जालंधर में पानी बचाने के लिए लगाया रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट, लोगों को कर रहे जागरूक

जालंधर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए पिछले 20 साल से अभियान चला रहे रिटायर्ड प्रोफेसर कविंद्र कुमार घई का दर्द इन पंक्तियों से छलक उठता है। वह कहते हैं कि लोग देख और सुन कर भी जागरूक नहीं हो रहे।

Vikas_KumarMon, 07 Jun 2021 09:33 AM (IST)
लोगों को यह समझना ही होगा कि पानी की बचत जरूरी है।

जालंधर, [प्रियंका सिंह]। 'तुम मानो या न मानो यह मुकद्दर है तुम्हारा, मेरा तो फर्ज है आवाज लगाते रहना।' पानी की बर्बादी रोकने के लिए पिछले 20 साल से अभियान चला रहे रिटायर्ड प्रोफेसर कविंद्र कुमार घई का दर्द इन पंक्तियों से छलक उठता है। वह कहते हैं कि लोग देख और सुन कर भी जागरूक नहीं हो रहे। ऐसे ही हालात रहे और अगर हम अब भी न संभले तो मिट जाएंगे। जिस तरह आज कोरोना जैसे संक्रमण से जूझ रहे हैं, उसी तरह से हम पानी की कमी से भी जूझेंगे। लोगों को यह समझना ही होगा कि पानी की बचत जरूरी है।

वह अब तक हजारों लोगों को अभियान के साथ जोड़कर जागरूक कर चुके हैं। नगर निगम से अब तक कई पार्कों के फौव्वारे बंद करवा चुके हैं। लोगों को पानी के प्रति जागरूक करने के लिए दूरदर्शन, रेडियो और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पर्यावरण और पानी की बचत पर सात पुस्तकें लिख चुके प्रोफेसर केके घई ने बारिश के पानी को सहेजने की शुरुआत फैक्ट्री में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाकर की थी। उस पानी का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन, साफ सफाई और पौधों को पानी देने के लिए करने को कहते हैं। उनसे प्रेरित होकर कुछ लोगों ने अपने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए हैं। जहां भी नल से पानी बहता देखते हैं, उसे बंद करते हैं। रोटी, कपड़ा, मकान और पानी स्लोगन से लोगों को पानी की अहमियत बताते हैं।

डीएवी कालेज से हेड आफ डिपार्टमेंट पालिटिकल साइंस पद से रिटायर्ड केके घई आदर्श नगर में रहते हैं। वह बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ पानी एवं पर्यावरण के लिए भी उन्हेंं जागरूक करते आए हैं। वह बातते हैं कि आदर्श नगर सहित शहर के कई पार्कों में पहले नगर निगम की तरफ से फौव्वारे लगे हुए थे, जिससे पानी की बहुत बर्बादी हो रही थी। उन्हे बंद करवा कर हर पार्क में हाफ काक टूटियां लगवाई। इससे हर पौधे को जरूरत अनुसार पानी भी मिल जाता है और पानी की बचत भी होती है।

पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने में जुटे

प्रोफेसर घई का दर्द है कि वह जो टूटियां लगवाते हैं, लोग उसे निकाल कर ले जाते हैं। वह अभी शहर के कुछ पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के कार्य में जुटे हुए हैं। उनका मानना है कि अगर हमारे लिए यह तीन चीजें (रोटी, कपड़ा और मकान) जरूरी है तो इन तीन चीजों को बनाने के लिए पानी जरूरी है।

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