अक्टूबर में 3 दिन फिर से चक्का जाम, पंजाब रोडवेज कांट्रेक्ट वर्कर्स ने की हड़ताल की घोषणा

जालंधर के शहीद-ए-आजम भगत सिंह इंटरस्टेट बस टर्मिनल पर धरना देते हुए यूनियन की तरफ से घोषणा की गई है कि 11 12 एवं 13 अक्टूबर को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी। 12 अक्टूबर को नवनियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की रिहाइश के आगे धरना दिया जाएगा।

Pankaj DwivediFri, 24 Sep 2021 10:55 AM (IST)
पंजाब रोडवेज अनुबंधित कर्मचारी पक्का किए जाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। सांकेतिक चित्र।

जागरण संवाददाता, जालंधर। पंजाब में बस यात्रियों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कभी किसानों के प्रदर्शन तो कभी पंजाब रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल से लगातार बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। छह सितंबर के बाद अब एक बार फिर अनुबंधित कर्मचारी हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। पंजाब रोडवेज, पनबस पीआरटीसी कांट्रेक्ट मुलाजिम यूनियन ने पक्का नहीं किए जाने पर अक्टूबर में 3 दिन के लिए प्रदेश भर में सरकारी बसों का चक्का जाम करने की घोषणा कर दी है। जालंधर के शहीद-ए-आजम भगत सिंह इंटरस्टेट बस टर्मिनल पर धरना देते हुए यूनियन की तरफ से घोषणा की गई है कि 11 12 एवं 13 अक्टूबर को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी।

12 की नए सीएम चन्नी के आवास के आगे धरना

12 अक्टूबर को नवनियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की रिहाइश के आगे धरना दिया जाएगा और राज्य स्तरीय रोष रैली निकाली जाएगी। इससे पहले, मुलाजिमों ने  27 सितंबर को किसान धरने में सम्मिलित होने की भी घोषणा की। 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह का जन्मदिन जिला स्तर पर मनाने के बाद वर्करों को लामबंद करने के लिए 6 अक्टूबर को प्रदेश भर में गेट रैलियां भी की जाएंगी। सितंबर महीने में ही 6 सितंबर से लेकर 9 दिन तक प्रदेश भर में सरकारी बसों का चक्का जाम रखा गया था।

छह सितंबर की हड़ताल का पड़ा था व्यापक असर

पंजाब रोडवेज कांट्रेक्ट वर्कर्स इससे पहले रेगुलर किए जाने और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर 6 सितंबर को हड़ताल पर गए थे। उस समय करीब 2000 बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी थी। 9 दिन तक चक्का जाम के बाद यूनियन के नेताओं से चंडीगढ़ में उच्चाधिकारियों ने बैठक की थी। इसमें उन्हें 28 सितंबर पक्का किए जाने और वेतन बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। अब सरकार बदलने के बाद पूरी प्रक्रिया लटक गई है। इसी कारण अनुबंधित कर्मचारी एक बार फिर से अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। 

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