गरीबी के बोझ में दबे National level की एथलेटिक हरप्रीत काैर के सपने, बारिश में टपक रही मकान की छत

हरप्रीत कौर ने स्कूल स्तर पर दौड़ के मुकाबलों में कई खिताब जीते हैं। सबसे बड़ा ईनाम उसने जूनियर वर्ग में पंजाब की नुमाइंदगी करते हुए 2018 में धर्मशाला में हुए राष्ट्रीय मुकाबलों में तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक के रूप में जीता।

Sun, 12 Sep 2021 04:31 PM (IST)
राष्ट्रीय स्तरीय एथलेटिक खिलाड़ी हरप्रीत कौर गरीबी में जीने काे मजबूर। (जागरण)

दिड़बा, (संगरूर) हरमेश मेशी। खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार तरह-तरह की घोषणाएं कर रही है। कई दावे कर रही है। दूसरी ओर आज भी कई ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जो सरकार की उदासीनता के कारण बेरोजगारी व गरीबी का बोझ झेल रहे हैं। कुछ ऐसे ही दौर से दिड़बा के नजदीकी गांव संतपुरा की राष्ट्रीय स्तरीय एथलेटिक खिलाड़ी हरप्रीत कौर गुजर रही है। मजदूर परिवार में पैदा हुई हरप्रीत कौर दिन रात गरीबी से लड़ रही है। खेल के प्रति उसके सपने हर दिन गरीबी के आगे दम तोड़ रहे हैं।

400 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर जीता कांस्य पदक

हरप्रीत कौर ने बताया कि वह पांचवीं कक्षा से खेल में भाग ले रही है। स्कूल स्तर पर दौड़ के मुकाबलों में कई ईनाम व खिताब जीते हैं। सबसे बड़ा ईनाम उसने जूनियर वर्ग में पंजाब की नुमाइंदगी करते हुए 2018 में धर्मशाला में हुए राष्ट्रीय मुकाबलों में तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक के रूप में जीता। अब वह पब्लिक कालेज समाना में बीए भाग पहला की पढ़ाई कर रही है। जीते हुए मेडल अपने गले में डालकर हरप्रीत ने कहा कि आज तक किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संस्था ने उसका हाथ नहीं पकड़ा। वह पढ़कर आइपीएस अधिकारी बनना चाहती है और अपनी खेल को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन घर के आर्थिक हालत उसके कदमों की जंजीरें बन चुके हैं। अगर सरकार से उसे खेल व पढ़ाई में मदद मिल जाए तो वह अपने सपनों को साकार करके देश का नाम रोशन कर सकती है। 

बरसात की बूंदों से लगने लगा है डर, टपकती है घर की छत

गांव संतपुरा में मजदूरी कर रहे पिता नाहर सिंह के घर राष्ट्रीय स्तर की एथलीट हरप्रीत कौर अपने सपने दफन करती नजर आ रही है। 1988 में बने पुराने घर में रह रही राष्ट्रीय स्तरीय धावक हरप्रीत कौर को यह फिक्र रहता है कि जब बारिश होती है तो उसके घर की लकड़ी से बनी छत में से पानी टपकना शुरू हो जाता है। अब तो हरप्रीत बादलों को देखकर ही घबरा जाती है, क्योंकि छत से टपकता पानी उसके सपनों को भिगो रहा है।

परिवार बेबस, परंतु लगातार प्रयासरत

हरप्रीत कौर के पिता नाहर सिंह व माता जसविंदर कौर ने कहा कि सरकार उनका घर बनाने व हरप्रीत की खेल को आगे बढ़ाने के लिए मदद करे। मजदूरी कर रहे पिता नाहर ने कहा कि वह अपनी बच्ची के सपने मरने नहीं देंगे। हर तरह की कोशिश करके उसे पढ़ाएंगे व खेल को बेहतर बनाने के लिए हर प्रयास करेंगे। वह चाहते हैं कि उनकी बेटी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बने और अपने परिवार का नाम रोशन करे।

 

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