जालंधर के इस मंदिर में प्रतिष्ठापित है भगवान शिव की सैकड़ों फुट उंची प्रतिमा, दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

जालंधर की पुरानी जेल रोड पर स्थित है श्री महालक्ष्मी मंदिर। एक तरफ आदर्श नगर तो दूसरी तरफ शहर का पुराना जीटी रोड। इसके मध्य में स्थित पुरानी जेल के सड़क मार्ग पर स्थित इस मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

Vikas_KumarTue, 27 Jul 2021 08:04 AM (IST)
श्री महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

जालंधर, जागरण संवाददाता। जिले की पुरानी जेल रोड पर स्थित है श्री महालक्ष्मी मंदिर। एक तरफ आदर्श नगर तो दूसरी तरफ शहर का पुराना जीटी रोड। इसके मध्य में स्थित पुरानी जेल के सड़क मार्ग पर स्थित इस मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। रेलवे स्टेशन या फिर बस स्टैंड से मंदिर तक पहुंचने के लिए पुरानी जेल तक आसानी से थ्रीव्हीलर उपलब्ध है। वहां से चंद कदमों की दूरी पर स्थित है यह मंदिर।

मंदिर का इतिहास

मंदिर का निर्माण करीब पांच दशक पूर्व करवाया गया था। एंग्रीश परिवार की तरफ से किए गए निर्माण के बाद शहर के गणमान्य लोगों को साथ लेकर इस मंदिर का विकास करवाया गया। इस मंदिर की खास बात यह है कि दोआबा में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें भगवान शिव की सैकड़ों फुट उंची प्रतिमा प्रतिष्ठापित है। इस मंदिर में दो विशाल हाल भी बनाए गए हैं, जिसमें लोग कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

तैयारियां

सावन माह को लेकर मंदिर में व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। शिवालय के बाहर भांग, धतूरा, विल्प पत्र सहित पूजा का तमाम तरह का सामान उपलब्ध करवाया गया है। इसके अलावा मंदिर के बाहर अस्थाई बाजार भी सावन महीने में लगता है, जहां पर लोग पूजा सामग्री की खरीदारी करते हैं। सावन महीना व महाशिवरात्रि पर विभिन्न संस्थाओं की तरफ से इस मंदिर में लंगर लगाया जाता है।

शिव भक्तों को बेहतर सेवाएं देने के लिए मंदिर में व्यापक प्रबंध किए गए हैं। इसके अलावा कोरोना महामारी को लेकर सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करवाने के लिए भक्तों को मास्क पहन कर ही मंदिर में आने का आह्वान किया गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को कंट्रोल रखने के लिए सेवादार भी तैनात किए गए हैं।

- दर्शन लाल शर्मा, प्रधान, प्रबंधक कमेटी

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महाशिवरात्रि व सावन महीने में आने वाले सोमवार को कई श्रद्धालु चार पहर की पूजा करते हैं। ऐसे में इन पवित्र दिनों में मंदिर के कपाट दिनभर खोले रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की समस्या न हो। इसके अलावा व्रत का अध्यापन करने के लिए भी मंदिर के पुरोहितों द्वारा अतिरिक्त सेवाएं दी जाएंगी।

- राहुल बाहरी, प्रवक्ता, प्रबंधक कमेटी।

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