इंश्योरेंस पॉलिसी कराने का झांसा दे ठगे करोड़ो रुपये, चार आरोपित दिल्ली से गिरफ्तार Ludhiana News

लुधियाना, जेएनएन। रिटायर्ड सरकारी अध्यापक और उनके रिश्तेदारों से इंश्योरेंस पॉलिसी कराने के नाम पर 3.43 करोड़ की ठगी करने वाले चार नौसरबाजों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन्हें नई दिल्ली के मोती नगर स्थित राजिंदर पैलेस के कॉल सेंटर से काबू किया है, लेकिन सेंटर संचालक मुख्य आरोपित फरार हो गया। आरोपित पॉलिसी वॉलिसी नाम से कंपनी चलाते थे, जिसमें एक युवती और दो सगे भाई भी शामिल हैं।

दिल्ली में कॉल सेंटर चलाकर लोगों से करीबन सौ करोड़ की ठगी कर चुके हैं। इनके पास से 12 मोबाइल भी बरामद हुए हैं। सीपी राकेश अग्रवाल ने बताया कि राजगुरु नगर निवासी जगदेव सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह पटियाला में सरकारी टीचर थे और रिटायरमेंट के बाद यहां रहने लगे थे। उन्होंने एक्सिस बैंक से पॉलिसी करवाई थी। उनके पास 2015 में फोन आया और बताया गया कि उनका बोनस रुका हुआ है अगर वह एक अन्य पॉलिसी करवाते हैं तो उन्हें बोनस मिल जाएगा। उन्होंने एक अन्य इंश्योरेंस पॉलिसी 21, 500 रुपये की एक्साइड लाइफ से करवा ली थी। कुछ समय बाद उन्हें दोबारा फोन आया।

फोन करने वाले ने उन्हें पॉलिसी नंबर आदि बताकर लालच देते हुए कहा कि अगर वह एक अन्य कंपनी में इंश्योरेंस करवाते हैं तो उन्हें 20 फीसद ब्याज दिया जाएगा। वह उनके झांसे में आ गए और अपने रिश्तेदारों की भी पॉलिसी उसमें करवा दी। दो साल बाद पता चला कि उनके साथ 3.43 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। क्योंकि जिन नंबरों से फोन आता था उन लोगों ने जवाब देने ही बंद कर दिए थे। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने 12 आरोपितों को नामजद किया था, मगर पुलिस को उनके बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था।

डीसीपी सचिन गुप्ता की अगुवाई वाली पुलिस टीम ने इस मामले की गंभीरता से जांच की तो वह उक्त चारों आरोपितों तक पहुंचे। आरोपितों की पहचान योगेश कुमार निवासी मंगोलपुरी दिल्ली, उसका भाई आकाश कुमार, सुल्तानपुरी दिल्ली निवासी सुनील कुमार और मौसमी निवासी मोती बाग दिल्ली के रूप में हुई। पुलिस ने इनके पास से प्राइवेट कंपनी से खरीदा हुआ पॉलिसी डाटा, मोबाइल भी बरामद किया है। इन्हें दो दिन के रिमांड पर लिया गया है और इनसे इनके मालिक और डाटा बेचने वाले आरोपित संबंधी पूछताछ की जा रही है।

तीन से चार रुपये में बेचा जा रहा पॉलिसी डाटा

जांच में सामने आया है कि इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से अपने ग्राहकों का इंश्योरेंस संबंधी डाटा तीन से चार रुपये प्रति के हिसाब से बेच दिया जाता है। यह लोग उसी डाटा के आधार पर लोगों को फोन कर उनका पॉलिसी नंबर बता देते हैं, जिससे ग्राहक को भरोसे में ले लेते हैं। इनमें से योगेश कई भाषा जानता है और वह हर राज्य में अलग नाम से फोन करता था।

पॉलिसी वॉलिसी के नाम से चला रहे थे कंपनी

यह चारों कॉल सेंटर के कर्मचारी हैं और इनका मालिक पुलिस के हाथ नहीं लगा है, जिस सेंटर से इन्हें पकड़ा गया है उसे पॉलिसी वॉलिसी के नाम से चलाया जा रहा था। एक बात यह भी सामने आई है कि जिस जगह से इन्हें काबू किया गया है वहां हर दूसरी तीसरी दुकान में इस तरह के सेंटर चल रहे हैं।

मोबाइल नंबरों से मिली लीड तो पकड़े गए

सूत्रों के अनुसार पुलिस की ओर से दर्जन से भी ज्यादा शिकायतों की जांच की तो पीड़ितों के नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाई गई। पुलिस ने कॉल डिटेल के माध्यम से नंबर तलाशने शुरू किए, जो सभी पीड़ितों से बात करते समय कॉमन तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे थे। इसी लीड को फॉलो करते हुए पुलिस की आठ सदस्य टीम ने इन्हें काबू किया है।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

1952 से 2019 तक इन राज्यों के विधानसभा चुनाव की हर जानकारी के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.