यह है पंजाब की पहली ICU वाली गोशाला, 150 गायों को मिला नया जीवन; सर्जरी की भी है सुविधा

होशियारपुर के खान गेट में आइसीयू सुविधा वाली पंजाब की पहली गोशाला की स्थापना संभव हो सकी है। एक साल में ही आइसीयू में 150 गायों का इलाज हो चुका है। यहां ऐसी गायों को लाया जाता है जिनकी हालत काफी गंभीर होती है।

Vikas_KumarWed, 09 Jun 2021 01:08 PM (IST)
होशियारपुर के खान गेट में आइसीयू सुविधा वाली पंजाब की पहली गोशाला की स्थापना संभव हुई है।

होशियारपुर, [हजारी लाल]। आम तौर पर इंसानों को किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आइसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती किया जाता है, लेकिन पशुओं के लिए भी आइसीयू की सुविधा उपलब्ध हो और वो भी एक गोशाला में, तो हैरानी होना स्वाभाविक है। नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन गोभक्त एडवोकेट राकेश मरवाहा के प्रयास से होशियारपुर के खान गेट में आइसीयू सुविधा वाली पंजाब की पहली गोशाला की स्थापना संभव हो सकी है।

मरवाहा कहते हैं, सड़कों पर जख्मी होकर तड़पती गायों को देखकर दिल दुखी हो जाता था। इसके बाद तय किया कि गायों को उपचार की ऐसी सुविधा उपलब्ध करवाऊंगा, जिससे उन्हें नया जीवन दिया जा सके। करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के सामने गायों के लिए आइसीयू बनाने का प्रस्ताव रखा। मंत्री अरोड़ा ने फौरी तौर पर तीन लाख रुपये दे दिए। मरवाहा ने गो सेवा समिति के माध्यम से कुछ और रुपये इकट्ठा किए और करीब सात लाख से गोशाला में आइसीयू स्थापित हो गया।

आइसीयू में हो चुका 150 गायों का इलाज

एक साल में ही आइसीयू में 150 गायों का इलाज हो चुका है। यहां ऐसी गायों को लाया जाता है, जिनकी हालत काफी गंभीर होती है। मरवाहा के मुताबिक गो सेवा समिति ने जब कार्यभार संभाला था तो यहां महज 87 पशु थे। अब 350 के करीब पशु हैं। जख्मी व बीमार गायों को ठीक होते देख मन को बहुत सुकून मिलता है। कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने कहा कि इससे बड़ा पुण्य का काम कोई नहीं है। वे आगे भी गोशाला के लिए मदद करते रहेंगे।

जालीदार आइसीयू में लगे हैं पंखे

गोशाला में स्थापित आइसीयू में चारों तरफ से बारीक जाली लगाई गई है, ताकि कौवे व अन्य खतरनाक कीट अंदर न जा सकें। इसके अलावा पंखे भी लगाए गए हैं जिससे पशुओं को गर्मी से काफी राहत मिल रही है। यहां गायों के जख्मों की मरहम पट्टी के साथ हल्की सर्जरी भी की जाती है। गायों को पकड़ने के लिए यहां लोहे का शिकंजा भी है। दवा से लेकर चारा और पानी अंदर ही उपलब्ध करवाया जाता है। आइसीयू में सेवा करने वाले सीनियर वेटनरी अफसर डा. राजिंदर परिहार का कहना है कि गायों के जख्मी होने पर कौवे व कुत्ताें के नोचने से जख्म ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न होने पर गायों की मौत हो सकती है। ऐसे में उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है इसलिए गोशाला में यह आइसीयू बहुत कारगर साबित हो रहा है। इलाज के बाद वेटरनरी एक्सपर्ट रघुवीर व सेवादार हरमेश लाल गायों की देखभाल व सेवा करते हैं। गायों के इलाज, दवा व चारे का सारा खर्च गो सेवा समिति वहन करती है।

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