लुधियाना की इंडस्ट्री को फरवरी से नहीं मिला आफलाइन जीएसटी और वैट रिफंड, उद्यमी परेशान

फरवरी से हजारों आफलाइन केसों में इंडस्ट्री का करोड़ों रुपया विभाग के पास अटका पड़ा है। (सांकेतिक फोटो)
Publish Date:Thu, 29 Oct 2020 07:23 AM (IST) Author: Pankaj Dwivedi

लुधियाना [मुनीश शर्मा]। लंबे समय से बाजार की सुस्ती और लेन-देन में हुई गिरावट के बाद इंडस्ट्री अब दोबारा धीमे धीमे पटरी पर लौट रही है। फेस्टीवल सीजन ने जहां इंडस्ट्री को आक्सीजन देने का काम किया है, वहीं नकदी संकट के चलते उद्योगों का प्रोडक्शन की रफ्तार दोबारा पटरी पर लाना मुश्किल हो रहा है। फरवरी से हजारों आफलाइन केसों में इंडस्ट्री का करोड़ों रुपया विभाग के पास अटका पड़ा है।

सरकार के पास फंड न होने के चलते इंडस्ट्री को आफलाइन के रिफंड नहीं मिल पा रहे है। पिछले तीन महीनों से आनलाइन प्रक्रिया के प्रति सक्रियता बढ़ी है लेकिन फरवरी से लेकर जुलाई तक के आफलाइन किए गए आवेदन अभी तक विभाग के पास अटके पड़े हैं। इससे इंडस्ट्री का रिफंड जारी न होने के कारण बैंक ब्याज के रूप में झटका सहना पड़ रहा है।

आल इंडिया फडेरेशन आफ टैक्स पिटीशनर के वाइस चेयरमैन बॉबी शर्मा के मुताबिक फरवरी से जीएसटी और वैट के रिफंड अटके पड़े हैं। इसमें अधिकतर रिफंड पुरानी आफलाइन प्रक्रिया के तहत भरे गए हैं। छह महीने के रिफंड की रकम अधिक होने के चलते इंडस्ट्री को इसका भारी नुकसान सहना पड़ रहा है।

सरकार तत्काल इंडस्ट्री को राहत दे 

फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीयल एवं कमर्शियल आर्गनाइजेशन (फीको) के प्रधान गुरमीत सिंह कुलार ने कहा कि रिफंड न जारी होने से इंडस्ट्री को ब्याज देना पड़ रहे हैं। वहीं, अब नए व्यापार के लिए लिमिट का पैसा भी सरकारी खजाने में इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में प्रोडक्शन प्रोसेस को दोबारा पटरी पर लाने में भारी परेशानी हो रही है। सरकार को तत्काल रिफंड देकर इंडस्ट्री को राहत देनी चाहिए।

जीएसटी और वैट रिफंड की प्रक्रिया सरल की जाए

कोहिनूर साइकिल के एमडी अनिल सचदेवा के मुताबिक सरकार को वैट और जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को बेहतर करना चाहिए। जो बकाया वैट रिफंड है, उसे तत्काल जारी करना चाहिए। इस प्रक्रिया को बंद हुए ही कई साल बीत गए हैं, लेकिन अभी भी इनका पेंडिंग होना चिंता का विषय है। वहीं जीएसटी रिफंड के लिए भी तत्काल प्रक्रिया हो।

 

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