धर्म व संस्कारों की गुणी जैन महासाध्वी सुधा

महासाध्वी का जन्म एक अगस्त 1943 ई को सुश्रावक त्रिलोकचंद जैन एवं सुश्राविका कौशल्या देवी के अमृतसर के पास पट्टी स्थित घर में हुआ। बालिका का गुण संपन्न नाम रखा गया-संतोष। धर्म के संस्कार से ओत-प्रोत थी। माता जी के जीवन से बचपन से ही आप धर्म की ओर आकृष्ट थी। हमें कोई ऐसा दिन याद नहीं जिस दिन उन्होंने रात को खाना खाया हो।

JagranSun, 01 Aug 2021 07:19 AM (IST)
धर्म व संस्कारों की गुणी जैन महासाध्वी सुधा

लुधियाना : प्राय: लोग संतों की उपमा कल्पवृक्ष से करते हैं, परंतु मेरी दृष्टि में महान संत कल्प वृक्ष से भी अधिक महान होते है, क्योंकि कल्पवृक्ष आज नहीं रहे, संत आज भी विद्यमान है। कल्पवृक्ष केवल भौतिक संप्रदाएं प्राप्त करता है, कितु संत भौतिक सम्प्रदाओं से उपराम लेकर आध्यात्मिक सम्पदाओं से जनमानस को निहाल करते रहते हैं। हमारी आराध्य, मेरी जीवन निर्मात्री, शासन ज्योति, उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी, महाश्रमणी गुरुणी श्री सुधा महाराज भी कल्पवृक्ष से अधिक गौरव को प्राप्त करने वाली महानसाध्वी है।

महासाध्वी का जन्म एक अगस्त 1943 ई को सुश्रावक त्रिलोकचंद जैन एवं सुश्राविका कौशल्या देवी के अमृतसर के पास पट्टी स्थित घर में हुआ। बालिका का गुण संपन्न नाम रखा गया-संतोष। धर्म के संस्कार से ओत-प्रोत थी। माता जी के जीवन से बचपन से ही आप धर्म की ओर आकृष्ट थी। हमें कोई ऐसा दिन याद नहीं, जिस दिन उन्होंने रात को खाना खाया हो। धर्म से लगाव तो था, पर साध्वी बनने का विचार नहीं था। लुधियाना में विराजित श्रमण संघ के प्रथम पट्टधर आचार्य सम्राट श्री आत्माराम का आत्म स्थल वैराग्य का निमित्त बना। आचार्य भगवन को कैंसर की बीमारी थी। डाक्टर ने जवाब दे दिया था। डाक्टर खुद कहते थे कि गुरु महाराज को इतनी भयंकर वेदना है। जैसे अग्नि का गोला पानी में डाल दिया जाए। ऐसे समय में गुरुणी महाराज ने भी उनके दर्शन किए और सोचा कि अरे इतनी अपार वेदना में भी इतनी समता, लगता है। इन्होंने शरीर और आत्मा के भेद को जान लिया है। मैंने भी इसे जानना है, बस वैराग्य भावना प्रकट हो गई। पारिवारिक जनों के प्रबल के बावजूद 14 फरवरी 1965 को कैथल में उप-प्रवर्तिनी, संथारा साधिका श्री स्वर्णकांता महाराज का शिष्यत्व स्वीकार किया, जोकि रिश्ते में इनकी मौसी लगती है। शासन ज्योति श्री सुधा महाराज चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा में उतीर्ण करने के साथ-2 आध्यात्मिक स्वाध्याय में भी अभिवृद्धि पाने लगे। आपका जीवन सरलता एवं सहजता का अनुपमेय संगम है।

उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी गुरुणी श्री सुधा म. की वाणी में भटके हुए लोगों को पथ, प्यासे को जल, थके हुए लोगों को उल्लास व भोगियों को सुविधा के पार आनंद के भाव उत्पन्न करने की सक्षमता है। आपके जीवन के कण कण में, म. के अणु-2 में प्राणी मात्र के लिए प्रेम का सागर हिलोरे मारता है। ऐसे गुणों की धारिका मातृ स्वरुपा श्री सुधा महाराज अपने जीवन के 78 बसंत पूर्ण कर रविवार को 79वें बसंत में प्रवेश कर रहे है। शासनेषु से यही मंतव्यमयी मंगल कामना करती हूं कि ऐसी गुरुवर्या का वरदहंस्त सदैव हम सब पर बना रहे और आपके मार्गदर्शन में हम ज्ञान, दर्शन व चारित्र में अभिवृद्धि को प्राप्त हो।

- संघ स्मृति डा. श्री स्मृति महाराज आज मनाई जाएगी महासाध्वी सुधा महाराज की जन्म जयंती

एसएस जैन स्थानक किचलू नगर में उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी श्री सुधा म. की 79वीं जन्म जयंती एक अगस्त दिन रविवार को जप, तप व गुणगान सभा के रुप में प्रात 8.30 से 11.30 बजे तक मनाई जाएगी। इस अवसर पर सामायिक दिवस व लोगस्स के पाठ भी होगा।

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