जालंधर में भीख मांगने की आड़ में सक्रिय हुए गैंग, रेकी करने के बाद बच्चे दे रहे वारदातों को अंजाम

भिखारियों का यह गैंग इतना खतरनाक है कि बच्चों के अंग-भंग कर भीख मंगवाई जा रही है।
Publish Date:Tue, 29 Sep 2020 12:55 PM (IST) Author: Vikas_Kumar

जालंधर, [सुक्रांत]। शहर में भिखारियों के रूप में बड़े-बड़े गैंग सक्रिय हो चुके हैं। भीख मांगने की आड़े में अपराध लगातार बढ़ने लगा है। भिखारियों का यह गैंग छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को आगे रख कर काम कर रहा है और अपराध भी उन्हीं से करवा रहा है। कुछ समय पहले शहर में भिखारियों का एक ऐसा गैंग तैयार हुआ था जिसमें पांच से दस साल के बच्चे शामिल थे। कई बड़े अपराध करने वाले बच्चों को पुलिस ने काबू किया और पुलिस की सख्ती के चलते गैंग खत्म हो गया। अब फिर से शहर में भिखारियों का गैंग तैयार हो रहा है। बीते दिनों मिलाप चौक के पास से इनोवा गाड़ी से बैग चुराया गया था।

सीसीटीवी में दो बच्चे कार का शीशा तोड़ बैग निकालते कैद हुए थे। यह वही बच्चे हैं जो चौराहों पर भीख मांगते नजर आते हैं। भीख मांगते हुए रेकी करते हैं और जिस गाड़ी में सामान पड़ा हो, उसके बारे में अगले चौक पर खड़े साथियों को फोन पर सूचित कर देते हैं। इसके बाद उस गाड़ी का पीछा करते हैं और जिस जगह पर जाकर गाड़ी खड़ी होती है, वहां पर वारदात को अंजाम दे देते हैं। जहां से सामान चोरी होता है वहां से कुछ ही दूरी पर इस गैंग का सरगना मौजद होता है जो चोरी किया सामान लेकर गायब हो जाता है और बच्चे फिर से चौराहों पर जाकर खड़े हो भीख मांगने लगते हैं।

भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बढ़ रहे जेब कतरने के मामले

भीख मांगने वाले बच्चों से जेब कतरने का काम भी सिखाया जाता है और भीड़ भाड़ वाली जगह पर बच्चों को भेज कर चोरी करवाई जाती है। ऐसा इसलिए कि बच्चे होने के चलते जल्दी इन पर शक नहीं जाता और पकड़े जाने पर बच्चे होने की वजह से कार्रवाई भी नहीं होती। हाल ही में कांग्रेसी की ट्रैक्टर रैली में जिला यूथ कांग्रेस प्रधान की जेब कट गई थी। यह भी इसी गैंग का काम था। भीख मांगने वाले बच्चों को घरों में भीख मांगने के लिए भेजकर रैकी करवाई जाती है और फिर अमीर घरों में लूटपाट जैसी वारदात को अंजाम दिया जाता है।

अंग-भंग कर मंगवाई जाती है भीख

भिखारियों का यह गैंग इतना खतरनाक है कि जो बच्चे अपराध के रास्ते पर नहीं चलते, उनके अंग-भंग कर भीख मंगवाई जा रही है। कुछ अपराधी किस्म के लोग दूसरे राज्यों से बच्चे अगवा करके या फिर खरीदकर उनके हाथ पैर काट देते हैं और फिर भीख मंगवाने का काम शुरू कर देते हैं। कई बच्चों को बिना अंग भंग किए ही पट्टियां बांधकर चौराहों पर बिठा कर भीख मंगवाई जाती है। प्रशासन व पुलिस को इन मासूम बच्चों के मामले की भी जांच करने की सख्त जरूरत है। आखिरकार इन बच्चों को भिखारियों के गैंग कहां से लेकर आ रहे हैं।

 

भीख मांगने वालों पर लगी है रोक, गठित हुई थी स्पेशल फोर्स

कुछ समय पहले शहर के पूर्व डीसी वरिंदर शर्मा ने भिखारियों को पकड़ने के लिए स्पेशल फोर्स का गठन किया था। इस फोर्स के कर्मचारियों का काम शहर में भीख मांग रहे भिखारियों को पकड़ना और उनके पुनर्वास का यत्न करना था। जिला प्रशासन के नियमों के मुताबिक बार-बार भीख मांगते पकड़े जाने वाले व्यक्ति को तीन साल और किसी बच्चे से भीख मंगवाने वाले को पांच साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। लेकिन आज तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है, जिससे जिला प्रशासन की इस टीम के काम पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

 

भिखारियों पर रोक लगाना जिला प्रशासन का काम है और पुलिस से जो भी मदद मांगी जाती है वो दी जाती है। अपराध को रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह से तैयार है। इस मामले की पूरी जांच करवाई जाएगी। यदि कोई भी भीख मांगने की आड़ में बच्चों को अपराध के रास्ते पर ले जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही इस मामले की जांच के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

गुरमीत सिंह, डीसीपी।

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