आत्मा तत्व ज्ञाता और दृष्टा: जितेंद्र मुनि

हिमाचल रत्न श्री जितेंद्र मुनि जी म. सा तप सम्राट श्री सत्येंद्र मुनि जी म. लोकमान्य संत श्री अनुपम मुनि जी महाराज मधुर वक्ता श्री रचित मुनि जी म मधुर भाषी श्री अमृत मुनि जी महाराज विद्याभिलाषी श्री तेजस मुनि जी म. विद्याभिलाषी श्री अतिशय मुनि जी म. जनता नगर स्थानक से विहार कर अग्र नगर जैन स्थानक लुधियाना में विराजमान है।

JagranPublish:Wed, 01 Dec 2021 07:15 PM (IST) Updated:Wed, 01 Dec 2021 07:15 PM (IST)
आत्मा तत्व ज्ञाता और दृष्टा: जितेंद्र मुनि
आत्मा तत्व ज्ञाता और दृष्टा: जितेंद्र मुनि

संस, लुधियाना : हिमाचल रत्न श्री जितेंद्र मुनि जी म. सा, तप सम्राट श्री सत्येंद्र मुनि जी म., लोकमान्य संत श्री अनुपम मुनि जी महाराज, मधुर वक्ता श्री रचित मुनि जी म, मधुर भाषी श्री अमृत मुनि जी महाराज, विद्याभिलाषी श्री तेजस मुनि जी म., विद्याभिलाषी श्री अतिशय मुनि जी म. जनता नगर स्थानक से विहार कर अग्र नगर जैन स्थानक लुधियाना में विराजमान हैं। इस अवसर पर जितेंद्र मुनि महाराज ने कहा अध्यात्म एक ऐसा शब्द बिदु है, जिसमें भाव सिधु समाहित है। इसका प्रधान आधार आत्मा है। आत्मा तत्व ज्ञाता और दृष्टा है। ज्ञाता का शब्दार्थ जानने वाला और दृष्टा का वाचार्थ देने वाला है। आत्मा परमात्मा भी है, चेतन और जीव आत्मा के पर्याय बोधक शब्द है। लोकमान्य संत अनुपम मुनि ने कहा कि चेतना आत्मा का प्रमुख लक्षण है। चेतना उपयोग स्वरूप है, आत्म चेतन है, इसका अभिप्राय यह है कि वह ज्ञान स्वरूप है। आत्मा के जितने भी नाम है उनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण दो नाम है वे ज्ञाता और ²ष्टा है। रचित मुनि महाराज ने कहा कि प्रत्येक आत्मा कर्म का कर्ता है। और स्वयंकृत कर्म का भोक्ता भी है। आत्मा के अनंत गुणों में चेतना शक्ति सर्वाधिक अग्र स्थान पर अवस्थित है। चेतन के अभाव में आत्मा के अन्य गुणों का शतांश रूप में भी न मूल्य रहेगा न महत्व ही रहेगा। चेतना का अर्थ उपयोग है और उपयोग का अर्थ ज्ञान व दर्शन है। आत्मा को चेतन स्वरुप में रुपायित करने वाला गुण एकमात्र चेतना ही है। आत्मा का बंध उसके चेतन में है, जड़ भाव में नहीं। चेतन की चेतना में ही बंध है और चेतना की चेतना में ही मोक्ष है।