यहां बारिश होते ही मुलाजिमों के चेहरे पर खिच जाती है चिता की लकीरें

जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग की इमातर की हालत खस्ता हो गई है।

JagranFri, 24 Sep 2021 06:05 AM (IST)
यहां बारिश होते ही मुलाजिमों के चेहरे पर खिच जाती है चिता की लकीरें

जागरण संवाददाता, जालंधर

गर्मी व उमस के बीच बारिश की बूंदें मुलाजिमों को राहत नहीं देती, बल्कि उनके माथे पर चिता की लकीरें खिच जाती हैं। कारण, बारिश के कारण उन्हें आफिस के पंखे बंद करने पड़ते हैं। ऐसे हालात हैं जिला प्रशासकीय कांप्लेक्स में चलाए जा रहे जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग की इमारत के। यह इमारत इन दिनों असुरक्षित हो चुकी है। विभाग में तैनात मुलाजिमों के लिए बारिश मुसीबत बनकर बरसती है।

इमारत की छत जगह-जगह से लीक करती है, जिस कारण छत पर लटके पंखे मजबूरन बंद करने पड़ते हैं। कारण, छतों से टपक रहा बारिश का पानी पंखों में जाकर करंट पैदा करेगा। इसके साथ ही पंखें जलने का डर बना रहता है। भले ही उन्हें गर्मी के बीच पसीने से तरबतर क्यों न होने पड़े। छत की खस्ता हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बारिश बंद होने के बाद भी इमारत की छत से पानी की लीकेज कई घंटों तक यथावत रहती है। बारिश के दिनों में जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग के आफिस के प्रवेश द्वार पर ही खाली बाल्टियां रखनी पड़ती है। इसके बाद आफिस की अलमारियों से लेकर बेंच व कुर्सियों से लेकर जगह-जगह खाली बाल्टियां रखी जाती है्र, जिसमें बारिश का पानी एकत्रित करके बाहर फेंका जाता है। उधर, जिला नाजर राकेश कुमार बताते हैं कि जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग की स्थिति को लेकर पूरी जानकारी नहीं है। कारण, हाल ही में इस पद पर ज्वाइन किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस इमारत के सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे। रिकार्ड रूम के अभाव में केबिन में रखी फाइलें

जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग की इमारत में रिकार्ड रूम नहीं है। यही कारण है कि यहां पर मुलाजिमों के लिए बनाए गए केबिन में ही रिकार्ड रखा गया है। इन फाइलों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। नेता आते हैं केवल काम करवाने

जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग के आफिस में लोगों की पेंशन लगवाने के लिए जिले भर से विभिन्न पार्टियों के नेता पहुंचते हैं। विडंबना यह है कि उन्हें इस इमारत की खस्ता हालत कभी नजर नहीं आई। वहीं, पेंशन संबंधी काम करवाने के लिए गांव धीना से आए जसपाल सिंह बताते हैं कि आफिस के पंखें बंद होने के कारण अधिक समय तक खड़े रहना संभव नहीं है। ऐसे में मुलाजिमों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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