Clean Air Action plan: लुधियाना के क्लीन एयर एक्शन प्लान में पारदर्शिता लाने की तैयारी, अधिकारियाें ने की वर्चुअल चर्चा

Clean Air Action plan पैनल डिस्कशन के दौरान कोविड-19 के बाद क्लीन एयर एक्शन प्लान को लागू करने के रास्ते में पैदा हुई चुनौतियां पर विस्तार से बातचीत की गई और इसके साथ ही एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए चर्चा की गई।

Vipin KumarThu, 29 Jul 2021 10:47 AM (IST)
शहर के लोगाें काे स्वच्छ और स्वस्थ हवा मिलेगी। (सांकेतिक तस्वीर)

जागरण संवाददाता, लुधियाना। Clean Air Action plan: शहर के लोगाें काे स्वच्छ और स्वस्थ हवा मिलने काे लेकर अधिकारियों ने एयर क्वालिटी विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऑनलाइन वर्चुअल चर्चा की। लुधियाना काे पंजाब के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक माना जाता है। इसकाे अब सबसे साफ पर्यावरण वाले शहरों में से एक बनाया जाएगा। पैनल डिस्कशन के दौरान कोविड-19 के बाद क्लीन एयर एक्शन प्लान को लागू करने के रास्ते में पैदा हुई चुनौतियां पर विस्तार से बातचीत की गई और इसके साथ ही एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी हितधारकों की भूमिका पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

वर्चुअल डिस्कशन को इकोसिख और क्लीन एयर पंजाबन-ए सिटीजंस इनीशिएव के सहयोग से आयोजित किया गया। इस दौरान पैनल में निगम की ज्वाइंट कमिश्नर स्वाति टिवाना, पीपीसीबी के चीफ इंजीनियर गुलशन राय, काहन सिंह पन्नू, सीईईडब्लयू की तनुश्री गांगुली एवं वेब सॉफ्ट के जसकीरत सिंह शामिल हुए।

लुधियाना के 100 से अधिक संबंधित नागरिकों ने इसमें भाग लिया। लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पिछले साल 26 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान प्राप्त हुआ है। लुधियाना के नागरिक सत्र में यह समझने के लिए शामिल हुए कि अधिकारी कैसे कार्य योजना को लागू और क्रियान्वित कर रहे हैं। स्वाति टिवाना ने बताया कि लुधियाना नॉन-अटेनमेंट शहरों में से एक था और इसलिए केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग के तहत अनुदान प्राप्त कर रहा है, विशेष रूप से प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए। इसके साथ ही इस ग्रांट से प्रदूषण के स्त्रोतों को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है तो उन्हें न्यूनतम स्तर पर लाया जा रहा है।

तनुश्री गांगुली ने कहा कि लुधियाना पंजाब के नौ नॉन-अटेनमेंट शहरों में से एक होने के बावजूद, इसमें केवल एक रीयल-टाइम और 4 मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशन हैं, जबकि न्यूनतम 11 मॉनिटरों की आवश्यकता है। गांगुली ने कहा कि इन सबके अलावा मौसमी फसल अवशेष जलाने से शहर की वायु गुणवत्ता भी खराब होती है।

काहन सिंह पन्नू ने उल्लेख किया कि ईंट-भट्ठों के अलावा धुआं उगलने वाले कारखानों, विशेष रूप से थर्मल, कागज, सीमेंट और रासायनिक संयंत्रों से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘‘प्रदूषण पर नजर रखने के लिए राज्य में लगभग 100 स्थानों पर वायु गुणवत्ता मापक स्टेशन स्थापित करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही किसी भी नियम का उल्लंघन करने वाले बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

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