देश के लिए दो जंग जीतने वाले सूबेदार मेजर का डाक्टर ने किया बुरा हाल, न्याय के लिए सेनाध्यक्ष को लिखा पत्र

रि. सूबेदार मेजर बसंत सिंह ने बताया कि एक डाक्टर ने नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया है। उसने प्रोस्टेट सर्जरी के दौरान उनके मूत्र मार्ग का गलत आपरेशन कर दिया था। उन्होंने अपने इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च किए पर ठीक नहीं हुए।

Pankaj DwivediMon, 18 Oct 2021 03:56 PM (IST)
रिटायर्ड सूबेदार मेजर बसंत सिंह की फाइल फोटो।

संवाद सहयोगी, कलानौर (गुरदासपुर)। जवानी के अनमोल दिनों में देश की खातिर जान की परवाह किए बिना दो युद्ध जीतने में अहम योगदान डालने वाले सूबेदार मेजर बसंत सिंह बुढ़ापे में न्याय पाने के लिए हर कदम पर ठोकर खा रहे हैं। सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर बसंत सिंह ने बताया कि वह 1963 में देश की सेवा के लिए सेना की तोपखाने रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। इस दौरान उन्होंने 1965 भारत-पाक युद्ध में नौशहरा झंगर सेक्टर और वर्ष 1971 के युद्ध में अटारी सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। सूबेदार मेजर बसंत सिंह ने बताया कि उन्होंने देश के लिए दो युद्ध जीते थे, लेकिन बुढ़ापे में उनके साथ हुई बेइंसाफी के लिए न्याय के लिए वे हर कदम पर ठोकर खा रहे हैं। उन्होंने अपनी दुखद कहानी सुनाई कि उन्हें एक डाक्टर ने नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया है। उसने प्रोस्टेट सर्जरी के दौरान उनके मूत्र मार्ग का गलत आपरेशन कर दिया था। उन्होंने अपने इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च किए पर ठीक नहीं हुए। गलत आपरेशन के कारण वे जीवन की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने में असमर्थ हैं।

उन्होंने कहा कि गलत आपरेशन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ उन्होंने मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, काउंसिल ऑफ यूरोलॉजिस्ट, सेनाध्यक्ष, पंजाब के मुख्यमंत्री और पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री को न्याय के लिए पत्र लिखा है। बावजूद इसके उन्हें न्याय नहीं मिला है। सूबेदार मेजर बसंत सिंह ने कहा कि उनका मूत्र मार्ग प्राकृतिक रूप से डिस्चार्ज न होने के कारण वह पेट से सीधे डाली गई पाइप के माध्यम से बाथरूम करने को मजबूर है। उन्होंने युद्ध लड़ने वाले सैनिकों की गरिमा को बनाए रखा जाना चाहिए। 

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