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डीसी की प्राइवेट अस्पतालों को चेतावनी, बहानेबाजी छोड़ें, हर अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए बेड देने ही होंगे

डीसी की प्राइवेट अस्पतालों को चेतावनी, बहानेबाजी छोड़ें, हर अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए बेड देने ही होंगे
Publish Date:Wed, 05 Aug 2020 04:00 AM (IST) Author: Jagran

आशा मेहता, लुधियाना

औद्योगिक शहर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में एकाएक तेजी आने से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। शहर के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों को बेड नहीं मिल रहे। लोगों में इसके प्रति बढ़ते रोष को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर वरिदर शर्मा ने शहर के अस्पताल प्रबंधकों के साथ मंगलवार को पुलिस लाइन में इमरजेंसी मीटिग की।

डीसी ने अस्पताल प्रबंधनों को स्पष्ट कहा कि कोरोना महामारी राष्ट्रीय आपदा की तरह है और अब अस्पतालों की बहानेबाजी नहीं चलेगी। हर अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए बेड मुहैया करवाने होंगे। निजी छोटे अस्पताल भी मरीजों को रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें। अस्पताल में पहुंचने वाले सभी मरीजों को इलाज व बेड मुहैया करवाएं। यदि कोई अस्पताल इसके बावजूद ऐसा नहीं करता है तो सरकार अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आवश्यक कदम उठाएगी। हालांकि डीसी ने अस्पताल प्रबंधकों से कहा कि जो पूरा अस्पताल कोरोना मरीजों के लिए देंगे, उन्हें आगामी 26 जनवरी के समारोह में सम्मानित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सिविल अस्पताल सहित कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे सात बड़े अस्पतालों में बेड नहीं बचे हैं।

बैठक की लाइव रिपोर्ट: स्वेच्छा से आगे नहीं आए तो प्रशासन अपने अधिकार करेगा इस्तेमाल

बैठक में डीसी वरिदर शर्मा ने स्पष्ट कहा कि इस समय हालात बुरे हैं। कोरोना संक्रमित व कोरोना संदिग्ध मरीज बेड न मिलने की वजह से मर रहे हैं। हम लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर के लेवल टू व लेवल थ्री सुविधा वाले अस्पतालों को कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए अपने दरवाजे खोलने ही होंगे। अस्पतालों को पचास प्रतिशत बेड कोरोना मरीजों के लिए देने होंगे। अगर कोई स्वेच्छा से आगे नहीं आएगा, तो हम अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन हम नहीं चाहते कि यह नौबत आए। हम चाहते हैं कि कोरोना महामारी से हम मिल-जुलकर निपटें। अस्पतालों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। अस्पताल प्रबंधक हमें गुगल शीट्स में मंगलवार रात तक जानकारी दे दें कि वह अपने यहां से कितने बेड दे रहे हैं। हम अस्पतालों को फ्री इलाज करने को नहीं कह रहे हैं। सरकार ने कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए रेट फिक्स किए हैं। इमरजेंसी बैठक में पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल, सिविल सर्जन डॉ. राजेश बग्गा भी मौजूद रहे। डीसी बोले: गुस्सा आता है जब कोरोना मरीजों के इलाज पर बहानेबाजी होती है

मीटिग में डीसी के तेवर काफी तल्ख थे। डीसी ने कहा कि उन्हें बड़ा गुस्सा आता है, जब कई निजी अस्पताल कोरोना मरीजों का इलाज न करने को लेकर बहानेबाजी करते हैं। कुछ कहते हैं कि हमारा सेंट्रलाइज्ड एरिया है। कुछ कहते हैं कि पीपीई किट्स की समस्या है। कुछ का कहना है कि हमें कोरोना के मरीजों के साथ डील करना नहीं आता। डीसी ने कहा कि जब सरकारी अस्पताल के डॉक्टर संक्रमित मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे हैं, तो क्या ऐसा हो सकता है कि सालों से अस्पताल चला रहे नामी व अनुभवी डॉक्टरों को कोविड मरीजों के साथ डील करना ही नहीं आता। उन्होंने कहा कि जो अस्पताल कोरोना मरीजों का इलाज नहीं करने के पीछे अलग-अलग समस्याएं गिना रहे हैं, उनके लिए हमारे पास एक्सपर्ट की टीम है। अस्पताल इस टीम की मदद लें। डीएमसी में रेफरल काउंटर बनाया, पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से एक-एक प्रतिनिधि रखेगा नजर

डीसी वरिदर शर्मा ने कहा कि डीएमसीएच में हमने रेफरल काउंटर बना दिया है। इस काउंटर पर पुलिस, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से एक-एक प्रतिनिधि है। जब भी डीएमसीएच में कोरोना संक्रमित गंभीर मरीज आएंगे और अगर वहां बेड खाली नहीं हुए तो हम उसे अलग-अलग निजी अस्पतालों में रेफर करेंगे। हमारे पास शहर के अलग-अलग निजी अस्पतालों में उपलब्ध आइसीयू बेड की जानकारी है। जिस मरीज को एंबुलेंस में रेफर किया जाएगा, उनके आगे पीसीआर दस्ता चलेगा। रेफर किए गए मरीज के इलाज से कोई अस्पताल इन्कार करेगा, तो नेशनल डिजास्टर एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई करेंगे।

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