किसी अजूबे से कम नहीं कर्म सिंह की कलाकारी

बिंदु उप्पल, लुधियाना जिस इंसान ने अपने हुनर को पहचान लिया वो जिंदगी में कभी भूखा नहीं म

JagranSun, 02 Apr 2017 03:00 AM (IST)
किसी अजूबे से कम नहीं कर्म सिंह की कलाकारी

बिंदु उप्पल, लुधियाना

जिस इंसान ने अपने हुनर को पहचान लिया वो जिंदगी में कभी भूखा नहीं मरता है। बस हुनर को उभारते रहना चाहिए। अपने हुनर को जगजाहिर करने के लिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए। यह कहना है गांव बोदलवाल के कलाकार कर्म सिंह बोदलवाला का।

कश्मीरी कारिगरी से मिली प्रेरणा

10वीं जमात पास 59 वर्षीय कर्म सिंह ने बताया कि हम हमेशा कश्मीरी महिलाओं को देखते थे कि वो कैसे बोतल में फूलों को सुंदर रंगों में आकर्षक आकार देती थी तब मैं सोचता था कि मैं भी बोतल में सलाइयों से कुछ बुन सकता हूं। तब मैंने अपने हुनर को रूप देने के लिए 1991 में कबाड़िया से एक बोतल खरीदी और उसमें सबसे पहले फोटो फ्रेम फिट किया। इसके बाद उस बोतल में करोशिया से ऊन से मंजा बुना। उन्होंने बताया कि पहले तो बोतल में करोशिया से मंजी बुनते एक महीना लग जाता है, लेकिन अब एक दिन में एक मंजी तैयार कर देते हैं। उन्होंने बताया कि वह अब तक 2500 से अधिक बोतलों में मंजी बुन चुके हैं।

500 से अधिक अधिकारियों को उपहार में दे चुके हैं मंजी

कर्म सिंह ने बताया 500 से अधिक प्रशासनिक अधिकारियों को बोतल में बना मंजा उपहार स्वरूप भेंट कर चुका है। पूर्व मुख्य मंत्री स्व. बेअंत सिंह, वित्तमंत्री डा.केवल कृष्ण, मंत्री मोहन सिंह कंग, पीएयू के पूर्व वीसी डा.खेम सिंह गिल, पंजाबी सभ्याचार के बाबा बोहड़ जगदेव सिंह जस्सोवाल, मंत्री कर्म सिंह गिल, जगराओं एसएसपी उपिंदर सिंह घुम्मन, एसएसपी हरिंदर चाहल, एसपी हेड क्वाटर हरतेज सिंह सेखों, पंजाब की कोयल नरिंदर बीबा, गायक गुरदास मान, डीआइजी दिनकर गुप्ता सहित कई लोगों भेंट कर चुका है।

जड़ों को तराश कर बनाया जानवर

इतना ही कर्म सिंह ने पेड़ों की जड़ो को तराश कर 15 से अधिक जानवरों की शक्ल देता है। मुंह बोलते ये लकड़ी के जानवर हर किसी को हैरत में डाल देते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण उनकी ये कला उनके मन में ही दफन हो रही है। चाह कर भी वे उसे नहीं उभार पा रहे हैं। गुजर बसर के लिए मौजूदा समय में वह पुलिस लाइन जगराओं में दैनिक वेतन पर कार्यरत हैं।

किसी ने नहीं समझी कला कद्र

बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्म सिंह दस्तकारी में दक्ष होने के साथ-साथ रेडियो सिंगर भी हैं। बीबी नूरां के शर्गिद कर्म सिंह ने लोक कला को सहेजने के लिए नंद लाल नूरपुरी मेमोरियल फाउंडेशन भी बनाई थी जिसे धनाभाव के कारण बंद कर दिया। कर्म सिंह का कहना है कि उसकी कला को सराहने वाले तो बहुत मिले पर क्रददान आज तक नहीं मिला।

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