मेरीटोरियस स्कूलों के अध्यापकों ने शिक्षा मंत्री की कोठी के पास किया प्रदर्शन, कांग्रेस सरकार पर लगाया नजरअंदाज करने का आरोप

मेरीटोरियस स्कूलों को तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार की तरफ से मेधावी विद्यार्थियों को निश्शुल्क पढ़ाई के साथ-साथ रेजिडेंशियल सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से खोले गए थे। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इन स्कूलों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

Vinay KumarWed, 24 Nov 2021 01:13 PM (IST)
सरकार की तरफ से इन अध्यापकों को उनकी मांगों का हल करने संबंधी आश्वासन भी दिया जा चुका है। जागरण

जागरण संवाददाता, जालंधर। मेरिटोरियस स्कूलों के शिक्षक रेगुलर करने की मांग को लेकर बुधवार को शिक्षा मंत्री की कोठी के पास जमकर प्रदर्शन किया। यह शिक्षक 2014 से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अपनी सेवाओं के बदले लगातार प्रदेश सरकार से रेगुलर करने की मांग कर रहे है। उनका कहना है कि वह राज्य में मेधावी विद्यार्थियों को रेजिडेंशियल स्कूल मैं उत्तम तरीके से पढ़ाई से जोड़ रहे हैं। यह स्कूल उस समय की अकाली-भाजपा सरकार की तरफ से मेधावी विद्यार्थियों को निश्शुल्क पढ़ाई के साथ-साथ रेजिडेंशियल सुविधा देने के लिए खोले गए थे। तब इन शिक्षकों को कांट्रेक्ट बेस पर ही रखा था। मगर कांग्रेस सरकार के समय से इन स्कूलों को लगातार नजरअंदाज ही किया जा रहा है।

सरकार की तरफ से उनकी मांगों को पूरा करने संबंधी भी आश्वासन दिया गया था। मगर वह निरंतर उनकी मांगों को टाल रहे हैं। यही कारण है कि अब इसे लेकर राज्य भर के सभी स्कूलों के शिक्षक जालंधर में शिक्षा मंत्री की कोठी का घेराव करने के लिए मजबूर हुए हैं। इससे पहले शिक्षकों की तरफ से राज्य भर के स्कूलों के बाहर भी शिक्षक निरंतर उक्त मांग को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं। यही नहीं उनकी तरफ से स्कूलों के बाहर पक्का मोर्चा तक लगाया गया था।

मेरीटोरियस स्कूल टीचर यूनियन के प्रधान कुलविंदर बाठ का कहना है कि वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में अपना अहम योगदान दे रहे हैं, जिसके परिणाम के तौर पर विभाग के पास मैरिट में आने वाले विद्यार्थियों की अच्छी खासी लिस्टें भी हैं। यही नहीं कई तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करवाने के लिए भी वे दिनरात मेहनत कर रहे हैं। उनकी तरफ से विद्यार्थियों की बेहतरी के लिए कोई भी कमी नहीं छोड़ी गई, इसलिए अब सरकार उनकी भी बेहतरी के लिए आगे आए। शिक्षकों ने बताया कि उनकी इस मांग के पूरा होने से उनका हौसला भी दोगुना होगा।

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