प्लास्टिक के बर्तनों में खाना संतान सुख की राह में बन सकता है बाधा!

जागरण संवाददाता, जालंधर : प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना व प्लास्टिक के बर्तनों में खाना सेहत के लिए हानिकारक है। इससे स्तन व प्रोस्टेट का कैंसर होने के अलावा संतान सुख की राह में बाधा पैदा हो सकती है। यह बात रविवार को दिल्ली से आए डॉ. प्रणय घोष ने इंडियन फर्टिलिटी सोसायटी (आईएफएस) पंजाब चैप्टर की ओर से स्थानीय होटल में आयोजित सेमिनार के दौरान दी। चैप्टर सचिव डॉ. हरिंदर कौर ओबराय की प्रधानगी में उन्होंने बताया कि प्लास्टिक की बोतल व बर्तन इस्तेमाल करने से बिसफिनोल कैमिकल शरीर में जाने से हामरेंस को प्रभावित करते है। इसकी वजह से महिलाओं में प्लास्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ) की बीमारी की वजह से चेहरे पर अनचाहे बाल व मुहासे होने के अलावा माहवारी का साइकिल गड़बड़ा जाता है। एक सर्वे में अढ़ाई हजार के करीब लोगों के पेशाब के सैंपल चेक किए गए थे, उनमें से 95 फीसदी की रिपोर्ट में बिसफिनोल पाया गया था। इसकी वजह से संतान सुख के लिए परेशानियों से जूझना पड़ता है।

सेमिनार के दौरान डॉ. मीनू भनोट ने शुक्राणु, अंडे व भ्रूण फ्रीज करने के लिए यूनिट तैयार करने व डॉ. सर्बजीत सिंह इसकी नीतियों के विषय पर विचार व्यक्त किए। इसके अलावा चंडीगढ़ से डॉ. निर्मल भसीन व डॉ. हरिंदर कौर ओबराय ने भी संतान सुख में आने वाली बाधाओं को दूर करने के विषय पर जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. जैसमीन कौर दहिया, डॉ. सुकृति शर्मा, डॉ.गुरप्रीत कौर, डॉ. सुजाता शर्मा, डॉ. सुषमा चावला, डॉ. कुमुद पसरीचा, डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. अमिता शर्मा, डॉ. सुरजीत कौर, डॉ. अमरजीत सिंह, डॉ. एसपीएस विर्क, डॉ. एचके चीमा, डॉ. शालिनी पाल के अलावा संस्था की अन्य सदस्य व पदाधिकारी मौजूद थी।

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