारी अस्पताल में भटक रहे हैं। बुधवार को न्यू जनता नगर के रहने वाले तीन कोरोना संक्रमित सुबह 11 बजे सिविल अस्पताल में पहुंचे। इनमें दो महिलाएं व एक किशोर था। तीनों ने बताया कि नौ अप्रैल तक वह अपने घर के संक्रमित बुजुर्ग को खाना और जरूरत का दूसरा सामान देने के लिए आइसोलेशन सेंटर में आते-जाते थे।

10 अप्रैल को उनके सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट पाजिटिव मिली। मंगलवार सुबह सेहत विभाग के मैसेज से उन्हें इसकी जानकारी मिली। मंगलवार से लेकर बुधवार सुबह दस बजे तक सेहत विभाग की तरफ से उन्हें कोई फोन नहीं आया कि अब उन्हें क्या करना है और न ही सेफ्टी किट दी गई। खैर, वे वह खुद ही सिविल अस्पताल में बुखार, खांसी व दर्द की दवा और किट लेने पहुंच गए। यहां पहुंचे तो करीब दो घंटे तक पाजिटिव होने की पर्ची लेकर वह यहां-वहां भटकते रहते। जिस भी स्टाफ को बताया कि वे पाजिटिव हैं, वह डर के पीछे हट गया और उन्हें आगे से आगे अलग-अलग जगह पर भेजते रहे।

करीब दो बजे उन्हें अस्पताल के एक डाक्टर ने बताया कि सिविल अस्पताल की ओपीडी ईएसआइ में शिफ्ट कर दी गई है। इलाज के लिए वहां जाना होगा। जब किट के बारे में पूछा तो बताया कि उनके पास से किट नहीं मिलती, बाहर से खरीदनी होगी। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने डीसी से फोन पर संपर्क कर सारी बात बताई तो उन्हें घर जाने को कहा गया। इसके बाद शाम करीब छह बजे सेहत विभाग की एक टीम घर आई और हमें किट देकर गई। साथ ही ये भी बताया कि संक्रमित होने के बाद क्या करना है और क्या नहीं।

जैसे ही मामला ध्यान में आया, तुरंत टीमें भेंजीं: सिविल सर्जन
इस मामले में जब सिविल सर्जन डा. सुखजीवन कक्कड़ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि किसी कम्युनिकेशन गैप के कारण विभाग की टीम उनसे संपर्क नहीं कर पाई। जैसे ही मामला उनके ध्यान में आया, उन्होंने तुरंत विभाग की टीम मरीजों के घर पहुंचा। मरीजों को आइसोलेट कर उनके फोन में कोवा एप इंस्टाल किया गया। इसके अलावा उन्हें सभी तरह की एहतियात बरतने को कहा गया। कोविड सेफ्टी किट भी दी गई।

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