परंपराः मिट्टी से ‘फौलाद’ उपजाते हैं जालंधर के अखाड़े, बने मेहनत और अनुशासन की मिसाल

जालंधर, [शाम सहगल]। मिट्टी से जुड़ाव व प्रकृति के नजदीक रखने वाले अखाड़ों की संख्या भले ही आज कम हो गई है लेकिन इस विरासत ने हमें बहुत कुछ दिया है। मेहनत ही नहीं अनुशासन की भी है मिसाल हैं अखाड़े। आधुनिकता की दौड़ में भले ही जिम व फिटनेस सेंटर बढ़ रहे हैं लेकिन आज भी शहर में बरकरार है पुरातन अखाड़ों का अस्तित्व, जिनमें अब कई नवीनतम बदलाव कल लिए गए हैं।

रुस्तम-ए-हिंद दारा सिंह, रुस्तम-ए-जमाना गामा पहलवान, सहित कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने यह सम्मान किसी जिम में एक्सरसाइज करके या स्टेरॉयड से कृत्रिम रूप से शरीर को फौलादी दिखाकर हासिल नहीं किया है। बल्कि दिन रात मिट्टी के साथ मिट्टी होकर ये ‘फौलादी सम्मान’ प्राप्त किए हैं। यही कारण है कि आधुनिकता की दौड़ में जगह-जगह खुल चुके जिम और फिटनेस सेंटर के बावजूद अखाड़ों का अस्तित्व बरकरार है। यह बात और है कि यहां पर कसरत करने वालों की संख्या में कुछ कमी आई है।

जालंधर स्थित नाथा की बगीची में पहलवाली से पहले अखाड़ा तैयार करते हुए पहलवान।

अखाड़ा बनाम जिम 

दरअसल 70 के दशक में शारीरिक कसरत के लिए केवल अखाड़े ही एक मात्र माध्यम थे। 90 के दशक में जिम के रूप में ऐसे एक्सरसाइज सेंटर अस्तित्व में आए जहां पर मशीनों के साथ कसरत करने की परंपरा शुरू हुई। इन में अंतर यह है कि अखाड़े में कसरत करने वाले प्राकृतिक वातावरण में, खुली हवा में मिट्टी के साथ मिट्टी होते हैं, यानी मिट्टी में कुश्ती व अन्य व्यायाम करते हैं, तो आधुनिक सुविधाओं से लैस जिम में मिट्टी का एक कण भी प्रवेश नहीं कर सकता। वातानुकूलित जिम कल्चर शुद्ध रूप से आधुनिकता का पूरक है। जबकि, पारंपरिक अखाड़ों में कसरत की शुरुआत ही मिट्टी के बीच अखाड़ा खोदने से की जाती है।

स्वस्थ समाज की जगा रहे अलख 

इस बारे में अखाड़े के संचालक उस्ताद मंगल पहलवान बताते हैं स्वस्थ समाज के लिए कार्य करना भी मानवता की सेवा से कम नहीं है। इसके लिए इस 250 साल पुराने अखाड़े में बिना किसी फीस के हर तरह की सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। यहां तक कि अखाड़े में कसरत करने वाले इसी जगह पर स्नान करके भी जाते हैं। इसके लिए पानी की बेहतर व्यवस्था की गई है।

यह पहलवान यहां करते है कसरत

दीपक पहलवान, केशव पहलवान, पवन पहलवान, अमित कल्याण पहलवान, गोगा पहलवान, राकेश कुमार पहलवान, पारस मान पहलवान, विक्रम पहलवान, गोविंद पहलवान, अशोक पहलवान, रामू पहलवान, वासु पहलवान, धरती पहलवान।

100 वर्ष पुराने अखाड़े की कमान चौथी पीढ़ी के हाथ

सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में स्थित जेठूमल, ताराचंद प्राचीन ब्रह्म अखाड़े का इतिहास 100 वर्ष पुराना है। इसे जेठुमल परिवार की चौथी पीढ़ी इस समय चला रही है। अखाड़े के उस्ताद दर्शी पहलवान बताते हैं कि अखाड़े में रोजाना 100 से डेढ़ सौ युवक कसरत करने आ रहे हैं। उनका मकसद केवल बच्चों का बेहतर भविष्य और अच्छी सेहत है। उन्होंने कहा कि दादा जेठुमल व पिता ताराचंद ने उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा दी थी। इसके लिए सबसे बेहतर रास्ता यूथ को नशे से दूर कर बेहतर सेहत के लिए प्रेरित करना है। यही कारण है कि इसके लिए पैसा नहीं लिया जाता। अब उनका बेटा नरेंद्र कुमार भी इसी दिशा में कार्य कर रहा है।

250 वर्ष पुराने अखाड़े में आज भी जुटते हैं पहलवान

जेल रोड पर स्थित नाथा बगीची में अल्प सुबह कसरत करने वालों की आमद शुरू हो जाती है। पिछले 60 वर्षों से यहां पर कसरत करने के लिए आ रहे जेपी नगर निवासी सुरेंद्र सिंह बताते है कि उम्र के इस पड़ाव में उनके स्वास्थ्य का राज अखाड़े में रोजाना कसरत करना है। उन्होंने कहा कि तड़के उठकर अखाड़े में आना उनकी दिनचर्या में शिद्दत के साथ शामिल है। अखाड़े में की जाती हर कसरत शरीर को भीतर से मजबूत करती है। भले ही मुंगली घुमाना हो या फिर अखाड़ा खोदना हर काम शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। यही कारण है कि वह इस उम्र में भी बगीची आकर कसरत करना नहीं भूलते।

जेल रोड पर स्थित नाथा बगीची में मौजूद पहलवान व अन्य।

श्री देवी तालाब मंदिर के अखाड़े में कसरत करते हैं पूर्व विधायक

श्री देवी तालाब मंदिर स्थित जेठुमल, ताराचंद प्राचीन ब्रह्म अखाड़ा में पिछले लंबे अर्से से पूर्व विधायक केडी भंडारी तड़के कसरत करने आते हैं। खास बात यह है कि वह कई बार खुद अखाड़ा खोदते हुए मिट्टी में लथपथ होते हैं। वहीं रूटीन में वह यहीं पर आकर शरीर की अन्य कसरत पूरी करते हैं।

वार्षिक मुकाबलों में भी देशभर से जुटते हैं पहलवान

दर्शी पहलवान बताते हैं कि वैशाखी वाले दिन प्राचीन ब्रह्म अखाड़ा में कुश्ती मुकाबले करवाए जाते हैं। जिसमें देशभर से पहलवान अपनी प्रतिभा का जौहर दिखाते हैं। इसमें बेहतर परफॉर्म करने वालों को अखाड़ा की तरफ से सम्मानित किया जाता है।

 

 

 

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