इंदौर कूड़े से कमा रहा 20 करोड़, हम कूड़ा उठाने पर खर्च कर रहे 16 करोड़

स्वच्छता रैंकिग में कूड़ा निस्तारण के भी अंक हैं।

JagranSun, 28 Nov 2021 08:06 PM (IST)
इंदौर कूड़े से कमा रहा 20 करोड़, हम कूड़ा उठाने पर खर्च कर रहे 16 करोड़

राजेश भट्ट, लुधियाना

स्वच्छता रैंकिग में कूड़ा निस्तारण के भी अंक हैं। कूड़ा निस्तारण में हम अभी भी देश के अन्य शहरों से पिछड़े हुए हैं। स्वच्छता रैंकिग में टाप रहने वाले इंदौर से तो हमारी तुलना करने लायक ही नहीं है। इंदौर कूड़े से जितनी कमाई करता है, हम उतनी रकम प्राइवेट कंपनी को कूड़ा लिफ्ट करने के बदले दे रहे हैं। इंदौर हर साल कूड़े से 20 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है, जबकि अगले तीन साल में वह कूड़े से कमाई का आंकड़ा 100 करोड़ के पार पहुंचाना चाहते हैं। वहीं लुधियाना नगर निगम सालाना करीब 16 करोड़ रुपये एक निजी कंपनी को सेकेंडरी डंपों से कूड़ा उठाकर मेन डंप तक पहुंचाने की एवज में दे रहा है। इंदौर कूड़े से बिजली, सीएनजी, मीथेन, खाद तैयार करके कमाई कर रहा है। वहीं हमारे शहर में दो फरवरी 2021 के बाद से अभी तक आडीएफ प्लांट तक नहीं चला।

नगर निगम ने जिस कंपनी से कूड़ा प्रबंधन के लिए करार किया था, फरवरी 2021 में उस कंपनी से निगम ने करार तोड़ दिया। उस कंपनी को भी नगर निगम सालाना 15 करोड़ के करीब रुपये कूड़ा लिफ्टिग के बदले दे रहा था। जो कंपनी इन दिनों कूड़ा लिफ्ट कर रही है वह भी निगम से हर साल करीब 16 करोड़ रुपये ले रही है। नगर निगम अब शहर में कूड़ा प्रबंधन के लिए नई कंपनी की तलाश करने जा रहा है। निगम भी अब ऐसी कंपनी की तलाश कर रहा है जो कूड़े से बिजली बना सके, लेकिन निगम अफसरों ने जो डीपीआर तैयार की है उसके हिसाब से जो बिजली बनेगी उसकी कीमत ज्यादा होगी। उसमें भी निगम को अपनी जेब से कुछ पैसे खर्च करने पड़ेंगे। अब सवाल यह उठता है कि नगर निगम शहर में इंदौर का पैटर्न क्यों नहीं अडाप्ट कर रहा। अगर निगम उसे सिस्टम को अडाप्ट करे तो यहां भी निगम के लिए कूड़ा कमाई का साधन बन सकता है। इंदौर में पालीथिन से बन रही है सड़क

इंदौर में कूड़ा सेग्रीगेशन के मापदंड बिल्कुल अलग हैं। यहां पालीथिन कैरीबैग पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इसके बावजूद कूड़े में जो पालीथिन आता है उसे प्रोसेसिग से पहले अलग कर दिया जाता है। इसका इस्तेमाल सड़क बनाने में किया जा रहा है। वहीं लुधियाना में कूड़े में सबसे बड़ी मात्रा पालीथिन की ही है। यही नहीं यहां पर पालीथिन को अलग नहीं किया जा रहा। कंपोस्ट खाद से हो रही कमाई

इंदौर नगर निगम को गीले कूड़े से तैयार हो रही कंपोस्ट खाद से खूब कमाई हो रही है। यह खाद जैविक खाद होती है, जिसे जैविक खेती में इस्तेमाल किया जा रहा है। लुधियाना में भी एक बार तो कंपनी ने बड़े स्तर पर खाद बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन कंपनी से करार टूटने के बाद कंपोस्ट प्लांट भी बंद है और गीला व सूखा कूड़ा भी अलग नहीं किया जा रहा है। इंदौर में हटा दिए सेकेंडरी डंप

इंदौर में वेस्ट मैनेजमेंट का सिस्टम ऐसा बना है कि शहर में सेकेंडरी डंप ही नहीं बनाए गए हैं। नगर निगम घर-घर से कूड़ा उठाकर सीधे डंप पर पहुंचा देता है, जहां कूड़े को प्रोसेस किया जाता है। वहीं लुधियाना में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए भी निगम ने ठीक से व्यवस्था नहीं की है। घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर असंगठित क्षेत्र के पास है। जो कि लोगों के घर से कूड़ा उठाकर सेकेंडरी डंप तक पहुंचाते हैं। इसकी वजह से वहां पर कूड़ा बिखरा रहता है। मैं भी स्वच्छता का प्रहरी पालीथिन से सड़क बनवाने की चाहत : गुरप्रीत सिंह गोपी

शहर में पालीथिन की बढ़ती मात्रा को देखते हुए वार्ड नंबर 94 के पार्षद गुरप्रीत सिंह गोपी ने शहर में पालीथिन वाली सड़कें बनाने का प्रस्ताव नगर निगम हाउस की बैठक में रखा था। गोपी ने कहा था कि इसकी शुरुआत वह अपने वार्ड से करना चाहते हैं। निगम उनके वार्ड में जो भी सड़कें बनाएगा वह पालीथिन से बनाए। यहां तक कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उन्होंने एक सड़क का निर्माण करवाने की मंजूरी भी निगम को दे दी थी, लेकिन निगम अफसर इससे आगे नहीं बढ़े। गुरप्रीत सिंह गोपी ने बताया कि पालीथिन से निजात पाने का यही एक तरीका है। नहीं तो यह हमारी मिट्टी, पानी व हवा को प्रदूषित कर देगा। उन्होंने कहा कि पालीथिन से सड़कें बनवाने के लिए वह लगातार निगम पर दबाव बनाते रहेंगे। इसके अलावा लोगों को पालीथिन का प्रयोग न करने के लिए भी प्रेरित करता रहूंगा।

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