Retreat Ceremany : अटारी वाघा बार्डर पर फिर शुरू हाेगी नियमित रिट्रीट सेरेमनी, जानें कितने दर्शक रह सकते हैं मौजूद

Attari Wagah Border अटारी वाघा बार्डर पर नियमित रिट्रीट सेरेमनी जल्‍द ही शुरू होगी। कोरोना और भारत-पाकिस्‍तान के बीच तनाव के कारण यह काफी समय से बंद थी। इसमें अब दर्शकों की संख्‍या सीमित होगी और करीब 300 लोग ही इस दौरान मौजूद रह पाएंगे।

Sunil Kumar JhaFri, 17 Sep 2021 12:24 PM (IST)
अटारी वाघा बार्डर पर फिर से नियमित रिट्रीट सेरेमनी शुरू होगी। (फाइल फोटो)

अमृतसर, जेएनएन। Retreat Ceremony on Attari Wagah Border: भारत-पाकिस्‍तान के अटारी वाघा बार्डर पर नियमित रिट्रीट सेरेमनी फिर शुरू होगी। ज्‍वाइंट चेक पोस्ट अटारी फिर से रिट्रीट सेरेमनी शुरू करने का आज फैसला किया गया। कोरोना के चलते इस दौरान 300 दर्शकों के साथ ही इसकी शुरुआत होगी। रिट्रीट सेरेमनी की सेरेमनी का समय शाम साढ़े पांच बजे का होगा। 

20 मार्च 2020 से रिट्रीट सेरेमनी सेरेमनी में आम लोगों की मौजूदगी को बंद कर दिया गया था। दोबारा से रिट्रीट सेरेमनी शुरू करने को लेकर मीटिंग हुई। इसके लिए नियम तय किए गए कि किस तरह से दर्शकों की इस दौरान एंट्री होगी।

 

अटारी बार्डर पर रिट्रीट सेरेमनी के दौरान ऐसा नजारा दिखता था। (फाइल फोटो)

बता दे कि ज्‍वाइंट चेक पोस्ट अटारी पर बनी हुई दर्शन दीर्घा में 25 हजार के लगभग दर्शको के बैठने की व्यवस्था है। पूर्व की अगर बात करें तो हर रोज 15 से 20 हजार दर्शक रिट्रीट सेरेमनी देखने के लिए जाते थे। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बड़ी बेसब्री से इसके शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। पर्यटकों की एंट्री के लिए क्या प्रबंध रहेगा, इसे लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है, ताकि वहां भीड़ इकट्ठी न हो।

अटारी वाघा बार्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में ऐसे उमड़ते थे दर्शक। (फाइल फोटो)

बता दें कि अटारी वाघा बार्डर पर रिट्रीट सेरेमनी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा है। इसे देखने देशभर से सैलानी आते रहे हैं। स्‍वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। इस दौरान माहौल बेहद जा‍ेशीला और देशभक्तिपूर्ण हाे जाता है। लोग रिट्रीट सेरेमनी में भाग ले रहे जवानों के साथ वंदे मातरम व भारत माता की जय के नारे लगाते हैं। हाथों में तिरंगा लहराते लोग जवानों के जोश को दोगुना कर देते हैं।

अटारी वाघा बार्डर पर बी‍टिंग रिट्रीट सेरेमेनी की शुरूआत 1959 में हुई थी। इसके बाद से कुछ अवसरों को छोड़कर यह परंपरा लगातार जारी रही है। बार्डर पर हलचल और पाकिस्‍तान से तनाव के कारण कई अवसरों पर इसे रोका गया, लेकिन बाद में इसे बहाल कर दिया गया।

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