मोगा में नवजात बेचे जाने के मामले में बड़ी लापरवाही, मास्टरमाइंड आशा वर्कर पुलिस हिरासत से फरार

मोगा में नवजात बच्ची बेचे जाने के मामले की मास्टरमाइंड मथुरादास सिविल अस्पताल में ड्यूटी दे रही आशावर्कर को थाना साउथ सिटी पुलिस ने वीरवार को हिरासत में ले लिया था। बाद में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से उसे सिविल अस्पताल से भगा दिया गया।

Pankaj DwivediFri, 18 Jun 2021 01:18 PM (IST)
मोगा में नवजात बच्ची बेचे जाने का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। सांकेतिक चित्र।

मोगा, [सत्येन ओझा]। जन्म के साथ ही बच्चों को डेढ़ लाख रुपये में बेच देने जैसे संवेदनशील मामलों में आखिर मोगा पुलिस इतनी असंवेदनशील क्यों है। मामले की मास्टरमाइंड मथुरादास सिविल अस्पताल में ड्यूटी दे रही आशावर्कर को थाना साउथ सिटी पुलिस ने वीरवार को हिरासत में ले लिया था। बाद में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से उसे सिविल अस्पताल से भगा दिया गया। बाल भलाई काउंसिल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिखित संस्तुति एसएसपी हरमनवीर सिंह से की तो शुक्रवार को सब इंस्पेक्टर जसवीर कौर ने यू-टर्न ले लिया। जसवीर कौर का कहना है कि आशा वर्कर फरार नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि फरार नहीं है तो वह आखिर है कहां? इस पर बोलीं कि अभी इन्वेस्टीगेशन चल रही है। इस बीच वीरवार दोपहर बाद से बच्ची को जन्म देने वाले असल मां-बाप भी भूमिगत हो गए हैं।

आशा वर्कर के बाद बच्ची के मां-बाप भी भूमिगत

गौरतलब है कि गीता भवन के सामने कश्मीरी पार्क के गेट के निकट ही हेयरकटिंग करने वाले राकेश कुमार की पत्नी नीतू ने बग्गेयाना बस्ती में एक ट्रेंड दाई ने अपने घर में डिलीवरी कराई थी। नीतू ने बच्ची को जन्म दिया था, दो बच्चियां उसके पहले भी हैं। नीतू की एक सहेली ने मथुरादास सिविल अस्पताल में ड्यूटी दे रही एक आशावर्कर से मुलाकात कराई थी। बाद में आशावर्कर ने नीतू व दाई का संपर्क मुक्तसर की महिला से संपर्क करा दिया था। बच्ची का सौदा डेढ़ लाख में हुआ था। सौदा तय होने के बाद आशा वर्कर ने नवजात बालिका मुक्तसर की महिला के हाथों सौंप दी थी।

बाल भलाई काउंसिल के संज्ञान में मामला आने के बाद काउंसिल ने तत्परता दिखाते हुए थाना साउथ सिटी पुलिस को जन्मदेने वाले पेरेंट्स, खरीददार महिला व आशावर्कर को उनके समक्ष तलब करने के निर्देश दिए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार नवजात शिशु को बेचने के बाद भूमिगत हुई आशा वर्कर वीरवार को वापस लौटी थी, वीरवार को ही थाना साउथ सिटी पुलिस की सब इंस्पेक्टर जसवीर कौर ने उसे सिविल अस्पताल में हिरासत में ले लिया था। इसकी सूचना भी सब इंस्पेक्टर ने काउंसिल की अध्यक्ष डा.वरिंदर कौर को दे दी थी, कुछ देर बाद फोन करके सूचित कर दिया कि आशा वर्कर फरार हो गई। इसके कुछ देर बाद वीरवार दोपहर से बच्ची के असल मां-बाप भी भूमिगत हो गए। वीरवार सुबह उन्होंने दुकान लगाई थी, लेकिन दोपहर बाद अचानक गायब हो गए।

इस बीच पता चला है कि बच्ची को खरीदने वाली मुक्तसर की महिला वीरवार को बच्ची के असल मां-बाप, आशा वर्कर से भी मोगा आकर मिलकर गई है, लेकिन पुलिस व बाल भलाई काउंसिल अभी तक इस मामले में कुछ भी पता लगाने में नाकाम रहे हैं।

खुशप्रीत हत्याकांड का भी पर्दाफाश करने में पुलिस असफल

नवजात बच्ची बेचे जाने का मामला सामने आने के चार दिन बाद भी पुलिस, बाल भलाई काउंसिल व जिला प्रशासन उसका पता लगाने में असफल रही है कि आखिर वह है कहां? ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर बच्चियों की सुरक्षा के मामले में कोई पुलिस व जिला प्रशासन पर कैसे भरोसा करे। नवजात बच्ची को बेचे जाने के चार दिन पहले ही शहर के लुधियाना रोड स्थित गुरुकुल स्कूल में फिजिकल एजूकेशन अध्यापक व स्कूल की प्रिंसिपल हरप्रीत कौर की बेटी की कथित ब्लेकमेलिंग से दुखी होकर 11वीं की छात्रा खुशप्रीत कौर ने सुसाइड कर लिया था। सुसाइड से पहले अपने मोबाइल फोन में ब्लैकमेलिंग के तमाम राज खुशप्रीत कौर ने अपने मोबाइल में छोड़ दिए थे। थाना मैहना पुलिस घटना के दस दिन बाद ही मोबाइल के राज छुपाकर बैठी है। अभी तक किसी भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। पुलिस मोबाइल में छिपे राज बताने को भी तैयार नहीं है।

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