आखिर 36 साल बाद पूरी हुई शिअद की स्थानीय उम्मीदवार की तलाश

जसदीप कौर अब खन्ना विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल की उम्मीदवार होंगी। खन्ना के वार्ड 13 से वे लगातार दूसरी बार इसी साल पार्षद चुनाव जीती हैं।

JagranThu, 28 Oct 2021 01:38 AM (IST)
आखिर 36 साल बाद पूरी हुई शिअद की स्थानीय उम्मीदवार की तलाश

सचिन आनंद, खन्ना : जसदीप कौर अब खन्ना विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल की उम्मीदवार होंगी। खन्ना के वार्ड 13 से वे लगातार दूसरी बार इसी साल पार्षद चुनाव जीती हैं। जसदीप कौर के नाम की घोषणा के साथ ही 36 साल बाद शिअद की स्थानीय उम्मीदवार की तलाश भी पूरी हो गई है। 1985 के बाद से अकाली दल बाहरी उम्मीदवारों को ही पैराशूट के जरिए खन्ना से उतारता रहा है। इनमें से कुछ जीते तो कुछ हारे भी, लेकिन स्थानीय उम्मीदवार की मांग भी हर चुनाव के साथ मजबूत हो रही थी। वर्करों की इस नब्ज को आखिर पार्टी ने इस बार समझा और जसदीप कौर को खन्ना से टिकट दी।

1985 में पूर्व सांसद दिवंगत सुखदेव सिंह लिबड़ा को खन्ना विधानसभा सीट से अकाली दल ने टिकट दिया था। वो चुनाव अकाली दल जीत गया। उस वक्त खन्ना विधानसभा सीट एससी के लिए आरक्षित थी। 1992 में अकाली दल ने विधानसभा चुनाव का बायकाट किया। 1997 में आरक्षित सीट से समराला के रहने वाले बचन सिंह चीमा लड़े और जीत गए। 2002 में बाहरी उम्मीदवार सतविदर कौर धालीवाल को टिकट मिली तो अकाली दल हार गया।

2007 में लुधियाना निवासी बिक्रमजीत सिंह खालसा खन्ना पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस के उस वक्त के प्रदेश प्रधान शमशेर सिंह दूलो को हरा कर बड़ा फेरबदल किया। 2012 में खन्ना विधानसभा सीट जनरल हो गई तो 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में बाहर से आए रणजीत सिंह तलवंडी मैदान में थे। दोनों चुनाव अकाली दल हार गया। पिछले दो चुनाव हार जाने की वजह से भी अब स्थानीय उम्मीदवार की मांग जोर पकड़ने लगी थी।

दूसरी बार महिला उम्मीदवार

अकाली दल ने खन्ना विधानसभा सीट से दूसरी बार महिला उम्मीदवार का दांव खेला है। हालांकि पहली बार 2002 में उम्मीदवार बनाई गई सतविदर कौर धालीवाल जीतने में सफल नहीं रही थी। उन्हें कांग्रेस की महिला उम्मीदवार हरबंस कौर दूलो ने हराया था। उसके बाद अब जसदीप कौर को अकाली दल ने मैदान में उतारकर महिला वोटरों को रिझाने का दांव खेला है। उनके सामने कैबिनेट मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली होंगे।

शहरी उम्मीदवार का भी खेला दांव

खन्ना विधानसभा सीट एक अ‌र्द्ध शहरी सीट मानी जाती है। यहां करीब 60 फीसद मतदाता शहरी हैं। ऐसे में अकाली दल ने दो बार की पार्षद जसदीप कौर को मैदान में उतार कर शहरी कार्ड भी खेल दिया है। गांवों में अकाली दल का एक तय आधार मौजूद है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के शहरी वोटों में सेंधमारी कर पार्टी इस चारकोणीय चुनाव में जीत के लायक वोट हासिल करने की रणनीति के तहत काम कर रही है।

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