Punjab Assembly Election 2022: अपने गढ़ में रहकर ही लड़ेंगे दिग्गज, कैप्टन, सुखबीर और सिद्धू ने स्पष्ट की अपनी चुनावी येाजना

Punjab Assembly Election 2022 पंजाब में चुनाव को लेकर दिग्गजों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह नवजोत सिंह सिद्धू व सुखबीर सिंह बादल अपनी ही सीटों से चुनाव लड़ेंगे। प्रकाश सिंह बादल के चुनाव लड़ने पर अभी संशय है।

Kamlesh BhattSun, 21 Nov 2021 08:20 PM (IST)
कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू व सुखबीर बादल की फाइल फोटो।

नितिन उपमन्यु, जालंधर। चुनाव से पहले सियासी दिग्गज भले ही विरोधियों को उनके घर में जाकर ललकारते हों, लेकिन जब चुनाव लड़ने की बात आती है, तो सबको अपना गढ़ ही सुरक्षित लगता है। अगले वर्ष पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही होने वाला है। पंजाब की सियासत के दिग्गजों में शुमार कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और सुखबीर सिंह बादल ने अपनी आगामी चुनावी योजना स्पष्ट कर दी है। कैप्टन ने साफ कर दिया है कि वह पटियाला से ही चुनाव लड़ेंगे।

कैप्टन का कहना है कि पटियाला से उनके परिवार का रिश्ता 400 साल पुराना है। यह उनकी रियासत रही है। वह सिद्धू के लिए पटियाला नहीं छोड़ेंगे। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैप्टन कई बार कह चुके हैं कि वह सिद्धू को किसी भी स्थिति में जीतने नहीं देंगे। बीच में यह बात भी चली थी कि शायद सिद्धू को सबक सिखाने के लिए कैप्टन अमृतसर से चुनाव लड़ें, लेकिन उन्होंने पटियाला को ही चुना। वह इसी सीट से विधायक हैं।

कैप्टन ने कहा था कि सिद्धू के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार खड़ा करेंगे। इसके जवाब में नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डा. नवजोत कौर सिद्धू ने कैप्टन को अमृतसर ईस्ट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इस हलके से इस समय नवजोत सिंह सिद्धू विधायक हैं। कैप्टन के पटियाला से लड़ने का एक लाभ यह भी होगा कि उन्हें परनीत के वोट बैंक का लाभ भी मिलेगा। वहीं, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी अपनी सीट चमकौर साहिब से ही लड़ने के इच्छुक हैं। हालांकि, अभी इसकी स्पष्ट घोषणा बाकी है।

दूसरी तरफ सिद्धू लंबे समय से कैप्टन के गढ़ पटियाला में डेरा जमाकर बैठे हैं। उनकी सारी राजनीतिक गतिविधियां वहीं से चल रही हैं। इसलिए यह माना जा रहा था कि वह पटियाला से कैप्टन को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन सिद्धू ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उनका चुनावी मैदान अमृतसर ही होगा। सिद्धू का कहना है कि वह अमृतसर छोड़कर कहीं नहीं जा सकते। अमृतसर के लिए उन्होंने भाजपा का साथ तक छोड़ दिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अमृतसर से सिद्धू की जगह अरुण जेटली को मैदान में उतारा था। सिद्धू को कहीं और से लड़ने को कहा गया, लेकिन उन्होंने इससे इन्कार दिया। हालांकि, जेटली को कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। बाद में भाजपा ने सिद्धू को राज्यसभा का सदस्य बनाकर संसद भेजा, लेकिन उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई और उन्होंने पार्टी छोड़ना ही बेहतर समझा।

उधर, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी फाजिल्का की जलालाबाद सीट से ही चुनाव लड़नेे का एलान कर चुके हैं। वह यह बात कई बार दोहरा चुके हैं कि अपनी पुरानी सीट छोड़ कर नहीं जाएंगे। अभी हालांकि वह फिरोजपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं, लेेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में वह यहां से विधायक के तौर पर जीते थे। 2019 में उन्होंने लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाया और विजयी हुए।

सुखबीर यह भी साफ कर चुके हैं कि हरसिमरत कौर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। वह इस समय बठिंडा सीट से सांसद हैं। हालांकि, शिअद के संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के चुनाव लड़ने पर अभी संशय है। सुखबीर ने कहा है कि पार्टी जल्द इस पर फैसला लेगी। बड़े बादल इस समय मुक्तसर के लंबी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। यदि वे लड़ेंगे तो इसी सीट से वरना चुनाव नहीं लड़ने का फैसला करेंगे।

'घर' छोड़ने में नुकसान

पंजाब में वर्तमान राजनीति स्थिति को देखते हुए कोई भी प्रत्याशी अपनी मजबूत सीट छोड़ने की गलती नहीं करेगा। पहले पंजाब में कांग्रेस बनाम शिअद-भाजपा मुकाबला होता था, तो वोट भी दो हिस्सों में ही बंटते थे। 2017 में आम आदमी पार्टी की एंट्री से इसके तीन हिस्से हो गए। सबसे ज्यादा सेंध शिअद के वोट बैंक में लगी। इस बार चुनाव में शिअद और भाजपा भी अलग हो गए हैं और कैप्टन ने अपनी पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी बना ली है। लिहाजा, वोट पांच हिस्सों में बंटेंगे और जीत का मार्जिन कम होगा। इसके अलावा शिअद से अगल हुए गुट भी कुछ खेल बिगाड़ेंगे। ऐसे में सुरक्षित सीट से लड़ना ही समझदारी होगी।

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