फरीदकोट में सोमवार को जरूरी होने पर ही आए अस्पताल, एनपीए के वरोध में सभी डाक्टर्स करेंगे मुकम्मल हड़ताल

पीसीएमएस के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. चंद्रशेखर कक्कड़ ने बताया कि सोमवार व मंगलवार को पूरी तरह से हड़ताल रहेगी। इस दौरान सिविल सर्जन दफ्तर का कामकाज भी रोका जाएगा। उन्होंने मरीजों से अपील की कि दो दिन वह डाक्टरों की मांगों का समर्थन करें।

Pankaj DwivediSun, 01 Aug 2021 01:53 PM (IST)
पंजाब में एनपीए का विरोध कर रहे डॉक्टर्स की हड़ताल को 47 दिन हो गए हैं। सांकेतिक चित्र।

प्रदीप कुमार सिंह, फरीदकोट। नान प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) बहाली की मांग पर अड़े डाक्टर व सरकार की जिद के बीच मरीज पिस रहे हैं। मरीजों की न तो डाक्टर सुन रहे हैं और न ही डाक्टरों की मांग प्रदेश सरकार पूरी कर रही है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए हड़ताली डाक्टर्स सोमवार को पूरी तरह से इमरजेंसी को छोड़कर सभी सेवाएं ठप करेंगे। सिविल सर्जन दफ्तर का भी काम कामकाज बाधित करेंगे।

सेहत विभाग के साथ ही मेडिकल कालेज अस्पताल के डाक्टर्स भी सोमवार को पूरी तरह से हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान मेडिकल कालेज अस्पताल में भी केवल एमरजेंसी वार्ड में ही मरीजों को देखा जाएगा। डाक्टरों की हड़ताल से सोमवार को उन सभी मरीजों को परेशानी होगी जो कि ओपीडी में डाक्टर्स को दिखाने आने वाले हैं। 

पीसीएमएस के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. चंद्रशेखर कक्कड़ ने बताया कि सोमवार व मंगलवार को पूरी तरह से हड़ताल रहेगी। इस दौरान सिविल सर्जन दफ्तर का कामकाज भी रोका जाएगा। उन्होंने मरीजों से अपील की कि दो दिन वह डाक्टरों की मांगों का समर्थन करें। यदि बहुत जरूरी हो तो वह इमरजेंसी में आकर डाक्टर्स को दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार दो दिनों में उन लोगों के एनपीए में की गई काटौती को बहाल नहीं करती है तो बुधवार से मरीजों के हित में पैरलर ओेपीडी चलाई जाएगी, परंतु सरकार के सभी प्रोग्रामों का बहिष्कार जारी रहेगा।

एनपीए कटौती के बिना डाक्टरों काे सरकार दे रही है वेतन   

पिछले 47 दिनों से प्रदेश सरकार के डाक्टर हड़ताल पर हैं। डाक्टरों के हड़ताल पर जाने का कारण उनके एनपीए यानी नान प्रैक्टिस एलाउंस में सरकार द्वारा की गई गई कटौती है। डाक्टर्स एनपीए में की गई कटौती वापस लिए जाने पर अड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार ने जून और जुलाई का जो वेतन जारी किया गया है, वह पुरानी एनपीए पालसी के तहत जारी किया गया है। इसमें डाक्टरों कोई नुकसान नहीं हुआ है। डाक्टरों को डर है कि यदि सरकार नई एनपीए घोषणा लागू करती है तो उन्हें हजारों रुपये का नुकसान होगा।

1989 में डाक्टरों की अब तक सबसे लंबी चली थी हड़ताल-

क्लास टू से क्लास वन में शामिल किए जाने की मांग को लेकर पंजाब सरकार के डाक्टरों की अब तक के इतिहास में सबसे लंबी हड़ताल 1989 में चली थी, यह हड़ताल 90 दिनों की थी, जिसके तहत पूरे प्रदेश में सरकारी डाक्टरों ने कामकाज ठप रखा था। चुनावी साल में एक बार फिर डाक्टर्स अपनी मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। अब उनकी हड़ताल को 47 दिन हो गए हैं। 

 

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