पंजाब में Adani Group के विरोध के चक्कर में सैकड़ों युवा हुए बेरोजगार, इनमें ज्यादातर किसानों के बच्चे

पंजाब में किसानाें के विरोध के चलते अडानी ग्रुप ने किला रायपुर स्थित अपना लाजिस्टिक पार्क बंद कर दिया है। इससे करीब 400 युवाओं की नौकरी छिन गई है और वे बेरोजगार हो गए हैं। इन युवाओं में अधिकतर किसान परिवारों के हैं।

Sunil Kumar JhaSun, 01 Aug 2021 09:20 AM (IST)
लुधियाना के किला रायपुर स्थित अडानी लाजिस्‍टक पार्क। (जागरण)

लुधियाना, [मुनीश शर्मा]। पंजाब में किसान भले ही कृषि कानूनों का गुस्सा अदाणी और रिलायंस ग्रुप के प्रतिष्ठानों पर निकाल रहे हों, लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुकसान उनके अपने बच्चों पर ही पड़ रहा है। किसानों के विरोध के कारण अडानी ग्रुप ने लुधियाना के किला रायपुर स्थिति अपना लाजिस्टिक पार्क बंद कर दिया है। इससे सैकड़ों युवाओं की नौकरी चली गई। इनमें अधिकतर किसान परिवारों के हैं और अब उनके समक्ष रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है।

किसानों के विरोध के कारण किला रायपुर का अडानी लाजिस्‍टक पार्क हुआ बंद

किला रायपुर स्थित अदाणी ग्रुप के लाजिस्टिक पार्क के बंद होने से आसपास के गांवों के 400 से ज्यादा युवा बेरोजगार हो गए हैं। इस लाजिस्टिक पार्क में किला रायपुर और आसपास के क्षेत्र के युवा काम करते थे। खास बात यह है कि इनमें ज्यादातर उन्हीं किसानों के बच्चे हैं, जो तीन कृषि कानूनों के विरोध में अदाणी व रिलायंस ग्रुप के प्रतिष्ठानों के सामने सात माह से धरने दे रहे हैं।

15 हजार से चार लाख तक वेतन पा रहे थे यहां काम करने वाले कर्मचारी

यहां काम करने वाले कर्मचारियों को 15 हजार से लेकर चार लाख रुपये तक का मासिक वेतन मिल रहा था। सात माह से जारी किसानों के धरने के कारण यहां काम लगातार प्रभावित हो रहा था। इसी के चलते इसे बंद करने का निर्णय लिया गया। बेरोजगार हुए युवकों में पढ़े-लिखे युवा और श्रमिक शामिल हैं। अब उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। युवाओं को एक सप्ताह पहले ही प्रबंधन ने अपना हिसाब-किताब कर लेने का संकेत दिया था।

लुधियाना के किला रायुपर व आसपास के गांवों के युवा करते थे यहां नौकरी

लाजिस्टिक पार्क में ट्रांसपोर्ट मैनेजर के रूप में तैनात राजीव शर्मा ने कहा, 'यह एक दुखद फैसला है। इससे हमारा भविष्य अंधकारमय हो गया है। बेरोजगार होने वाले ज्यादातर युवा आसपास के गांवों से हैं। इनमें काफी युवा छोटे किसान परिवार से हैं।'

एक अन्य युवा ने बताया कि उन्हें 2018 में नौकरी मिली थी और उनका घर परिवार अच्छा चल रहा था। अब प्रबंधन के हाथ खड़े करने के बाद कुछ समझ में नहीं आ रहा। लाजिस्टिक पार्क 2018 में शुरू हुआ था तो प्रबंधन ने बाहर से कर्मचारियों को लाने के बजाय लोकल स्तर पर बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी दी थी। अब सभी का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

वेतन देना हुआ मुश्किल

लाजिस्टिक पार्क के कर्मचारियों के अलावा यहां दिहाड़ी के रूप में काम करने वाली लेबर की भी बड़ी संख्या था। पिछले सात माह से उन्हें यहां काम नहीं मिला और कोरोना काल के दौरान उन्हें अन्य स्थान पर भी काम नहीं मिल पाया। कई श्रमिकों के परिवार की हालत बहुत खराब है। अदाणी ग्रुप के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले सात माह से यहां काम बंद पड़ा है। पहले तो वह कर्मचारियों को वेतन देते रहे, लेकिन अब धरने के कारण प्रबंधन ने मजबूरी में पार्क को बंद करने का फैसला लिया है। अब वेतन देना मुश्किल है।

 

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