सीपी व डीसी साहब, क्या जालंधर को अब जाम की आदत डाल लेनी चाहिए

एक सप्ताह से रोज-रोज जाम व परेशानी झेल रहे लोगों को शायद अब जाम की आदत डाल लेनी चाहिए। पांच दिन तक गन्ना किसानों ने धन्नोवाली पर जाम लगाया जिससे पूरे शहर की रफ्तार रुक गई।

JagranFri, 27 Aug 2021 06:30 AM (IST)
सीपी व डीसी साहब, क्या जालंधर को अब जाम की आदत डाल लेनी चाहिए

-रोज धरने-प्रदर्शन और जाम से शहरवासी हो चुके परेशान, प्रशासन से पूछा-जाम करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

-पांच दिन तक गन्ना किसानों के प्रदर्शन के कारण रुक गई थी शहर की रफ्तार

-जाम से परेशानी आखिर कब तक? जब धरना-प्रदर्शन की जगह तय तो रोज-रोज हाईवे व शहर जाम करना कहां तक सही?

------------------------------------------------------------------------------------------ जागरण टीम, जालंधर: एक सप्ताह से रोज-रोज जाम व परेशानी झेल रहे लोगों को शायद अब जाम की आदत डाल लेनी चाहिए। पांच दिन तक गन्ना किसानों ने धन्नोवाली पर जाम लगाया जिससे पूरे शहर की रफ्तार रुक गई। छठे दिन किसान सर्किट हाउस में मीटिंग करने गए भाजपा नेताओं को घेरने पहुंचे तो पुलिस ने पूरे शहर में बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक रोक दिया। वीरवार को सिख संगठनों ने पीएपी चौक के पास नेशनल हाईवे पर दो घंटे जाम लगाया और शहर में किसान भाजपा नेताओं के खिलाफ बीएमसी चौक पर बैठ गए। दोनों मुख्य मार्गो पर धरना लगा होने के कारण पूरा शहर फिर जाम में फंस गया और लोग परेशान हुए। उन्होंने इंटरनेट मीडिया व वाट्सएप पर स्टेटस लगाकर प्रशासन व सरकार को खूब कोसा और पूछा कि जब धरना-प्रदर्शन की जगह तय है तो जाम लगाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। जाम में वे और कितने दिन परेशान होंगे।

दरअसल, डेरा बाबा मुराद शाह में की गई टिप्पणी की माफी मांगने के बावजूद सिख संगठन गुरदास मान पर मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। वे लगातार तीन दिन और तीन रातें एसएसपी कार्यालय के बाहर बैठे रहे। वीरवार को जब उन्होंने रामामंडी के पास हाईवे जाम कर दिया तो पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसी बीच बुधवार दोपहर से सर्किट हाउस के बाहर बैठे किसानों ने बीएमसी चौक में धरना देकर ट्रैफिक जाम कर दिया। बुधवार को भी सर्किट हाउस के बाहर हंगामा हुआ था और पुलिस की अव्यवस्था के कारण पूरा शहर जाम में फंस गया था। बीएमसी चौक पर धरने के दौरान भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के प्रवक्ता कश्मीर सिंह ने कहा कि किसान सभी नेताओं का जिलों व गांव में आने पर विरोध करेंगे। विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कृषि सुधार कानून रद नही किए जाते।

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