Punjab Politics : शिअद व भाजपा नेताओं ने अपने मुंह से सिद्धू का नाम लेना किया बंद, अब ठोको ताली से कर रहे संबोधित

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने सियासी सफर के दौरान कई के नाम बिगाड़े। अब जब नवजोत सिंह सिद्धू इससे बाज नहीं आते तो दूसरे नेता कहां टलने वाले हैं। शिअद व भाजपा नेता अब सिद्धू को ठोको ताली से संबोधित कर रहे हैं।

Vinay KumarWed, 20 Oct 2021 12:53 PM (IST)
शिअद व भाजपा नेता सिद्धू को 'ठोको ताली' से कर रहे संबोधित।

अमृतसर [विपिन कुमार राणा]। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने सियासी सफर के दौरान कई के नाम बिगाड़े। किसी को मुन्नी, पप्पू का नाम देकर मशहूर कर दिया तो किसी को लंबू नाम देकर राजनीतिक मंचों से उसका खूब मजाक उड़ाया। अब जब नवजोत सिंह सिद्धू इससे बाज नहीं आते तो दूसरे नेता कहां टलने वाले हैं। पिछले काफी समय से सज रहे मंचों पर शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी अपने मुंह से नवजोत सिंह सिद्धू का नाम लेना बंद कर दिया है। जब भी सिद्धू से संबंधित कोई उदाहरण देनी होती है तो वह 'ठोको तालीÓ से ही उन्हें संबोधित करने लगे हैं। नवजोत सिद्धू की अपनी कर्मभूमि अमृतसर में तो यह नाम खूब चर्चा में चल रहा है। सियासी गलियारों में भी चटकारे लिए जा रहे हैं कि जो सबका नाम बिगाड़ता था, अब उसका ही नया नामकरण हो गया है।

नीली पगड़ी या फिर मौली

शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी में गठबंधन टूटने के बाद दोनों पार्टियों के नेताओं का एक-दूसरे में आना-जाना बना हुआ है। भाजपा जहां किसानों के मामलों को लेकर अभी तक सियासी गुमनामी में है, वहीं अकाली दल प्रमुखता से मैदान में डटा हुआ है और लगातार दूसरी पार्टी के नेताओं को अपने दल में शामिल करवाने का क्रम चला रहा है। हाल ही में भाजपा से अकाली दल में आए कुछ नेता एक जगह इक_े हुए। इस बीच मजाक में एक अकाली नेता ने कह दिया कि जल्द ही सभी को नीली पगड़ी पहना देनी है। इस पर चुटकी लेते हुए भाजपा से अकाली दल में आए नेताजी बोले, देखते हैं कि सभी नीली पगड़ी पहनते हैं या फिर आप सभी मौली बांधते हैं। यह सुनते ही आसपास खड़े नेता व वर्कर ठहाके लगाने लगेे। बोले, काम तो दोनों ही करने पड़ेंगे, तभी तो प्रदेश में सरकार बनेगी।

दशहरे में हावी सियासत

दशहरा यूं तो धार्मिक परंपराओं का वाहक है, पर सजे सियासी मंचों से सियासत न हो, यह कैसे संभव है। लंबे समय से शहर में सजने वाले दशहरे के ज्यादातर कार्यक्रम सियासी ही रहे हैं। इस बार चाहे मंचों की संख्या कम रही, पर सियासत पहले की तरह ही हुई। दशहरा कमेटी अमृतसर नार्थ और विजयदशमी दशहरा कमेटी उत्तरी हलका के मंच तो पूरी तरह सियासी रहे। दोनों मंचों से पर्व के जरिये अपनी सियासी ताकत दिखाने की कोशिश की गई। नेताओं ने मेला देखने आए लोगों से त्योहार का मजा लेने के साथ-साथ 2022 में उनका भी ध्यान रखने की अपील की। सत्ता के गलियारे में इनकी तो चर्चा रही ही। वहीं माता भद्रकाली के मैदान में सजने वाले दशहरा मेले के पिछले काफी समय से न लगने की भी शहर में इस बार चर्चा रही कि इस चुनावी बयार में आखिर मेले की रौनक क्यों चली गई है?

मौन में कांग्रेसियों का 'बोलव्रत'

लखीमपुर खीरी में हुई घटना के विरोध में कांग्रेसियों ने हाल ही में रेलवे स्टेशन के बाहर दो घंटे के लिए मौन व्रत रखा। इसमें कांग्रेसी पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत ङ्क्षसह सिद्धू के सामने हाजिरी भरने के लिए पहुंचे। लंबे इंतजार के बाद सिद्धू नहीं आए तो उन्हें मायूसी हाथ लगी। कुछ कांग्रेसियों को भनक लग गई थी कि सिद्धू आने वाले नहीं। यही वजह रही कि ज्यादातर नेता मुंह पर काली पट्टी बांधकर मोबाइल पर व्यस्त रहे। वे समय बिताते रहे और व्रत खत्म होने का इंतजार करने लगे। जब साफ हो गया कि सिद्धू नहीं आएंगे तो आधे समय में ही पंडाल खाली हो गया। जो वर्कर बैठे रहे, वह मोबाइल पर टाइम पास करते दिखे। वहां पास खड़े लोग उन्हें देख रहे थे। वे चुटकी लेते हुए कह रहे थे कि यह कांग्रेसियों का कैसा मौन है? ज्यादातर नेता तो फोन पर व्यस्त हैं।

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