गुरकीरत कोटली बनेंगे मंत्री! इंटरनेट मीडिया पर खन्ना विधायक के समर्थकों में लगी पोस्टें डालने की होड़

खन्ना में इंटरनेट मीडिया पर अधिकांश चर्चा इसी मसले को लेकर है कि कैबिनेट में विधायक गुरकीरत कोटली आएंगे तो उन्हें कौन सा विभाग मिलेगा। मंत्री बनने के बाद नफे और नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

Pankaj DwivediWed, 22 Sep 2021 12:02 PM (IST)
खन्ना के विधायक गुरकीरत कोटली के समर्थक उन्हें सीएम चन्नी कैबिनेट में मंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

सचिन आनंद, खन्ना (लुधियाना)। पंजाब सरकार में बड़ा फेरबदल हुआ है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद अब चरणजीत सिंह चन्नी प्रदेश के पहले अनुसूचित जाति के सीएम हैं। दो उप-मुख्यमंत्री भी शपथ ले चुके हैं। अब सियासी जानकारों की नजर मंत्रिमंडल के गठन पर है। बदलाव के इस दौर में कई नए और पुराने विधायकों की उम्मीदें भी जागी हैं। खन्ना से दो बार विधायक रह चुके और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र गुरकीरत सिंह कोटली भी दौड़ में शामिल हैं। ऐसे में सियासी हलकों में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या अब की बार खन्ना को झंडी वाली कार मिलेगी। 

खन्ना में इंटरनेट मीडिया भी इस वक्त इसी चर्चा को लेकर गर्म है। कोटली समर्थकों में उनके समर्थन में पोस्टें डालनी की होड़ लगी है तो विरोधी भी कटाक्ष करने से नहीं चूक रहे हैं। वाट्सएप ग्रुपों में अधिकांश चर्चा इसी मसले को लेकर है कि कैबिनेट में कोटली आएंगे तो उन्हें कौन सा विभाग मिलेगा। मंत्री बनने के बाद नफे और नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। कोटली समर्थक अपनी पोस्टों में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की कुर्बानी का हवाला देते हुए उनके परिवार को कैबिनेट में स्थान देने की वकालत करने में लगे हैं। 

गुरकीरत सिंह कोटली के समर्थकों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर डाली गई पोस्टें

कैप्टन से नाराज हो गए थे कोटली

पंजाब सरकार के दूसरे कैबिनेट विस्तार के दौरान कोटली को जब पंजाब कैबिनेट में स्थान नहीं मिला था तो वे कैप्टन अमरिंदर सिंह से नाराज़ हो गए थे। उस वक्त कोटली ने खुल कर कहा था कि उनके परिवार ने पंजाब की शांति व भाईचारे के लिए खून दिया है, उन्हें कैबिनेट में स्थान मिलने की उम्मीद थी। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और कोटली परिवार के रिश्तों में खटास देखने को भी मिली। कैप्टन ने खन्ना को जिला बनाने का अपना ही वादा ठंडे बस्ते में डाला और ईसड़ू की राज्यस्तरीय शहीदी कांफ्रेंस में पांच साल में एक बार भी नहीं पहुंचे। कोटली ने भी जब मौका मिला तो नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश कांग्रेस प्रधान बनने के बाद उनका भव्य स्वागत खन्ना में किया। सिद्धू पर फूलों की वर्षा तक करा दी गई।

कभी पंजाब की सियासत की धुरी रहा है खन्ना

खन्ना किसी वक्त पंजाब की सियासत की धूरी रहा है। जब बेअंत सिंह पंजाब के सीएम बने तो वे पायल के रहने वाले थे। पायल उस वक्त खन्ना तहसील में थी। सीएम बनने के बाद बेअंत सिंह ने पायल को सब डिवीज़न का दर्जा दिया। उस वक्त ही शमशेर सिंह दूलो कांग्रेस सरकार में कद्दावर मंत्री बने। वह खन्ना से विधायक थे। खन्ना के रहने वाले और समराला से विधायक कर्म सिंह गिल भी सरकार में मंत्री थे। दूलो बाद में पंजाब कांग्रेस के प्रधान बने। केंद्रीय मंत्री रहे बूटा सिंह की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र भी खन्ना और आसपास का क्षेत्र रहा। वे रोपड़ लोकसभा से सांसद जीतते थे और खन्ना उस वक्त रोपड़ लोकसभा का हिस्सा था। राजनीतिक इतिहास में थोड़ा और पीछे जाएं तो 1967 में बनी लक्ष्मण सिंह गिल सरकार में कैबिनेट का गठन ही खन्ना में एक मिल में हुआ था। उस जमाने में खन्ना का नाम पहली बार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना था।

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