Dengue Treatment: लुधियाना में विशेषज्ञ बोले- डेंगू से न घबराएं, प्लेटलेट्स 50 हजार तो अस्पताल जाने की जरूरत नहीं

लुधियाना के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों से कहा कि डेंगू होने पर घबराएं नहीं। डेंगू होने पर घर पर ही इलाज किया जा सकता है। 90 प्रतिशत लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है।

Pankaj DwivediTue, 12 Oct 2021 01:57 PM (IST)
लुधियाना में फेसबुक लाइव के दौरान लोगों को टिप्स देते हुए विशेषज्ञ डाक्टर। जागरण

जासं, लुधियाना। डेंगू से बचाव को लेकर सोमवार जिला प्रशासन ने अनुभवी व वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ फेसबुक लाइव कार्यक्रम करके उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया है। इसमें डीएमसी अस्पताल के हृदयरोग विशेषज्ञ डा. बिश्व मोहन, प्रोफेसर डा. राजेश महाजन, सीएमसी अस्पताल की प्रोफेसर डा. मैरी जॉन, सहायक सिविल सर्जन डा. विवेक कटारिया, डिस्ट्रिक एपिडेमोलाजिस्ट डा. प्रभलीन कौर व डा. साहिल वर्मा शामिल थे।

चिकित्सकों ने लोगों से कहा कि डेंगू होने पर घबराएं नहीं। सीएमसी अस्पताल की मेडिसन विशेषज्ञ डा. मैरी व डीएमसी अस्पताल के मेडिसन विशेषज्ञ डा. राजेश महाजन ने कहा कि अगर प्लेटलेट्स 50 हजार से कम हो जाएं तभी अस्पताल जाने की जरूरत है। डेंगू होने पर घर पर ही इलाज किया जा सकता है। 90 प्रतिशत लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है। केवल दस प्रतिशत लोगों को भर्ती होना पड़ता है। डेंगू होने पर पहले चार से पांच दिन में तेज बुखार होता है। पैरासिटामोल दिन में चार से पांच ली जा सकती है। अगर बुखार तेज हो, तो ठंडे पानी से पटिटयां करें। बुखार के दौरान पानी व अन्य पेय पदार्थ ज्यादा पीना चाहिए, जिससे कि यूरिन का कलर लाइट रहे।

दोनों विशेषज्ञ डाक्टरों ने कहा कि अगर प्लेटलेट्स बहुत तेजी से कम हो रहे हों तो अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। इसके अलावा सांस चढ़े, खून आना शुरू हो जाए, बेहोशी आए, चक्कर आएं, काले रंग के स्टूल आए, पेट में दर्द हो और खून की उल्टी आएं, तब अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। इसे डेंगू के वार्निंग सिंप्टम  कहते हैं। वर्निंग सिंप्टम डेंगू होने के चार से पांच दिन बाद आते हैं। इसके अलावा जिन्हें शुगर, हार्ट, किडनी की बीमारी हो या जिनकी खून पतला करने की दवा चल रही हो, अगर उन्हें डेंगू हो तो तुरंत अपने डाक्टर से मिलना चाहिए।

डा. महाजन ने भ्रम किए दूर

 बहुत से लोग डेंगू होने पर मल्टीविटामिन इंजेक्शन के साथ ग्लूकोज लगवाते हैं। इससे कभी भी प्लेटलेटस नहीं बढ़ते हैं।  स्टीरायड का भी डेंगू में कोई रोल नहीं है। कुछ स्टडी जरूर आई थी, लेकिन हमने देखा है कि स्टीरायड लेने से डेंगू मरीज को कोई फर्क नहीं पड़ता है।  बकरी के दूध का भी डेंगू में अलग से कोई बहुत अधिक असर नहीं है। बकरी व गाय के दूध का असर बराबर ही होता है।  कीवि व ड्रैगन फ्रूट लेने से ही डेंगू में फायदा होता है, यह सही नहीं। डेंगू होने पर विटामिन सी वाला कोई भी फल लिया जा सकता है।  डेंगू होने पर बहुत से लोग एंटीबायोटिक लेते हैं। जबकि डेंगू के इलाज में एंटीबायोटिक का कोई रोल नहीं है, क्योंकि यह एक वायरल बीमारी है।

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