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नियमों की धज्जियां उड़ा रहे जालंधर नंबर के ऑटो

नियमों की धज्जियां उड़ा रहे जालंधर नंबर के ऑटो
Publish Date:Mon, 10 Aug 2020 05:00 AM (IST) Author: Jagran

राजन कैंथ, लुधियाना :

शहर की सड़कों पर ऑटो रिक्शाओं की भरमार है। जिसके चलते ट्रैफिक पुलिस उन पर पूरी तरह से सख्ती बरत रही है। वहीं, जालंधर के नंबर वाले ऑटो रिक्शाओं पर उनकी नजरें इनायत है। यही कारण है कि जालंधर नंबर के ऑटो रिक्शा फिल्लौर से आकर यहां सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उनके चालान काटना तो दूर, पुलिस उन्हें रोकती भी नहीं है। उन ऑटो रिक्शाओं को फिल्लौर से घंटा घर रूट पर देखा जा सकता है।

मोटर व्हीकल एक्ट के नियमानुसार किसी भी जिले के परमिट पर पास हुआ ऑटो रिक्शा दूसरे जिले में नहीं जा सकता। उनमें सवारियों को बैठाने के भी नियम हैं। मगर फिल्लौर से आने वाले ऑटो रिक्शाओं के लिए कोई नियम कानून नहीं है। पुरानी सब्जी मंडी कपूर अस्पताल के सामने उनका पक्का स्टैंड बना हुआ है। जहां पर वो धड़ल्ले से फिल्लौर की आवाज लगा कर सवारियों को बैठाते हैं।

इसी तरह से जालंधर बाइपास चौक पर भी उनका पक्का स्टैंड है। पुरानी सब्जी मंडी और जालंधर बाइपास में सवारियों को आवाज लगाने और ऑटो में बैठाने के लिए बाकायदा दो लोगों को रखा गया है। हैरत की बात है कि दोनों चौराहों पर हर समय पुलिस की टीमें तैनात रहती हैं। मगर वो उन ऑटो रिक्शाओं को देख कर भी अनदेखा कर देती है।

500 महीन लेती है ऑटो रिक्शा वेलफेयर सोसायटी

टिब्बा रोड निवासी राहुल सिक्का ने बताया कि वो भी ऑटो चलाने का काम करता है। फिल्लौर बस स्टैंड के पीछे एक ऑटो रिक्शा स्टैंड है। जिसके साथ 50 से ज्यादा ऑटो रिक्शा जुड़े हुए हैं। वो ऑटो रिक्शा वेलफेयर सोसायटी हरेक ऑटो रिक्शा से 500 रुपये महीना लेती है। उनका दावा है कि पैसे जमा कराने वाले ऑटो रिक्शा को घंटा घर तक पुलिस नहीं रोकेगी। सच्चाई भी यही है कि पुलिस जालंधर नंबर के किसी ऑटो को रोकती नहीं है। कोट्स

हमने पहले भी जालंधर नंबर के ऑटो रिक्शाओं पर कार्रवाई की थी। उसके बाद लॉकडाउन के दौरान तो कोई ऑटो रिक्शा चला ही नहीं। मगर अब फिर से चलने लगे हैं। मामला मेरे ध्यान में आया है। उनके खिलाफ कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सोमवार से जहां कहीं बाहरी जिले का ऑटो रिक्शा नजर आएगा, उसे बंद किया जाएगा। पैसे लेकर कार्ड देने वाली सोसायटी के बारे में भी जांच कराई जाएगी।

एसएस बराड़, डीसीपी ट्रैफिक

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