रक्तदान है महादान, पुरुषों के मुकाबले काफी कम है महिलाओं का योगदान Jalandhar News

जालंधर [जगदीश कुमार]। महिलाओं ने हर सेना, आंतरिक्ष, सीमा पर देश की रखवाली, हवाई जहाज उड़ाने जैसे सभी कार्यों में पुरुषों की बराबरी कर मोर्चा फतेह किया है। दूसरी ओर जिंदगी और मौत में जूझ रहे मरीजों को खूनदान कर महादान का पुण्य कमाने में महिलाएं पिछड़ गई है। खूनदान करने में करीब 20-25 फीसद महिलाएं योगदान दे रही है। डाक्टर व स्वयं सेवी संगठन इसे महिलाओं में खून की कमी और जागरूकता का अभाव बता रहे हैं। वहीं, सेहत विभाग महादान को लेकर महिलाओं को आगे लाने में फिसिड्डी साबित हो रहा है।


खूनदान में महिलाओं में 20-25 फीसदी भागीदारी

सिविल अस्पताल के ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारी डाॅ. गगनदीप सिंह का कहना है कि जिले में सरकारी और निजी 17 ब्लड बैंक है। इनमें साल भर में लगभग 49400 यूनिट खून की खपत होती है। इनमें 70 से 80 फीसद खून स्वैच्चिक रक्तदान के माध्यम से आता है। 20-30 फीसदी खून रिप्लेसमेंट से पूरा होता है। इनमें जिले में लगने वाले खूनदान कैंपों में 20-25 फीसद के करीब महिलाएं खूनदान देती है। धार्मिक स्थलों व समारोहों में लगने वाले खूनदान कैंपों में महिला रक्तदानियों की दर 30 से 40 फीसद तक पहुंच जाती है। लड़कियों के कालेजों में भी यूथ में थोड़ा उत्साह बढ़ रहा है, परंतु उनमें खूनदान को लेकर डर निकालने की जरूरत है। हालांकि को एजुकेशन कालेजों व यूनिवर्सिटियों में लड़कियों के मुकाबले लड़कों की संख्या ज्यादा होती है।


ज्यादातर महिलाओं में खून की कमी

55 बार खूनदान कर चुकी पहल संस्था की कार्यकारी प्रधान हरविंदर कौर कहती है कि उन्हें खूनदान करने की प्रेरणा पति प्रो. लखबीर सिंह से मिली थी। शादी के बाद उन्होंने हर खुशी का मौका खूनदान कर मनाया। वह इमरजेंसी में भी मरीज को खून देने में पीछे नही हटती है। उनका मानना है कि 70 फीसद के करीब महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। वे खूनदान करने के समय एचबी कम होने की वजह से महादान की दौड़ से बाहर हो जाती है। वहीं, उनमें मन में डर भी है कि खूनदान से उनमें कमजोरी आती है। महावारी की वजह से भी उन्हें खून की कमी का डर सताता रहता है। उन्होंने कहा कि एक बार खूनदान करने के बाद महिलाओं में सारे डर दूर जाते है। खूनदान से शरीर में किसी भी प्रकार की कमी नही होती है।

जागरूकता के अभाव से महिलाएं महादान में पिछड़ी  

130 बार खूनदान कर चुके जतिंदर सोनी का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं खूनदान करने में पुरुषों के मुकाबले पिछड़ी हुई हैं। पिछले महीने सेहत विभाग की ओर से बरनाला में करवाएं गए राज्य स्तरीय समारोह में सबसे ज्यादा खूनदान करने वालों बराबरी पर रखा गया। समारोह में 11 पुरुषों व 11 महिलाओं को सम्मानित किया गया। पुरुष साल में चार बार और महिलाएं तीन बार खूनदान कर सकती है। खूनदान को लेकर शरीर पर दुष्प्रभावों को लेकर महिलाओं में भ्रांतियों को दूर करने के बाद महादान में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

महिलाएं खुद को रखे फिट और करें खूनदान

सिविल सर्जन डाॅ. गुरिंदर कौर चावला का कहना है कि खूनदान करने में किसी भी तरह के डर कोई बात नही है। वह स्वयं खूनदान करती हैं। खूनदान के लिए महिलाओं को खुद को फिट रखने की जरूरत है। घातक बीमारियों से जूझ रही महिलाओं को खूनदान नहीं करना चाहिए। स्कूलों व कालेजों में लड़के व लड़कियों को खूनदान के लिए जागरूक करने के लिए कार्यक्रम करवाएं जाएंगे।
 


क्या हैं फायदे ( डॉ. एचएस लांबा, प्रभारी, ब्लड बैंक पिम्स)

ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा है। एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि यह शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थों को बाहर निकालता है। ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है। जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है।
  क्यो जरूरी है खूनदान
ब्लड डोनेट कर एक शख्स दूसरे शख्स की जान बचा सकता है। ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और न ही इसका कोई विकल्प है। हमारे शरीर में कुल वजन का 7 फीसदी हिस्सा खून होता है। आंकड़ों के मुताबिक 25 फीसद से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।
  ब्लड डोनेट करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है। ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, सिफलिस व मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है। ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है। 18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो, वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं। खूनदान करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी दूर हो सकती है। ऐसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। खूनदान करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए। खूनदान करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। खूनदान करने से पहले पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के सही व स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

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