पटियाला में इंजीनियर बेटी के विवाह पर पिता की अनूठी पहल, थैलेसीमिया पीड़िताें के लिए करेंगे रक्तदान

रक्तदान कैंप मैरिज पैलेस में ही लगाया जाएगा। इसमें वधू पक्ष के अलावा वर पक्ष के लोग भी रक्तदान कर सकेंगे। इसके लिए मेडिकल कालेज की टीम विशेष तौर पर मौजूद रहेगी। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं को भी न्योता दिया गया है।

Vipin KumarMon, 29 Nov 2021 10:30 AM (IST)
पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में रक्तदान करने का ठेकेदार कर्मजीत सिंह का फाइल फोटो। सौ. स्वयं

सुरेश कामरा, पटियाला। शहर के कर्मजीत सिंह अपनी बेटी के विवाह पर अनूठी पहल करने वाले हैं। वह विवाह समारोह के दौरान थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों के लिए रक्तदान कैंप लगवाएंगे। इसमें उनके अलावा शादी समारोह में शामिल होने वाले उनके रिश्तेदार भी रक्तदान करेंगे। उनकी बेटी गुरप्रीत कौर का विवाह सोमवार को होगा। पेशे से ठेकेदार कर्मजीत सिंह अब तक 76 बार रक्तदान कर चुके हैं। वह 77वीं बार रक्तदान करेंगे। रक्तदान करने के इच्छुक 50 लोगों की लिस्ट तैयार कर ली गई है।

रक्तदान कैंप मैरिज पैलेस में ही लगाया जाएगा। इसमें वधू पक्ष के अलावा वर पक्ष के लोग भी रक्तदान कर सकेंगे। इसके लिए मेडिकल कालेज की टीम विशेष तौर पर मौजूद रहेगी। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं को भी न्योता दिया गया है। बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले कर्मजीत सिंह की बेटी गुरप्रीत कौर इंजीनियर हैं। भावी दामाद नवदीप सिंह कनाडा में अपना कारोबार करते हैं। वह मूल रूप से पटियाला शहर के रहने वाले हैं।खुशी के अवसर पर लोगों को रक्तदान करने की प्रेरणा देना उद्देश्य बकौल कर्मजीत सिंह, 'मेरी इच्छा थी कि मैं अपने घर में होने वाले पहले विवाह पर थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों के लिए रक्तदान कैंप जरूर लगाऊंगा। मेरा उद्देश्य है कि लोगों को खुशी के अवसर पर रक्तदान करने के लिए प्रेरित करूं।'

उन्होंने बताया कि विवाह समारोह भादसों रोड पर एक पैलेस में होगा। उन्होंने वर पक्ष के साथ बातचीत करके विवाह स्थल पर रक्तदान कैंप लगवाने की व्यवस्था की है। पंजाब में एक हजार से अधिक थैलेसीमिया पीडि़त बच्चे पटियाला थैलेसीमिक चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विजय पाहवा ने बताया कि प्रदेश में तीन कालेजों में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को रक्त चढ़ाया जाता है। इसमें सरकारी मेडिकल कालेज, पटियाला, मेडिकल कालेज, फरीदकोट व अमृतसर मेडिकल कालेज शामिल हैं। सरकारी मेडिकल कालेज, पटियाला में 256 बच्चे हैं, जबकि तीनों कालेजों को मिलाकर राज्य में एक हजार से अधिक थैलेसीमिया पीडि़त बच्चे हैं। एक बच्चे को 15 दिनों के बाद रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। पटियाला मेडिकल कालेज के डिपार्टमेंट आफ ट्रांस्फ्यूजन मेडिसन के पब्लिसिटी असिस्टेंट सुखविंदर सिंह ने बताया कि उनके विभाग की टीम कैंप में पूरी व्यवस्था के साथ जाएगी।

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