शवों की शिनाख्त में पुरानी तकनीक में उलझी आधुनिक पुलिस

राजन कैंथ, लुधियाना

अगस्त 2018 के 31 दिनों के दौरान महानगर में पुलिस ने 34 ऐसे अज्ञात शव बरामद किए, जिनकी पहचान नहीं हो सकी। अंत में पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम कराने के बाद समाज सेवी संस्थाओं ने उनके अंतिम संस्कार करवा दिए। उन अज्ञात लोगों में बहुत से ऐसे भी रहे होंगे, जिनके अपने भरे पूरे परिवार होंगे। मगर हालात और पुलिस की लापरवाही के चलते मजबूरन उन्हें अपनों की निगाहों से दूर अकेले ही अपने अंतिम सफर पर निकलना पड़ा।

सिविल अस्पताल के रिकॉर्ड मुताबिक हर महीने 15 से 20 ऐसे अज्ञात लोगों के पोस्टमार्टम किए जाते हैं, जिनकी पुलिस शिनाख्त नहीं करा सकती।

बायोमीट्रिक की मदद से हो सकती है शिनाख्त

एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की 98 प्रतिशत आबादी अब केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे आधार कार्ड से जुड़ चुकी है। कार्ड बनाते समय हरेक व्यक्ति का नाम, पता, उम्र दर्ज करने के साथ उसकी फोटो तथा उसकी अंगुलियों के निशान लिए जाते हैं। बायोमीट्रिक मशीन की मदद से कार्ड धारक की अंगुलियों के निशान लेते ही उसकी पूरी डिटेल निकल कर आ जाती है।

आधार से लिंक नहीं है सीसीटीएनएस

हैरत की बात है कि खुद को हाईटेक कहने वाली पंजाब पुलिस अज्ञात शवों की पहचान कराने के लिए आज तक पुराने जमाने की तकनीक पर चल रही है। देश के सभी थानों को क्त्राइम एंड क्त्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) साइट से कनेक्ट करने के बाद भी पुलिस उसे आधार कार्ड से लिंक नहीं कर सकी। यही नहीं, पुलिस के पास बायोमीट्रिक मशीन तक नहीं है, जिससे अज्ञात शव मिलने पर उसके फिंगर प्रिंट लेकर मौके पर ही उसकी पहचान कराई जा सके।

पुलिस करती है 72 घटे इंतजार

पुलिस को जब भी कोई अज्ञात शव मिलता है तो मृतक की मौत का कारण जानने से पहले उसकी पहचान कराना जरूरी होता है। मृतक की शिनाख्त के लिए पुलिस उसके फोटो सभी थानों में भेजती है। पुलिस अधिकारियों के व्हाट्सएप नंबर पर भी उसके फोटो व अन्य जानकारिया भेजी जाती हैं। उन सभी थानों का रिकॉर्ड चेक किया जाता है, जहा किसी व्यक्ति के गुम होने की शिकायत दर्ज करवाई गई हो। यह काफी पुरानी तकनीक है। शिनाख्त न होने पर 72 घटे इंतजार के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है और फिर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है।

चौंकाने वाला सीपी का स्टेटमेंट

मौजूदा समय में सभी निजी व सरकारी बैंक अकाउंट आधार के साथ लिंक हो चुके हैं। इतना ही नहीं, प्राइवेट मोबाइल कंपनिया तक आधार कार्ड के साथ खुद को कनेक्ट कर चुकी हैं। आधार कार्ड व फिंगर प्रिंट के बगैर उक्त कंपनिया नया कनेक्शन जारी नहीं करतीं। ऐसे में कमिश्नर पुलिस डॉ. सुखचैन सिंह गिल का उक्त स्टेटमेंट चौंकाने वाला है।

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