जनरल रावत ने युवाओं को दिया था गुरु मंत्र, आसमान छूने की कोशिश करेंगे तो चांद-तारों तक पहुंच ही जाएंगे

10 नवंबर 2018 में सीडीएस बिपन रावत लुधियाना के नेहरू सिद्धांत केंद्र में आए थे। तब उन्होंने कहा था कि अक्सर युवा लक्ष्य हासिल न होने पर हतोत्साहित हो जाते हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। बल्कि खामियों को दूर करके लक्ष्य पाने के लिए दोबार जुटना चाहिए।

Pankaj DwivediWed, 08 Dec 2021 07:09 PM (IST)
चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। पुरानी फोटो।

राजेश भट्ट, लुधियाना। General Bipin Rawat Death News चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत हमारे बीच नहीं रहे। तमिलनाडु में एक हेलिकाप्टर दुर्घटना में उनका दुखद निधन हो गया। जनरल रावत युवाओं के लिए वह हमेशा प्रेरणास्रोत रहे। लुधियाना शहर की भी यादें उनके साथ जुड़ी हैं। महानगर में उन्होंने युवाओं को सफलता का गुरु मंत्र दिया था। जनरल रावत ने कहा था युवा आसमान छूने की कोशिश करेंगे तो चांत सितारों तक पहुंच जाएंगे। इस कार्यक्रम में उनके साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी मौजूद थीं। 

10 नवंबर, 2018 में सीडीएस विपिन रावत लुधियाना के नेहरू सिद्धांत केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे, तब उन्होंने यह बात कही थी। उन्होंने कहा था कि कोई भी लक्ष्य हासिल करना है तो उसे पाने के लिए आसामान छूने की कोशिश करनी होगी। आसमान छूने की कोशिश करेंगे तो चांद तारों तक तो पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा था कि अक्सर युवा लक्ष्य हासिल न होने पर हतोत्साहित हो जाते हैं लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। बल्कि फिर से उस लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत करनी चाहिए और पहले की खामियों को दूर करना चाहिए। इसके लिए उन्हें पथ प्रदर्शकों की सहायता लेने से चूकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि असफलता इंसान को सफलता के लिए प्रेरित करती है।

वर्ष 2018 में लुधियाना के नेहरू सिद्धांत केंद्र में खालसा कालेज की छात्राओं को सम्मानित करते हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत। फाइल फोटो

स्कूलों में गुरु-शिष्य परंपरा का समर्थन किया

सीडीएस रावत भारतीय स्कूलों में गुरु शिष्य परंपरा के समर्थक थे। उन्होंने जोर देकर कहा था कि भारत की गुरु शिष्य परंपरा हमारी शिक्षा का आधार है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को विमुख नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए अपने फौज के अनुभव भी शेयर किए थे।

सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए किया था करार

इस दिन उन्होंने सतपाल मित्तल स्कूल के चेयरमैन राकेश भारती मित्तल के साथ एक समझौता किया था। राकेश भारती मित्तल ने कहा था कि सेना के शहीद सैनिकों और युद्ध के दौरान विकलांग हुए सैनिकों के 100 बच्चों को फ्री शिक्षा देंगे। जनरल रावत ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्चों को सम्मानित किया था। खालसा कालेज फार वुमन की टीम को सम्मान मिला था। खालसा कालेज की प्रोफेसर डा. हनी वालिया ने बताया कि नेहरू सिद्धांत केंद्र में बच्चे उनसे सम्मानित होकर काफी उत्साहित थे। जनरल बिपन रावत युवाओं के लिए सच्चे प्रेरणास्रोत थे। 

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