लुधियाना में पेश होगी हिंदू-सिख एकता की मिसाल, अनोखी गौशाला में छत पर लगेंगे सोलर पैनल

पंजाब के लुधियाना स्थित श्री गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासू) हाईटेक गौशाला बनने जा रही है। इस गौशाला की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। साथ ही गोबर से दीये व गमले तैयार किए जाएंगे।

Kamlesh BhattThu, 10 Jun 2021 09:01 AM (IST)
लुधियाना के गडवासू में बनेगी हाईटेक गौशाला। सांकेतिक फोटो

लुधियाना [आशा मेहता]। गौ माता की रक्षा के लिए हिंदुओं के साथ-साथ सिखों ने भी हमेशा विशेष महत्व दिया है। दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने गौ रक्षा के लिए ईश्वर से शक्ति मांगी थी। पंजाब में कई धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने बेसहारा गायों की रक्षा के लिए गौशालाएं स्थापित की हैं, लेकिन राज्य में पहली बार सिखों के दूसरे गुरु के नाम पर लुधियाना में खोली गई श्री गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासू) आधुनिक गौशाला बनाने जा रही है, जो अपनी तरह की पहली गौशाला होगी।

इस गौशाला का निर्माण तीन माह में पूरा होगा। एक करोड़ सात लाख की लागत से दो एकड़ जमीन पर बनने वाली इस गौशाला में 100 गायों की सेवा की जाएगी। इनके गोबर से दीये, गमले, अगरबत्ती, हवन सामग्री व अन्य उत्पाद और गौमूत्र से अर्क बनाया जाएगा। इनके लिए मशीनें खरीदने का काम शुरू हो गया है। गौशाला के चारों ओर गौ परिक्रमा मार्ग भी बनेगा। छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे बिजली पैदा होगी।

गौशाला में इसी से बिजली आपूर्ति होगी। गोबर से गोबर गैस व जैविक खाद बनाई जाएगी, जिससे आर्गेनिक फार्मिग होगी। इसके लिए करीब पौना एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसके अलावा यहां मुर्गियां भी पाली जाएंगी, जिनकी खुराक मुख्य तौर पर गोबर पर पलने वाले कीड़ों पर निर्भर होगी।

यूनिवर्सिटी के वीसी डा. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इस आधुनिक गौशाला का नक्शा तैयार हो चुका है। उन्हें यह आइडिया काफी पहले आया था, क्योंकि पंजाब में बेसहारा पशुओं की बड़ी समस्या है। इसे माडल गौशाला के रूप में विकसित किया जाएगा। डा. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गौशाला में धान की पराली, जिसे हर साल आग के हवाले कर दिया जाता है, उसे गायों को दिया जाएगा। पराली में पौष्टिकता की मात्रा बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। मक्की के अवशेष का चारा बनाने की विधि भी सिखाई जाएगी।

चारे की कटाई, ढुलाई में करेंगे बैलों का इस्तेमाल

वीसी डा. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गौशाला में टै्रक्टर या किसी प्रकार के इंजन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। चारा काटने की मशीन भी पशुओं के माध्यम से चलाई जाएगी। चारे व फीड आदि की ढुलाई के लिए बैल का इस्तेमाल करेंगे।

हर गाय की होगी डिजीज टेस्टिंग

यहां लाई जाने वाली हर गाय की डिजीज टेस्टिंग होगी। बीमार गायों को अलग व स्वस्थ गायों को अलग रखा जाएगा। हर गाय की टैगिंग की जाएगी, जिसमें उसका पूरा रिकार्ड होगा कि इसे कौन सी बीमारी है। ऐसी बेसहारा गायों, जिनकी बच्चेदानी ठीक होगी, उनसे सेरोगेसी की मदद से नस्ल सुधार का काम किया जाएगा।

सिख पंथ में गौ रक्षा का खास महत्व

लुधियाना के लेखक जतिंदर पाल सिंह अपनी किताब में लिखते हैं कि गोबिंद का अर्थ ही गौ का रक्षक होता है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने उग्गारदंती में गायों की रक्षा के लिए ईश्वर से शक्ति देने का आह्वान किया, ताकि वह दुनिया में गायों की सुरक्षा कर सकें। गुरु गोबिंद सिंह जी ने लिखा है, 'ज्यही देह आज्ञा तुरकन गह खपाऊं, गऊ घात का दोख जग सिऊ मिटाऊं। यही आस पूरन तुम करो हमारी, मिटे कष्ट गऊन छुटे खेद भारी। यही बेनती खास हमरी सुनिजे, असुर मारकर रक्ष गऊन करिजे।'

इसमें गुरु गोबिंद सिंह गौ हत्या के पाप को पूरी दुनिया से खत्म करने की बात कर रहे हैं। एक अन्य लेखक एएस खालसा लिखते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के इस लेखन को पढ़ा होगा, तभी उन्होंने अपने राज में गौ वध के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। पटना में भी गाय घाट का संबंध श्री गुरु नानक देव जी से है।

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