लुधियाना में निगम ने नई सड़कें बनाने से ज्यादा पैचवर्क पर किया खर्च, विजिलेंस ने चारों जोनों के एसई रिकार्ड समेत चंडीगढ़ बुलाए

लुधियाना निगम ने वर्ष 2015 से 2020 तक इन पांच सालों में नई सड़कों के निर्माण पर 176.95 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि सड़कों पर पैचवर्क करने में 212.33 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। पैचवर्क पर भारी भरकम राशि खर्च करने की बात किसी को हजम नहीं हो रही।

Vinay KumarMon, 13 Sep 2021 06:43 AM (IST)
लुधियाना में निगम ने पांच सालों में नई सड़कों के निर्माण से ज्यादा खर्च सड़कों पर पैचवर्क लगाने में किया।

लुधियाना [राजेश भट्ट]। लुधियाना में नगर निगम ने पांच सालों में नई सड़कों के निर्माण से ज्यादा खर्च सड़कों पर पैचवर्क लगाने में कर दिया। निगम ने वर्ष 2015 से 2020 तक इन पांच सालों में नई सड़कों के निर्माण पर 176.95 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि सड़कों पर पैचवर्क करने में 212.33 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। पैचवर्क पर भारी भरकम राशि खर्च करने की बात किसी को हजम नहीं हो रही। वहीं निगम की बीएंडआर ब्रांच के अफसरों ने पैचवर्क का हिसाब भी मेंटेन नहीं किया। मामला स्थानीय निकाय विभाग के चीफ विजिलेंस अफसर के पास पहुंचा तो उन्होंने चारों जोनों के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों को 15 सितंबर को चंडीगढ़ तलब कर लिया है।

दैनिक जागरण ने पैचवर्क पर 212 करोड़ रुपये खर्च करने का मामला उठाया था। दरअसल इस मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल ने इस मामले में निगम से पैचवर्क का रिकार्ड मांगा था जो कि निगम ने देने से इंकार कर दिया और उसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत चीफ विजिलेंस अफसर को की। रोहित सभ्रवाल ने बताया कि आरटीआइ से मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने पांच सालों में नई सड़क बनाने की तुलना में पैचवर्क पर 35.38 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए।

उन्होंने बताया कि नगर निगम अफसरों ने पैचवर्क पर जो फंड खर्च किया है, उसका उनके पास कोई रिकार्ड नहीं है। आरटीआई के जरिए अफसरों से पूछा गया था कि उन्होंने किस-किस सड़क पर पैचवर्क किया है और कितने गड्ढे भरे हैं, लेकिन निगम की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई और रिकार्ड उपलब्ध न होने की बात कही गई। मामले की शिकायत चीफ विजिलेंस अफसर को भेजी गई थी।

चीफ विजिलेंस अफसर को भी नहीं दिया रिकार्ड

चीफ विजिलेंस अफसर ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि चारों जोनों के बीएंडआर ब्रांच के अफसरों से पैचवर्क संबंधी रिकार्ड पेश करने को बार-बार कहा गया है। इसके बावजूद अफसरों ने रिकार्ड नहीं पेश किया है। इसलिए इस बार चारों एसई को व्यक्तिगत तौर पर पेश होना होगा। पत्र में उन्होंने कहा कि 2015 से 2020 तक नई बनी सड़कों व सड़कों की मरम्मत के पूरे रिकार्ड समेत अफसरों को भेजा जाए। अफसरों को सड़कों के निर्माण व मरम्मत के टेंडर, एस्टीमेट व एमबी साथ लाने होंगे।

सड़कों की मरम्मत पर साल दर साल हुआ खर्च

साल                 नई सड़कों पर खर्च                   सड़कों की मरम्मत पर खर्च

2015-16               22.66 करोड़                        55.38 करोड़

2016-17              71.75 करोड़                         79.30 करोड़

2017-18              36.30 करोड़                         27.96 करोड़

2018-19              23.28 करोड़                         22.11 करोड़

2019-20              22.95 करोड़                         27.50 करोड़

कुल                     176.95 करोड़                       212.33 करोड़

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