स्वर्णिम विजय वर्षः शौर्यांजलि यात्रा का पठानकोट पहुंचने पर स्वागत, 1971 युद्ध के शहीदों के परिवारों को किया सम्मानित

1971 के भारत-पाक युद्ध में जीत के 50 वर्ष पूरे होने पर इस वर्ष को स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। भारतीय सेना भी स्वर्णिम विजय मशाल लेकर भारत वर्ष में भ्रमण करते हुए 1971 के युद्ध में शहीद हुए।

Vinay KumarSat, 18 Sep 2021 12:59 PM (IST)
शौर्यांजलि यात्रा का पठानकोट पहुंचने पर स्वागत किया गया।

जागरण संवाददाता, पठानकोट: 1971 के भारत-पाक युद्ध में जीत के 50 वर्ष पूरे होने पर इस वर्ष को स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। भारतीय सेना भी स्वर्णिम विजय मशाल लेकर भारत वर्ष में भ्रमण करते हुए 1971 के युद्ध में शहीद हुए जवानों के परिजनों व युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों से भेंट कर उनका मनोबल बढ़ा रही है। वहीं कुछ ऐसे देशभक्त लोग भी हैं, जो अपने स्तर पर 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में देश भर में शौर्यांजलि यात्रा निकालकर शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।

इसी के तहत समीर सेवा संस्थान संगठन की ओर से शौर्यांजलि यात्रा निकाली जा रही है। संगठन के संयोजक संग्राम सिंह तोमर जो कि यूपी के बलिया जिले के करम्मर गांव के रहने वाले हैं और वो अब तक देशवासियों में देशभक्ति की अलख जगाने व देश के शहीदों व उनके परिजनों के सम्मान को बहाल रखने के लिए देश भर में छह यात्राएं निकाल लोगों को जागरूक कर चुके हैं। अब वह अपनी टीम के साथ 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में सातवीं शौर्यांजलि यात्रा पर निकले हैं। यात्रा के दौरान वे युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सम्मानित कर समाज में देशभक्ति की चेतना पैदा कर रहे हैं।

इसी कड़ी में यह शौर्यांजलि यात्रा स्थानीय मोहल्ला आनंदपुर टंकी के पास 1971 के भारत-पाक युद्घ में शहादत का जाम पीने वाले जिले के पहले शहीद सैनिक सिपाही मोहन सिंह चिब सेना मैडल की याद में बने स्मारक पर पहुंची। जहां शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के सदस्यों व शहीद परिवारों ने शौर्यांजलि यात्रा के संयोजक संग्राम सिंह तोमर व उनके साथ देव कुमार सिंह, अभय कुमार पांडे, तेज प्रकाश सिंह का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर परिषद के प्रेस सचिव बिट्टा काटल, वरिन्द्र सहदेव, पारस कश्यप, अक्षय चिब, रामा खुशदिल, पूनम सहदेव, कनिका चिब, रवि कुमार आदि उपस्थित थे।

20 राज्यों व 40 हजार किलोमीटर की शौर्यांजलि यात्रा का दिल्ली में होगा समापन : तोमर

शौर्यांजलि यात्रा के संयोजक संग्राम सिंह तोमर बताया कि स्वर्णिम विजय वर्ष को समर्पित यह यात्रा एक सितंबर को उत्तराखंड के परमार्थ निकेतन ऋषिकेश से शुरू हुई, जो रुड़की, हरिद्वार, देहरादून, गजियाबाद, हरियाणा के पलवल, सिरसा, हिसार से होते हुए पंजाब के बठिंडा, अमृतसर, बटाला, धारीवाल, गुरदासपुर, दीनानगर से होते हुए आज पठानकोट पहुंची है। इसके बाद यह यात्रा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू ऐसे 20 राज्यों से होते हुए 40 हजार किलोमीटर का सफर तय कर साढ़े तीन महीनों के बाद 16 दिसंबर जिसे इस युद्ध के विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, को दिल्ली के कांस्टीच्यूशनल क्लब में पहुंचेगी। जहां इस यात्रा के समापन समारोह में देश भर से शहीदों के परिवार, सेना के जवान व पूर्व सैनिक शामिल होकर शहीदों परिवारों का सम्मान करेंगे।

 

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