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कमजोर मांग से रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा कागज उद्योग, क्षमता का पूरा उपयोग करने में दिक्‍कत

लुधियाना, [राजीव शर्मा]। कोरोना महामारी से निपटने के लिए पंजाब में करीब दो माह कर्फ्यू और लॉकडाउन के कारण जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा, वहीं उद्योग व्यापार भी पटरी से उतर गए। अब फिर से औद्योगिक इकाइयां चलना शुरू हुई हैं, लेकिन उनके समक्ष काफी दिक्कतें आ रही हैं। पंजाब की पेपर इंडस्ट्री में भी कामकाज शुरू हो गया है, लेकिन शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण कापी, किताब, स्टेशनरी आदि के बाजारों में मांग नहीं निकल पा रही है।

पेपर मिलों में 30-40 फीसद ही उत्पादन, लेकिन मांग इतनी भी नहीं

पेपर मिलें भी अपनी क्षमता का केवल 30 से 40 फीसद ही उत्पादन कर रही हैं। बाजार में मांग इतनी भी नहीं है, ऐसे में तैयार कागज का ज्यादातर स्टॉक मिलों में ही हो रहा है। उद्यमियों का तर्क है कि ज्यादातर माल को स्टॉक करना भी संभव नहीं हैं। ऐसे में सरकार को नए मानकों के साथ शिक्षण संस्थान खोलने पर मंथन करना चाहिए।

सूबे में करीब तीस पेपर मिलें हैं।

पेपर मिलों में तैयार कागज हो रहा स्टॉक, बढ़ रही परेशानी

इनमें पैकेजिंग एवं प्रिंटिंग के लिए कागज तैयार किया जा रहा है। अब औद्योगिक इकाइयों के दफ्तर आदि खुल गए हैं। ऐसे में पैकिंग के लिए कागज की कुछ मांग निकलने लगी है। मगर, अभी प्रिंटिंग के कागज की मांग नहीं है, क्योंकि इस तरह के कागज की ज्यादा लागत एजुकेशन सेक्टर में है। यह सेक्टर अभी वीरान पड़ा है।

कोरोना के चलते विश्व के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। पेपर मिलों में रद्दी की कुल मांग की 50 फीसद आपूर्ति विदेश से आयात के जरिये पूरी की जाती है। ज्यादातर आयात अमेरिका और यूरोप से किया जाता है, लेकिन वहां से भी माल की आपूर्ति खुल कर नहीं हो पा रही है। फिलहाल, पहले से रास्ते में रूका हुआ माल ही पहुंच रहा है।

इसके अलावा घरेलू बाजार से भी रद्दी की आवक कम हो गई है। इंडस्ट्री को मांग के मुकाबले आधी रद्दी भी नहीं मिल पा रही है। क्योंकि अभी मिलों में उत्पादन कम है, इसलिए अभी काम 30-40 फीसद ही चल रहा है। जब उत्पादन पूरी क्षमता से शुरू होगा, तब रद्दी की किल्लत पेपर के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

सप्लाई चेन खुलकर काम नहीं कर रही : अनिल कुमार

इंडियन एग्रो एंड रि-साइकिल पेपर मिल्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल कुमार का कहना है कि अभी मार्केट पूरी तरह से नहीं खुली है, सप्लाई चैन खुल कर काम नहीं कर पा रही है और कागज की मांग काफी कम है। ङ्क्षप्रङ्क्षटग कागज का 70 फीसद से अधिक केवल शिक्षा क्षेत्र में ही प्रयोग होता है। इस क्षेत्र में अभी मांग नहीं है। मांग में कमी इस वक्त मिलों की सबसे बड़ी समस्या है। अभी शिक्षण संस्थान खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति है।

अभी पटरी पर आने में लगेगा लंबा समय : आरके भंडारी

सेतिया पेपर मिल्स के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर आरके भंडारी ने कहा कि पेपर इंडस्ट्री को पटरी पर लाने के लिए लंबा वक्त लग सकता है। यह भी साफ है कि जब तक शिक्षण संस्थान नहीं खुलते, पेपर की मांग में तेजी आना संभव नहीं है।

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