पंजाब में हड़ताल ही हड़ताल, अधिकांश विभागों के कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर कामकाज किया ठप

वीरवार को फरीदकोट सिविल अस्पताल में अपनी मांगों को लेकर नर्सिंग स्टाफ एनएचएम स्टाफ ओट सेंटर व अन्य विभागों के कर्मियों ने अलग-अलग हड़ताल गेट रैली व रोष-प्रदर्शन किया। जिले में रोडवेज के कच्चे कर्मचारी भी हड़ताल पर चल रहे हैं।

Pankaj DwivediThu, 09 Dec 2021 01:41 PM (IST)
फरीदकोट में सिविल अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते हुए नर्सिंग स्टाफ।

प्रदीप कुमार सिंह, फरीदकोट। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तबड़तोड़ फैसले लेकर विधानसभा चुनाव से पहले हर वर्ग को खुश करने की कवायद में जुटे हैं। हालांकि उनके फैसलों से सरकारी विभागों के कर्मचारी नाखुश ही दिखते हैं। प्रदेश सरकार का शायद ही कोई महकमा हो, जिसके कर्मचारी लंबित मांगों को लेकर दफ्तरों का कामकाज ठप कर हड़ताल पर न गए हों। वर्तमान समय में विरोधी राजनीतिक दलों से ज्यादा सरकारी कर्मचारी सरकार की परेशानी का कारण बन गए हैं। कर्मियों की व्यापक हड़ताल से लोगों के सरकारी दफ्तरों में कामकाज नहीं हो पा रहे हैं। लोग हताश और निराश हैं। आशंका जताई जा रही है कि जब तक विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू नहीं होती, तब तक स्थिति सुधरने वाले नहीं है।

वीरवार को फरीदकोट सिविल अस्पताल में अपनी मांगों को लेकर नर्सिंग स्टाफ, एनएचएम स्टाफ ओट सेंटर व अन्य विभागों के कर्मियों ने अलग-अलग हड़ताल, गेट रैली व रोष-प्रदर्शन किया। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर होने से अस्पताल के इमरजेंसी को छोड़कर दूसरे वार्डों में मरीजों को दाखिल ही नहीं किया जा रहा है। ओट सेंटर के बाहर नशा पीड़ितों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। 5 मिनट के काम के लिए लोगों घंटों लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है।

कुछ इसी तरह से रोडवेज और पीआरटीसी के कच्चे मुलाजिम रेगुलर किए जाने की मांग को लेकर पिछले 4 दिन से कामकाज ठप करके बैठे हैं। सरकारी बसें कम संख्या में चल रही हैं। निजी बस संचालकों की चांदी तो है लेकिन वे महिला यात्री बेहद परेशान हैं जो कि सरकारी बसों में आधार कार्ड दिखाकर नि:शुल्क यात्रा कर रही थी।

कर्मचारियों पर सख्ती का भी असर नहीं

ऐसा भी नहीं है कि प्रदेश सरकार इन हड़ताली लोगों पर सख्ती नहीं दिखा रही है। पीआरटीसी मैनेजमेंट ने काम पर न लौटने वाले कर्मियों को निकालकर उनकी जगह दूसरे कर्मियों की भर्ती किए जाने का नोटिस चस्पां किया है। सेहत विभाग ने भी नर्सिंग स्टाफ को काम पर लौटने की चेतावनी देते हुए सभी हड़ताली कर्मियों की जानकारी विभाग से मांग ली है। अब यह देखने वाली बात होगी कि प्रदेश सरकार वर्तमान माहौल से कैसे बाहर निकलती है। और लोगों को सुविधाएं व सेवाएं मुहैया करवाती हे।

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